- नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर बाढ़ प्रभावितों गांवों में फंसे लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं
- काठमांडू जाने के लिए बाढ़ पीड़ित लंबी कतारों में 24 से 48 घंटे तक हेलिकॉप्टर का इंतजार कर रहे हैं
- 26 अगस्त को आई बाढ़ में कई गांवों में घर, सड़कें और दुकानें बह गईं, लोगों की जान-माल को भारी नुकसान हुआ है
एक साल के बेटे को पीठ पर बांधे पेम्बा नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर का इंतजार कर रही हैं. उन्हें काठमांडू जाना है. पेम्बा उन करीब 100 बाढ़ पीड़ितों में शामिल हैं, जिन्हें नेपाली सेना के हेलिकॉप्टरों ने नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा जिले के चिलिमे गांव से रेस्क्यू किया है. पेम्बा, उनके पति और उनका बेटा लामू काठमांडू जाने के लिए हेलिकॉप्टर में जगह मिलने का इंतजार कर रहे हैं. यह इंतजार 24-48 घंटों तक खिंच रहा. पेम्बा का कहना है कि वह फिलहाल काठमांडू में अपने भाई के साथ रहेंगी. उन्हें नहीं पता कि वह अपने गांव कब वापस लौट पाएंगी.
पेम्बा ने NDTV को बताया कि उन्होंने 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ को अपने ऊंचाई पर बसे गांव से अपनी आंखों के सामने देखा. उन्होंने देखा कि घर, दुकानें और सड़कें पानी में बहती चली गईं. पेम्बा ने NDTV से कहा, “यह बहुत दुखद है. सब कुछ खत्म हो गया. सेना हमें यहां लेकर आई है. अब उम्मीद है कि हमें काठमांडू जाने के लिए हेलिकॉप्टर में जगह मिल जाएगी. फिलहाल हम भाई के साथ वहीं रहेंगे.”
'अभी बहुत लोग फंसे हुए हैं', अपना गांव छोड़ काठमांडू जा रही युवती ने NDTV से की बात#NepalFloods | @RajputAditi | @DeoSikta pic.twitter.com/o6nQRaRyEL
— NDTV India (@ndtvindia) September 2, 2026
नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर रसुवा और नुवाकोट के बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को बचाने के लिए लगातार उड़ान भर रहे हैं. बचाए गए लोगों को धुंचे लाया जा रहा है. यहां काठमांडू जाने के लिए हेलिकॉप्टर में जगह पाने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी हैं.
सेना पहले ऊंचाई वाले इलाकों में फंसे लोगों को बचाने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है. लोग लंबी और लगातार बढ़ती कतारों में बैठे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. कई लोगों को हेलिकॉप्टर में जगह मिलने के लिए 24 से 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है. सेना के कैंप में लोगों का नाम दर्ज किया जा रहा है. इसके बाद नाम पुकारे जाते हैं और लोगों को काठमांडू जाने वाले हेलिकॉप्टर में बैठाया जाता है.
तलाश, उम्मीद और इंतजार
नेपाल में रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित 11 जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रोपावर प्लांट्स) में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बचाने का अभियान भी चल रहा है. इन परियोजनाओं में लोगों के भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के रास्ते वाले इलाकों में फंसे होने की आशंका है. प्राइवेट सेक्टर की बिजली परियोजनाएं बनाने वाली कंपनियों के संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (आईपीपीएएन) के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित रसुवा और नुवाकोट की 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कुल 897 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है.
नेपाली सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन के सुरंग विशेषज्ञ नेपाल पहुंच चुके हैं. वे जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं.
बता दें कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास प्रयलकारी बाढ़ आई. इस भयानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों और गांवों में भारी तबाही मचा दी. इस आपदा में 1100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं.
हिमालय की सीमा वाले इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटे कोशी नदी बाढ़ का पानी अपने साथ नीचे की ओर ले गई. तेज पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया.
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