- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी कभी ट्रंप की समर्थक मानी जाती थी.
- कभी मेलोनी अमेरिका और यूरोप के बीच पुल के तौर पर जानी जाने लगीं थीं.
- ईरान युद्ध के दौरान दोनों नेताओं के रिश्ते खराब हो गए.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच रिश्ते सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. बीते दिन ट्रंप ने इटली के एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि जी-7 में मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मेलोनी उनके साथ फोटो खींचवाने के लिए 'मिन्नतें' की थीं. इसके बाद इटली की प्रधानमंत्री ने इस पर बयान देते हुए कहा कि अमेरिका राष्ट्रपति मनगढंत बातें कर रहे हैं. लेकिन दोनों नेताओं के बीच रिश्ते हमेशा से ऐसे नहीं थे. कभी मेलोनी और ट्रंप एक दूसरे प्रशंसक थे. जब साल 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इकलौती यूरोपीय नेता थीं जिन्हें इस समारोह का न्योता मिला था.
उस वक्त दावा किया गया कि वाशिंगटन और रोम के रिश्तों में एक 'गोल्डन एरा' यानी स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन महज डेढ़ साल के भीतर ही यह पक्की दोस्ती कांच की तरह टूटकर बिखर गई है. दोनों नेताओं के बीच निजी रिश्ते इस कदर मटियामेट हो चुके हैं कि मेलोनी और ट्रंप अब खुलेआम एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं.

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दोनों दक्षिणपंथी नेताओं के बीच दरार तब आनी शुरू हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया. इस जंग ने यूरोप की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी. इस युद्ध के खिलाफ इटली भी सामने आया. इस हफ्ते फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के वीडियो देखकर लगा था कि दोनों नेता अपने मतभेद भुला चुके हैं, लेकिन शुक्रवार को यह उम्मीद भी टूट गई. अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इतालवी टीवी चैनल पर ऑन-कैमरा कह दिया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा मिन्नतें कीं थीं.

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मेलोनी ने ट्रंप को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा, "उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए. न तो मैं और न ही इटली कभी किसी के सामने भीख मांगते हैं."
इसके बाद अब इटली के विदेश मंत्री ने भी अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है.
Io e l'Italia non imploriamo mai. pic.twitter.com/sTpKlqWB67
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) June 19, 2026
मेलोनी के लिए क्यों है चुनौती भरा वक्त?
भले ही घरेलू राजनीति में मेलोनी को इस बयान के बाद वाहवाही मिल रही हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे उनकी कूटनीतिक हार मान रहे हैं. जानकारों का कहना है कि अब समय आ गया है जब मेलोनी को वाशिंगटन के साथ अपनी नीति साफ करनी होगी. उन्हें एक ऐसे अनप्रेडिक्टेबल राष्ट्रपति को रिझाना बंद करना होगा जो पारंपरिक राजनयिक शिष्टाचार की धज्जियां उड़ाने के लिए जाने जाते हैं.
रॉयटर्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ बोलोग्ना के राजनीतिक विश्लेषक पिएरो इग्नाजी का कहना है कि मेलोनी ट्रंप की हर बदतमीजी पर अपना रुख नहीं बदल सकतीं, उन्हें अब कनाडा की तरह कड़ा और सख्त रुख अख्तियार करना ही होगा. दूसरी तरफ, इटली के विपक्षी दल मेलोनी की उस पुरानी रणनीति की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिसके तहत वो ट्रंप का समर्थन करती थीं.

माटेओ रेंजी

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ईरान युद्ध ने मेलोनी को किया मजबूर
साल 2024 में जब ट्रंप चुनाव जीते थे, तो मेलोनी को लगा था कि एक जैसी विचारधारा होने के कारण वो ट्रंप की खास बन जाएंगी और अमेरिका और पूरे यूरोप के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेंगी. शुरुआत में ट्रंप ने भी मेलोनी की खूब तारीफें की थीं. ट्रंप ने उन्हें एक शानदार नेता, खूबसूरत महिला और सफल राजनेता तक कहा था. यहां तक कि जब ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध और टैरिफ लगाए, तब भी मेलोनी ने ट्रंप के खिलाफ नरमी बरती ताकि पश्चिमी देशों की एकजुटता न टूटे.
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वो 'गुनाह' जिसने दोस्ती को दुश्मनी में बदला
दोनों के रिश्तों में कड़वाहट की असली वजह ईरान युद्ध है. अप्रैल के महीने में जब ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो ने ईरान युद्ध की आलोचना की, तो ट्रंप भड़क गए और उन्होंने पोप पर विवादित टिप्पणी कर दी. मेलोनी के लिए चुप रहना नामुमकिन था, वो पोप के बचाव में उतर आईं. मेलोनी का पोप का साथ देना ट्रंप को इतना चुभा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से मेलोनी को डरपोक और कायर कह दिया.
बात सिर्फ बयानों तक नहीं रही, मेलोनी ने व्यावहारिक कदम उठाते हुए सिसिली में मौजूद अपने एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य विमानों को करने से मना कर दिया. ये विमान ईरान युद्ध के लिए हथियार ले जा रहे थे. मेलोनी का तर्क था कि अमेरिका ने इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया.

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मेलोनी के सामने अब चुनाव की बड़ी चुनौती
गैलीटी के मुताबिक, "यह मेलोनी के चेहरे पर एक जोरदार तमाचे जैसा है. इसने उनकी उस पूरी चुनावी रणनीति को बर्बाद कर दिया है जिसके दम पर वो इटली की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहती थीं कि देश को संभालने के लिए उनसे सुरक्षित और मजबूत हाथ कोई और नहीं हैं."
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