Laos cave Rescue Mission: सोने की तलाश में निकले 7 लोगों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह सफर मौत के जाल में बदल जाएगा. वे लाओस की एक गहरी और खतरनाक गुफा में गए थे लेकिन अचानक आई बाढ़ ने उन्हें अंदर ही कैद कर दिया. कई दिनों तक अंधेरे, भूख और डर के बीच फंसे इन लोगों तक पहुंचने के लिए अब रेस्क्यू टीमें वक्त से दौड़ लगा रही हैं. हर नई बारिश खतरा और बढ़ा रही है. 5 लोगों को जिंदा ढूंढ लिया गया है, लेकिन दो लोगों का अब भी कोई पता नहीं है. जिन्हें जिंदा ढूंढ भी लिया गया है, उन्हें जिंदा ही बाहर निकालना बहुत मुश्किल काम है. चलिए पूरी खबर आपको बताते हैं.
लाओस में क्या हुआ?
लाओस दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित एक लैंडलॉक्ड देश है, यानी इसके चारों ओर दूसरे देश हैं, समुद्र नहीं. गुरुवार को भी यहां बचावकर्मी पानी से भरी उस गुफा से पानी निकालने में जुटे रहे, जहां 7 लाओस नागरिक एक हफ्ते से ज्यादा समय से फंसे हुए हैं. इनमें से 2 लोगों का क्या हुआ, इसका अब तक पता नहीं चल पाया है. विशेष गोताखोरों ने बुधवार को इनमें से 5 लोगों को जिंदा ढूंढ लिया था. वे गुफा के बाहर निकलने वाले रास्ते से करीब 300 मीटर दूर एक संकरी जगह में बैठे मिले. लेकिन गुफा में पानी भरा होने, जमीन धंसने के खतरे और अंदर मौजूद दूसरी मुश्किलों की वजह से उन्हें अभी तक बाहर नहीं निकाला जा सका है.
ये 7 लोग 20 मई से लाओस के सायसोम्बून प्रांत की इस गुफा में फंसे हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग सोना खोजने गए थे, लेकिन भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया. अब फिर से बारिश की संभावना को देखते हुए बचावकर्मियों की टीमें तेजी से गुफा का पानी बाहर निकालने में लगी हैं.
रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल क्यों
यह गुफा पहाड़ों के बीच एक दूरदराज इलाके में है और जमीन के काफी नीचे तक फैली हुई है. इस गुफा में अंदर जाने का रास्ता बेहद संकरा और खतरनाक है. गुफा का प्रवेश रास्ता 2 मीटर नीचे जाता है और फिर 45 डिग्री के तेज ढलान पर नीचे आगे बढ़ता है, जहां बचावकर्मियों को रेंगकर आगे बढ़ना पड़ रहा है. कुछ जगहों पर सुरंग सिर्फ 60 सेंटीमीटर चौड़ी है, यानी एक इंसान मुश्किल से निकल सकता है. अंदर कई जगह 4-5 मीटर गहरी ढलान और फिसलन भरे पत्थर हैं. गुफा में पानी भरने और बारिश का खतरा लगातार बना हुआ है, जिससे रास्ता और मुश्किल हो रहा है. इसके अलावा 5 लोग गुफा के अंदर करीब 300 मीटर दूर मिले हैं और बाकी 2 लोगों की तलाश अभी भी जारी है, इसलिए पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन समय के खिलाफ एक बेहद जोखिम भरी लड़ाई बन गया है.
गुरुवार की सुबह हुई बारिश से फिर गुफा के अंदर मिट्टी और पानी भर गया.
थाईलैंड की “वाइल्ड बोअर्स” फुटबॉल टीम को बचाने वाली टीम के सदस्य फिनलैंड के गोताखोर मिक्को पासी ने बुधवार को कहा कि बचावकर्मी “समय के खिलाफ लड़ाई” लड़ रहे हैं. उन्होंने इस जगह को “छोड़ी हुई सोने की खान” बताया.
टीम के लिए एक अच्छी खबर यह है कि सरकारी लाओ न्यूज एजेंसी के मुताबिक ये लोग गुफा के अंदर एक ऊंची जगह पर फंसे हैं, जहां लगातार हवा पहुंच रही है. दूसरी अच्छी बात यह है कि बहुत ज्यादा भूख लगने के अलावा उनकी हालत ज्यादातर ठीक दिखाई दे रही है. हालांकि उन्होंने डर जताया है कि अगर उन्हें ज्यादा समय तक गुफा में रहना पड़ा तो हालत खराब हो सकती है. अंदर फंसे एक आदमी ने कैमरे पर बचावकर्मी से कहा, “अगर हमें खाना नहीं मिला तो हमारी ताकत खत्म हो जाएगी. अगर हम दो दिन और यहां फंसे रहे तो हम मर जाएंगे.”
हालांकि गुफा के अंदर जिस रास्ते से उन्हें बाहर लाया जाएगा वहां हवा बहुत कम है. इसलिए बचाव टीम को ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाने होंगे. अगर फंसे लोग ज्यादा कमजोर हो गए तो उन्हें बाहर लाने के लिए खास तरह की स्ट्रेचर भी इस्तेमाल करनी पड़ेगी. इसके अलावा अब एक नई मुश्किल हाइड्रोजन सल्फाइड गैस बन गई है. यह बदबूदार गैस गुफा में चमगादड़ों की सड़ी हुई बीट से निकल रही है. एक बचावकर्मी ने CNN को बताया कि इस गैस की वजह से कुछ टीम सदस्य बेहोश भी हो गए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं