बीजिंग:
चीन ने जापान के साथ भू-क्षेत्रीय विवादों की जड़ बने द्वीपों के एक समूह के लिए अपने दो गश्ती पोत रवाना कर दिए हैं।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने कहा है कि दोनों चौकसी पोत देश की सम्प्रभुता सुनिश्चित कराने के लिए दियाओयू द्वीपों के आसपास पहुंच गए हैं। द्वीपों के इस समूह को जापान में सेंकाकू द्वीप कहा जाता है।
यह कदम तब उठाया गया है, जब कुछ घंटे पहले ही बीजिंग स्थित जापानी राजदूत को विदेश मंत्रालय में बुलाकर द्वीपों के इस समूह में से तीन द्वीपों को खरीदने के जापान के निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई गई। जापान सरकार ने कहा है कि इन द्वीपों पर जापानी तटरक्षकों का अधिकार होगा।
चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा है कि ये द्वीप चीनी भूभाग के अभिन्न हिस्सा हैं, और उन्होंने संकल्प लिया है कि उनका देश अपनी सम्प्रभुता पर एक इंच पीछे नहीं हट सकता।
समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, जापान ने विवादित पांच सेंकाकू द्वीपों में से तीन द्वीपों को कुरिहारा परिवार से 2.61 करोड़ डॉलर में खरीदने के निर्णय की सोमवार को औपचारिक घोषणा की।
चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार तड़के एक बयान में कहा, "चीन सरकार घोषणा करती है कि इन द्वीपों को खरीदने की कोशिश बिल्कुल अवैध है।"
बयान में कहा गया है, "इससे जापान के आक्रमण और चीनी क्षेत्र पर उसके कब्जे तथा दियाओयू द्वीपों तथा उससे लगे टापुओं पर चीन की सम्प्रभुता के ऐतिहासिक तथ्य कभी नहीं बदले जा सकते।" बयान में कहा गया है कि जापान की एकतरफा कार्रवाई के होने वाले किसी भी गम्भीर परिणाम के लिए वह जिम्मेदार होगा।
पूर्व चीन सागर में स्थित इन विवादित द्वीपों पर ताईवान भी दावा करता है। ये द्वीप महत्वपूर्ण पोत-परिवहन मार्ग पर पड़ते हैं और उनके चारों ओर हाइड्रोकार्बन के विशाल भंडार हैं।
दोनों एशियाई ताकतों के बीच मौजूदा तनाव अगस्त में उस समय शुरू हुआ है, जब चीन समर्थक कार्यकर्ता इनमें से एक द्वीप पर पहुंचे थे। जापानी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और वापस चीन भेज दिया था। उसके कुछ ही दिनों बाद दर्जनभर जापानी नागरिकों ने उसी द्वीप पर जापानी ध्वज फहराया, जिसके प्रतिक्रियास्वरूप पूरे चीन में विरोध प्रदर्शन हुए।
जापान सरकार ने फिलहाल चार द्वीपों को पट्टे पर दे दिया है और पांचवें द्वीप पर उसका स्वामित्व है। वह इस द्वीप पर किसी को जाने की अनुमति नहीं देता और वहां किसी तरह का निर्माण कार्य न करने की उसकी नीति है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने कहा है कि दोनों चौकसी पोत देश की सम्प्रभुता सुनिश्चित कराने के लिए दियाओयू द्वीपों के आसपास पहुंच गए हैं। द्वीपों के इस समूह को जापान में सेंकाकू द्वीप कहा जाता है।
यह कदम तब उठाया गया है, जब कुछ घंटे पहले ही बीजिंग स्थित जापानी राजदूत को विदेश मंत्रालय में बुलाकर द्वीपों के इस समूह में से तीन द्वीपों को खरीदने के जापान के निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई गई। जापान सरकार ने कहा है कि इन द्वीपों पर जापानी तटरक्षकों का अधिकार होगा।
चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा है कि ये द्वीप चीनी भूभाग के अभिन्न हिस्सा हैं, और उन्होंने संकल्प लिया है कि उनका देश अपनी सम्प्रभुता पर एक इंच पीछे नहीं हट सकता।
समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, जापान ने विवादित पांच सेंकाकू द्वीपों में से तीन द्वीपों को कुरिहारा परिवार से 2.61 करोड़ डॉलर में खरीदने के निर्णय की सोमवार को औपचारिक घोषणा की।
चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार तड़के एक बयान में कहा, "चीन सरकार घोषणा करती है कि इन द्वीपों को खरीदने की कोशिश बिल्कुल अवैध है।"
बयान में कहा गया है, "इससे जापान के आक्रमण और चीनी क्षेत्र पर उसके कब्जे तथा दियाओयू द्वीपों तथा उससे लगे टापुओं पर चीन की सम्प्रभुता के ऐतिहासिक तथ्य कभी नहीं बदले जा सकते।" बयान में कहा गया है कि जापान की एकतरफा कार्रवाई के होने वाले किसी भी गम्भीर परिणाम के लिए वह जिम्मेदार होगा।
पूर्व चीन सागर में स्थित इन विवादित द्वीपों पर ताईवान भी दावा करता है। ये द्वीप महत्वपूर्ण पोत-परिवहन मार्ग पर पड़ते हैं और उनके चारों ओर हाइड्रोकार्बन के विशाल भंडार हैं।
दोनों एशियाई ताकतों के बीच मौजूदा तनाव अगस्त में उस समय शुरू हुआ है, जब चीन समर्थक कार्यकर्ता इनमें से एक द्वीप पर पहुंचे थे। जापानी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और वापस चीन भेज दिया था। उसके कुछ ही दिनों बाद दर्जनभर जापानी नागरिकों ने उसी द्वीप पर जापानी ध्वज फहराया, जिसके प्रतिक्रियास्वरूप पूरे चीन में विरोध प्रदर्शन हुए।
जापान सरकार ने फिलहाल चार द्वीपों को पट्टे पर दे दिया है और पांचवें द्वीप पर उसका स्वामित्व है। वह इस द्वीप पर किसी को जाने की अनुमति नहीं देता और वहां किसी तरह का निर्माण कार्य न करने की उसकी नीति है।