- वीडियो में कराची नेवल डॉकयार्ड पर 2014 में AQIS द्वारा किए गए हमले के फुटेज और हमजा की तस्वीरें दिखाई गई हैं
- अल-कायदा अब क्षेत्रीय लीडरशिप मॉडल छोड़कर पर्सनैलिटी-ड्रिवन रणनीति अपनाने की योजना बना रहा है
- संगठन हमजा को ओसामा बिन लादेन का उत्तराधिकारी स्थापित कर नए सदस्यों को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है
अल-कायदा ने एक नया वीडियो जारी किया है. ठीक 11 सितंबर के हमलों की 25वीं बरसी पर. अल-कायदा के आधिकारिक मीडिया विंग 'अस-सहब' के इस प्रोपेगैंडा वीडियो में ओसामा बिन लादेन के बेटे और उसके घोषित उत्तराधिकारी हमजा बिन लादेन का अब तक का पहला फुटेज दिखाया गया है. इस वीडियो के जारी होने पर इंटेलिजेंस एनालिस्ट्स ने ध्यान दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि खबर थी कि 2019 के आसपास अफगान-पाकिस्तान सीमा पर अमेरिकी आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन में हमजा मारा गया था.
क्या है वीडियो में
50 मिनट लंबे इस वीडियो का शीर्षक "11 सितंबर के हमलों की एक चौथाई सदी" है. इसमें मारे गए अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की भी ऐसी तस्वीरें हैं जो पहले कभी नहीं देखी गईं. संगठन ने अब तक उसकी मौत को स्वीकार नहीं किया है और न ही उसके लिए कोई पारंपरिक शोक संदेश जारी किया है. दिलचस्प बात यह है कि वीडियो की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशनों से नहीं, बल्कि सितंबर 2014 में कराची नेवल डॉकयार्ड पर 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) के हमले के ऐतिहासिक फुटेज से होती है. फुटेज में हमजा कई बार दिखाई देता है; वह मिट्टी की एक सादी, दरारों वाली दीवार के सहारे बैठा है, उसने पारंपरिक सफेद पगड़ी पहनी है और उसके पास एक असॉल्ट राइफल रखी है.
क्या है मकसद
इंटेलिजेंस सूत्रों ने बताया कि इस क्षेत्रीय ऑपरेशन को प्राथमिकता देना यह दिखाता है कि अल-कायदा के केंद्रीय नेतृत्व और उसके प्रोपेगैंडा तंत्र, दोनों में पाकिस्तानी आतंकवादियों का कितना असर है. उन्होंने कहा कि विजुअल के तौर पर, फुटेज को बहुत सोच-समझकर इस तरह तैयार किया गया था कि उससे वैचारिक पुरानी यादें ताजा हों. एक सूत्र ने कहा, "इस तरह से सीन तैयार करने के पीछे दो मकसद साफ हैं: एक तो हमजा को उसके पिता के उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करना और दूसरा, शुरुआती दौर के ग्लोबल जिहाद की पारंपरिक विजुअल पहचान को याद दिलाना."
9/11 के हमलों के बाद अल-कायदा पर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का भारी दबाव पड़ा. यह संगठन पहले ही काफी कमजोर हो चुका था, लेकिन 2011 में पाकिस्तान में अमेरिकी सेना द्वारा इसके संस्थापक ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद इसे एक बड़ा झटका लगा. बिन लादेन की मौत के बाद, उसके उत्तराधिकारी अयमान अल-जवाहिरी ने संगठन को उसके पुराने, किसी खास व्यक्ति पर केंद्रित लीडरशिप मॉडल से दूर ले जाने की कोशिश की. उसकी लीडरशिप में, अल-कायदा ने धीरे-धीरे एक क्षेत्रीय ढांचा अपनाया, जिसमें अफ्रीका, अरब देशों और भारतीय उपमहाद्वीप में जुड़े हुए समूह काम कर रहे थे, जिनमें 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) भी शामिल है.
फिर पुराने प्लान पर काम कर रहा
इनमें से हर इलाके को अलग-अलग नेता चलाते थे, जिनका काम सिर्फ ऑपरेशन चलाना था. लेकिन अब यह रणनीति बदलने वाली है. अल-कायदा को एहसास हो गया है कि उसे अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग नेताओं के बजाय, फिर से 'पर्सनैलिटी-ड्रिवन' (किसी खास नेता पर केंद्रित) रणनीति अपनानी चाहिए. एक अधिकारी ने बताया कि अल-कायदा वापसी करने के लिए बेताब है. अधिकारी ने कहा, "उसे एहसास है कि उसने इस्लामिक स्टेट के सामने काफी जमीन खो दी है. अल-कायदा अब इस्लामिक स्टेट के तरीके को अपना रहा है, जिसमें प्रोपेगैंडा और कट्टरपंथ मुख्य बातें होंगी." अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के मामले में, अल-कायदा कम लोगों का इस्तेमाल करेगा और ड्रोन के जरिए आतंकी हमले करने पर ध्यान देगा.
क्या सच में जिंदा है हमजा
यह पक्का करने के लिए कि अल-कायदा अपने 'पर्सनैलिटी-ड्रिवन' मॉडल पर वापस आए, संगठन के मीडिया विंग 'अल-शहाब' ने ओसामा बिन लादेन के घोषित उत्तराधिकारी हमजा बिन लादेन का एक वीडियो जारी किया. इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि यह ग्रुप की एक रणनीतिक चाल है. अधिकारी ने आगे कहा, "अगर फुटेज हाल का है, तो यह माना जा सकता है कि अल-कायदा ने हमजा के मारे जाने का दावा सिर्फ़ उसे अमेरिकी हमले से बचाने के लिए किया था." एक और अधिकारी ने कहा कि आतंकी संगठन का यह कदम साफ तौर पर नए लोगों को भर्ती करने और अपनी विचारधारा को दूर-दूर तक फैलाने के मकसद से उठाया गया है. हमजा के साथ 'बिन लादेन' का नाम जुड़ा है, और यह बात नए लोगों को संगठन से जुड़ने के लिए ज्यादा आकर्षित करती है.
अल-कायदा अब, अरब या अफ़्रीकी प्रांतों में मौजूद अल-कायदा की तुलना में AQIS (अल-कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट) पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहा है. हमजा बिन लादेन का जो वीडियो जारी किया गया है, उसमें कराची में AQIS द्वारा किए गए नौसैनिक हमले का जिक्र और उस पर गर्व जताया गया है. AQIS को 2014 में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में खास ऑपरेशन चलाने के मकसद से शुरू किया गया था. AQIS का बड़ा मकसद पहले उपमहाद्वीप में खुद को जमाना था, और उसका मुख्य एजेंडा भारत के खिलाफ था. यह संगठन कश्मीर मुद्दे पर खुलकर बोलता रहा है और कई बार भारत में हमले करने की कोशिश भी कर चुका है. हालांकि, उसे एहसास हुआ कि उपमहाद्वीप में उसके ऑपरेशन सफल नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि इसका नेतृत्व करने वाला कोई प्रमुख चेहरा नहीं है.
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