Mauritius Got Chagos From Britain: ब्रिटेन (Britain) ने चागोस द्वीप समूह (Chagos Islands) की संप्रभुता मॉरीशस (Mauritius)को सौंप दी है. इसमें भारत (India) ने एक शांत, लेकिन महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि भूमिका निभाई है. सूत्रों ने कहा कि भारत ने उपनिवेशवाद के अंतिम अवशेषों को दूर करने की आवश्यकता का दृढ़तापूर्वक और लगातार समर्थन किया है. ब्रिटेन और मॉरीशस के संयुक्त बयान में नई दिल्ली की भूमिका का जिक्र हुआ था. संयुक्त बयान में कहा गया, "आज के राजनीतिक समझौते तक पहुंचने में, हमें अपने करीबी सहयोगियों संयुक्त राज्य अमेरिका और भारतीय गणराज्य का पूरा समर्थन और सहायता मिली है."
सूत्रों ने कहा, भारत ने दोनों पक्षों को "खुले दिमाग और पारस्परिक रूप से लाभप्रद परिणाम प्राप्त करने के दृष्टिकोण से" बातचीत करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया. ऐसा माना जाता है कि अंतिम परिणाम "इसमें शामिल सभी पक्षों की जीत है और हिंद महासागर क्षेत्र में दीर्घकालिक सुरक्षा को मजबूत करेगा.
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भारत ने क्या कहा?
समझौते का स्वागत करते हुए अपने संदेश में, नई दिल्ली ने कहा, "भारत ने चागोस पर संप्रभुता के लिए मॉरीशस के दावे का लगातार समर्थन किया है. यह भारत के अन्य राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन और साथ ही साथ मॉरीशस के साथ उसकी दीर्घकालिक और करीबी साझेदारी पर अपने सैद्धांतिक रुख के अनुरूप है."
दशकों से था विवाद
चागोस को सौंपने के लिए ब्रिटेन पर दशकों से दबाव रहा है. फरवरी 2019 में, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने चागोस द्वीप समूह पर ब्रिटिश नियंत्रण को अवैध घोषित कर दिया था. तीन महीने बाद, संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया, जिसमें मांग की गई कि ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह का नियंत्रण छोड़ दे. हालांकि, ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया बेस का हवाला देते हुए विरोध किया था, जो हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिकी अभियानों में मदद के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रमुख बेस है.
आज का यह कदम दो साल की बातचीत के बाद आया है, जिसे दोनों देशों ने समान संप्रभु राज्यों के रूप में सम्मानजनक तरीके से आयोजित किया था. राजनीतिक समझौता एक संधि और कानूनी रूप से अंतिम रूप देने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. इसे दोनों पक्षों ने जितनी जल्दी हो सके पूरा करने का संकल्प किया है.
पिछले दशक में, नई दिल्ली ने चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए हिंद महासागर में अपनी समुद्री रणनीति पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें मॉरीशस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और अटलांटिक महासागर का प्रवेश बिंदु भी है.
भारत हिंद महासागर में प्रमुख बिंदुओं फारस की खाड़ी, मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिणी अफ्रीका के अन्य देशों से भी संबंध मजबूत कर रहा है. मेडागास्कर, मोज़ाम्बिक और सेशेल्स के साथ विभिन्न मोर्चों पर संबंधों का विस्तार करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं.
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