पश्चिम अफ्रीकी देश माली एक बार फिर जिहादी हिंसा की आग में झुलस गया है. मध्य माली के कई गांवों में हुए ताजा हमलों में दर्जनों निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई है. स्थानीय और सुरक्षा सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है.
इस भीषण हमले की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़े गुट 'ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स' (JNIM) ने ली है. बताया जा रहा है कि आतंकियों ने उन गांवों को निशाना बनाया है जिन्होंने उनके साथ समझौते करने से इनकार कर दिया था.
आंकड़ों में स्थिति बेहद भयावह नजर आती है. बुधवार को हुए हमलों में कम से कम 30 लोग मारे गए थे, लेकिन शुक्रवार को हुई ताजा हिंसा में दर्जनों लोग मारे गए हैं. एक स्थानीय अधिकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में मरने वालों की कुल संख्या 70 के पार हो गई है, जबकि एक अन्य अधिकारी ने दावा किया है कि इस नरसंहार में 80 लोगों की जान जा चुकी है.
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'हम खून के आंसू रो रहे हैं'
आतंकियों की हरकत ने स्थानीय निवासियों के मन में आक्रोश भी पैदा कर दिया है. एक स्थानीय युवा नेता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "हम खून के आंसू रो रहे हैं."
उन्होंने आरोप लगाया कि पास ही में सेना की टुकड़ियां तैनात थीं, जिन्हें मदद के लिए कई बार फोन किए गए और गुहार लगाई गई, लेकिन सैनिकों ने गांव वालों की जान बचाने के लिए कुछ भी नहीं किया.
सुरक्षा सूत्रों ने भी इस क्षेत्र की स्थिति को 'बेहद चिंताजनक' बताया है. विशेषज्ञों का कहना है कि JNIM जानबूझकर उन बस्तियों को निशाना बना रहा है जो उनके कट्टरपंथी नियमों या स्थानीय समझौतों को मानने से इनकार कर रही हैं.
उत्तरी माली पर अब आतंकियों का कब्जा
माली में सुरक्षा की स्थिति अब बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है. यह ताजा हमला पिछले महीने सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा (सैनिक शासन) पर हुए उस बड़े हमले के बाद हुआ है.
इस हमले को JNIM और तुआरेग विद्रोहियों के संगठन 'अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट' (FLA) ने अंजाम दिया था. उस हमले ने सरकार की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी थी और अब ये आतंकी संगठन लगातार ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.
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