- इजरायली सेना ने रात के समय ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को एयरस्ट्राइक में निशाना बनाया है.
- ईरान ने इस हमले पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और उनकी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है.
- अली लारिजानी ने मुस्लिम देशों को पत्र लिखा था जिसमें अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की दृढ़ता बताई थी.
इजरायली मीडिया ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को रात के समय किए गए एक एयरस्ट्राइक में निशाना बनाया. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने दावा किया है कि ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और बासिज कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी ईरान में रात भर चली एक हवाई हमले में मारे गए. ईरान ने फिलहाल इन रिपोर्टों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
इजरायली ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज के हवाले से कहा, 'मुझे अभी-अभी चीफ ऑफ स्टाफ से जानकारी मिली है कि ईरान के सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के सचिव लारीजानी और बासिज के प्रमुख घोलम रजा सुलेमानी को पिछली रात खत्म कर दिया गया है.'
आखिरी बार कहां देखे गए थे लारिजानी
अगर लारिजानी की मौत की पुष्टि हो जाती है,तो वो सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद मारे जाने वाले सबसे वरिष्ठ ईरानी अधिकारी होंगे. लारिजानी अली खामेनेई के करीबी सहयोगी थे. उन्हें आखिरी बार शुक्रवार को तेहरान में 'कुद्स दिवस' की रैलियों के दौरान सार्वजनिक रूप से देखा गया था. उसी दिन बाद में, अमेरिका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े 10 लोगों की सूची के हिस्से के रूप में, लारीजानी सहित वरिष्ठ ईरानी सैन्य और खुफिया अधिकारियों के बारे में जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की.
हमले से पहले लारिजानी का बयान
इस हमले की खबर ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही अली लारिजानी, जो ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं, ने मुस्लिम दुनिया को एक पत्र जारी किया था. अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लड़ाई में दृढ़ है, और जब ईरान पर हमला हुआ तो कई मुस्लिम देशों से समर्थन नहीं मिला.

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी
'ज्यादातर इस्लामी देशों ने सिर्फ बयान दिए'
अपने पत्र में लारीजानी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद अधिकांश मुस्लिम देशों ने सिर्फ राजनीतिक बयान दिए, लेकिन वास्तव में ईरान के साथ खड़े नहीं हुए. उनके अनुसार, इस हमले में ईरान के कई नागरिकों, सैन्य कमांडरों और इस्लामी क्रांति के एक बड़े नेता की मौत हुई. लारीजानी ने लिखा कि इसके बावजूद ईरानी जनता ने 'दृढ़ इच्छाशक्ति' के साथ इस हमले का जवाब दिया है, जबकि हमलावर इस रणनीतिक संकट से निकलने का रास्ता नहीं खोज पा रहे.
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अमेरिका‑इजरायल को ‘बड़ा और छोटा शैतान' बताया
पत्र में उन्होंने अमेरिका और इजरायल को 'बड़ा शैतान' और 'छोटा शैतान' कहा और दावा किया कि ईरान इन दोनों के खिलाफ प्रतिरोध के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. उनका आरोप है कि कुछ मुस्लिम देशों का रवैया पैगंबर मुहम्मद की उन शिक्षाओं के खिलाफ है, जिनमें कहा गया है कि किसी मुसलमान की पुकार सुनकर भी यदि कोई मदद न करे, तो वह सच्चा मुसलमान नहीं है.
लारिजानी ने आरोप लगाया था कि ईरान पर अमेरिकी‑इजरायली हमला विश्वासघाती था, जो वार्ता के दौरान किया गया और जिसका उद्देश्य ईरानी व्यवस्था को कमजोर करना था. उन्होंने कहा था कि इस हमले में इस्लामी क्रांति के महान नेता सहित कई नागरिक और सैन्य कमांडर शहीद हुए.
स्थिति अब भी अस्पष्ट
इजरायल के दावे के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अली लारिजानी की वर्तमान स्थिति क्या है. ईरान की चुप्पी और इजरायली मीडिया के दावे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रहे हैं.
सुलेमानी को भी बनाया निशाना
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ईरान में कल रात हुए इजरायली हमले में बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी भी निशाने पर थे. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमले में सुलेमानी मारे गए या घायल हुए.
तंबू में थे सुलेमानी
सुलेमानी को बासिज द्वारा हाल ही में स्थापित किए गए एक तंबू शिविर में निशाना बनाया गया. IDF के अनुसार, बासिज ने अर्धसैनिक बल के कई मुख्यालयों पर सैन्य हमले के बाद यह शिविर स्थापित किया था. आईडीएफ का कहना है कि इस हमले में बासिज के उप कमांडर और अर्धसैनिक बल के अन्य शीर्ष अधिकारी भी मारे गए.
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