टोक्यो से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर में स्थित है उत्सुनोमिया. लगभग पांच लाख आबादी वाले इस शहर में एक भालू ने हड़कंप मचा रखा है. नतीजतन, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 94 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बंद करने का निर्देश जारी किया. यह कदम तब उठाया जब शनिवार को शहर के एक पार्क के पास लगभग एक मीटर लंबे मध्यम आकार के काले भालू को देखा गया.
रविवार तड़के शहर के केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी भालू दिखाई दिया. फुटेज में वह दो युवकों के ठीक सामने दौड़ता नजर आया, जिससे वे घबरा गए. रविवार दिनभर भालू को रिहायशी इलाकों में देखा गया और सोमवार सुबह करीब 4 बजे वह शहर के केंद्र से लगभग 2 किलोमीटर दूर एक औद्योगिक क्षेत्र में भी दिखाई दिया.
जापानी समाचार एजेंसी क्योडो के अनुसार, शहर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, भालू दिखाई देने पर उसके पास न जाएं और निकटतम सुरक्षित भवन में शरण लें. स्थानीय निवासियों को सतर्क करने के लिए गाड़ियों से ऐलान किया जा रहा है. पुलिस और स्थानीय शिकार संघ ने सोमवार (8 जून 2026) सुबह भालू की तलाश फिर से शुरू कर दी.
भालू टोक्यो के इतने करीब नहीं दिखते
इस वर्ष जापान में भालुओं के दिखने की रिकॉर्ड 50,000 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें अधिकांश देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हुई हैं. आमतौर पर भालू टोक्यो के इतने करीब नहीं देखे जाते. हालांकि, पिछले महीने ओकूतामा में एक रूसी पर्वतारोही भालू के हमले में घायल हो गया था. इसके कुछ समय बाद एक अन्य भालू हाचिओजी शहर में भी दिखाई दिया.
मार्च तक के एक साल में भालू हमलों से होने वाली मौतों और चोटों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. इस समस्या से निपटने के लिए स्थानीय सरकारें अलग-अलग उपायों पर काम कर रही हैं. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े सीसीटीवी कैमरों के जरिए भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.
हाल के दिनों ज्यादा दिख रहे भालू
सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन जापान के मेन आईलैंड होंशू पर एशियाई काले भालुओं की आबादी 12,000 से 42,000 के बीच होने का अनुमान है. माना जाता है कि भालुओं की संख्या और उनके दिखने की घटनाएं दोनों बढ़ी हैं. ये भालू 1.5 मीटर तक लंबे और 120 किलोग्राम तक वजनी हो सकते हैं.
वहीं बड़े भूरे भालू केवल उत्तरी द्वीप होकूआइदो में पाए जाते हैं. नर भूरे भालुओं की औसत लंबाई लगभग 2 मीटर होती है और उनका वजन 400 किलोग्राम तक हो सकता है. उनकी अनुमानित संख्या लगभग 12,000 है.
विशेषज्ञों के हवाले से एनएचके-जापान की रिपोर्ट बताती है कि, बलूत (एकॉर्न) जैसे भालुओं के प्रमुख खाद्य स्रोतों की पैदावार में उतार-चढ़ाव होने पर वे भोजन की तलाश में कस्बों और गांवों की ओर आ जाते हैं. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों की आबादी, खासकर युवाओं की संख्या में कमी आने से कई रिहायशी क्षेत्र अधिक शांत हो गए हैं, जिससे भालुओं के वहां प्रवेश करने और इंसानों से आमना-सामना होने की घटनाएं बढ़ रही हैं.
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