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खुद के दम पर अमेरिका की 7वीं सबसे अमीर महिला बनीं भारतवंशी जयश्री की कहानी, इन 7 ने भी किया देश का नाम

जयश्री को भरोसा था कि आने वाले समय में 'क्लाउड कंप्यूटिंग' की वजह से डेटा सेंटर्स का काम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है.

खुद के दम पर अमेरिका की 7वीं सबसे अमीर महिला बनीं भारतवंशी जयश्री की कहानी, इन 7 ने भी किया देश का नाम
अरिटा नेटवर्क्स के जरिए अरबपति सीईओ बनने से पहले जयश्री ने टेक इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनियों में सालों तक काम किया.

साल 2008 में जयश्री उल्लाल ने एक छोटे से नेटवर्किंग स्टार्टअप 'अरिटा नेटवर्क्स' (Arista Networks) में कदम रखा था, तब उस कंपनी की कमाई शून्य थी और वहां 50 से भी कम कर्मचारी काम करते थे. तब किसी ने कहां सोचा था कि जयश्री कभी अमेरिका की सबसे अमीर महिलाओं में शुमार हो जाएंगी. लेकिन आज करीब दो दशक बाद, जयश्री ने इस कंपनी को सिलीकॉन वैली की सबसे सफल नेटवर्किंग कंपनियों में खड़ा कर दिया है. इसके अलावा खुद भी अमेरिका की सबसे अमीर 'सेल्फ-मेड' महिलाओं में शामिल हो चुकी हैं. यानी अपने बल-बुते पर कंपनी को इस मुकाम पर पहुंचा दिया.

प्रतिष्ठित फोर्ब्स मैगजीन की 2026 की 'अमेरिकाज रिचेस्ट सेल्फ-मेड विमेन' लिस्ट में जयश्री उल्लाल को 7वां स्थान मिला है. लगभग 6.8 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ जयश्री इस सूची में शीर्ष पर पहुंचने वाली भारतीय मूल की सबसे अमीर महिला बन गई हैं. उनकी यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम किसी पारिवारिक बिजनेस के दम पर नहीं, बल्कि अपनी इंजीनियरिंग, लीडरशिप और क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सही समझ के बदौलत हासिल किया है.

लंदन में जन्मीं, दिल्ली में हुई परवरिश

जयश्री उल्लाल का जन्म लंदन में भारतीय माता-पिता के घर हुआ था, लेकिन उनकी शुरुआती परवरिश और पढ़ाई नई दिल्ली में हुई. बचपन से ही उनका झुकाव तकनीक और इंजीनियरिंग की तरफ था. आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका गईं. वहां उन्होंने सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और फिर सांता क्लारा यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.

ज्यादातर बिजनेस लीडर जहां फाइनेंस या मैनेजमेंट के रास्ते टेक कंपनियों के शीर्ष पर पहुंचते हैं, वहीं जयश्री ने अपने करियर की शुरुआत एक मजबूत तकनीकी बैकग्राउंड के साथ की. उनकी यही तकनीकी समझ आगे चलकर उस दौर में सबसे बड़ा हथियार बनी, जब दुनिया इंटरनेट और नेटवर्किंग से आगे बढ़कर क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई के युग में प्रवेश कर रही थी.

CISCO में नेटवर्किंग का ककहरा सीखा

अरिटा नेटवर्क्स के जरिए अरबपति सीईओ बनने से पहले जयश्री ने टेक इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनियों में सालों तक जमीन पर काम किया. उन्होंने एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस (AMD) और फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर जैसी कंपनियों में शुरुआती अनुभव हासिल किया. इसके बाद वह सिस्को सिस्टम्स (Cisco Systems) से जुड़ीं. Cisco उनके करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

सिस्को में जयश्री ने करीब 15 साल बिताए और सीनियर लीडरशिप के पदों तक पहुंचीं. यह वही दौर था जब सिस्को इंटरनेट क्रांति के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्किंग कंपनी बनकर उभर रही थी. वहां उन्होंने तत्कालीन सीईओ जॉन चैंबर्स के साथ मिलकर बेहद करीब से काम किया और बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी बिजनेस को मैनेज करने का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया.

साल 2008 का वो बड़ा जोखिम, जिसने बदल दी किस्मत

साल 2008 में जयश्री ने अपने करियर का सबसे बड़ा और जोखिम भरा फैसला लिया. उन्होंने सिस्को जैसी सुरक्षित और दिग्गज कंपनी की नौकरी छोड़कर एक बेहद छोटे स्टार्टअप 'अरिटा नेटवर्क्स' में बतौर प्रेसिडेंट और सीईओ एंट्री ली. ये कदम जयश्री के लिए बहुत बड़ा रिस्क था. उस वक्त अरिटा के पास रेवन्यू का कोई जरिया नहीं था और मार्केट में कोई ठोस पहचान भी नहीं थी. पूरा नेटवर्किंग बाजार सिस्को के कब्जे में था और छोटे स्टार्टअप्स के लिए टिक पाना नामुमकिन लग रहा था.

लेकिन जयश्री के पास एक विजन था. उन्हें पूरा भरोसा था कि आने वाले समय में 'क्लाउड कंप्यूटिंग' की वजह से डेटा सेंटर्स का काम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है. उन्होंने अरिटा को इसी नए दौर के हिसाब से तैयार करना शुरू किया. उनका यह दांव बिल्कुल सही बैठा और अरिटा के हाई-परफॉर्मेंस नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स बड़ी क्लाउड कंपनियों और टेक दिग्गजों की पहली पसंद बन गए. इसके बाद साल 2014 में वह अरिटा का आईपीओ (IPO) लेकर आईं. इस वजह से कंपनी ग्लोबल मार्केट में स्थापित हो गई.

वैश्विक मंच पर छाया भारतीय महिलाओं का दम

आज जयश्री उल्लाल की अगुवाई वाली अरिटा नेटवर्क्स उस इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुकी है. इसके दम पर पूरी दुनिया में क्लाउड और एआई (AI) का दौर चल रहा है. लेकिन वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों और बोर्डरूम्स को संभालने वाली जयश्री अकेली भारतीय महिला नहीं हैं. फॉर्च्यून की 'मोस्ट पावरफुल विमेन 2026' की सूची पर नजर डालें, तो कई अन्य भारतीय मूल की महिलाएं भी अलग-अलग सेक्टर्स में दुनिया का नेतृत्व कर रही हैं.

इस सूची में 9वें स्थान पर डॉ. रेशमा केलारमानी हैं, जो वर्टेक्स फार्मास्युटिकल्स की प्रेसिडेंट और सीईओ के रूप में हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ा नाम हैं. वहीं, 14वें स्थान पर मौजूद गुंजन केडिया 'यू.एस. बैनकॉर्प' की चेयरमैन और सीईओ के रूप में बैंकिंग इतिहास में अपना छाप छोड़ चुकी हैं.

टेक से लेकर लग्जरी और मनोरंजन जगत तक जलवा

इसी सूची में भारत की दिग्गज आईटी कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन रोशनी नाडार मल्होत्रा 33वें स्थान पर काबिज हैं, जो भारत में टेक लीडरशिप की मिसाल हैं. वहीं एंटरटेनमेंट की दुनिया में नेटफ्लिक्स पर हम क्या देखेंगे, यह तय करने वाली चीफ कंटेंट ऑफिसर बेला बजारिया इस लिस्ट में 35वें नंबर पर हैं. लग्जरी ब्रांड 'शनेल' की ग्लोबल सीईओ लीना नायर इस सूची में 37वें स्थान पर हैं.

इनके अलावा गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट की कमान संभाल रहीं मीना फ्लिन (रैंक 74) और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 'फ्लेक्स' की सीईओ रेवती अद्वैती (रैंक 75) भी इस सूची में हैं. तकनीक, फाइनेंस, हेल्थकेयर से लेकर लग्जरी और मनोरंजन तक, ये तमाम महिलाएं भारत से ताल्लुक रखती हैं.

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