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तो ईरान का इनरिच्ड यूरेनियम रूस जाएगा, पुतिन ने दे दिया है बड़ा ऑफर; अब ट्रंप क्या करेंगे?

Iran Nuclear Uranium:

तो ईरान का इनरिच्ड यूरेनियम रूस जाएगा, पुतिन ने दे दिया है बड़ा ऑफर; अब ट्रंप क्या करेंगे?

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रस्ताव दिया है कि रूस, ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को अपने यहां रखने के लिए तैयार है.

पुतिन ने साफ किया कि रूस इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है. उन्होंने कहा कि रूस के पास ईरान का यूरेनियम रखने का अनुभव है, क्योंकि 2015 के परमाणु समझौते के दौरान भी मॉस्को ने इसी तरह की मदद की थी. पुतिन ने ईरान का बचाव करते हुए यह भी कहा कि इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. उनके मुताबिक, ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण मकसद और ऊर्जा जरूरतों के लिए है.

रूस के 'पीस प्लान' में और क्या है?

पुतिन ने अपने प्रस्ताव को पारदर्शी बताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की कड़ी निगरानी में होगी. उन्होंने तर्क दिया कि यदि सभी पक्ष सहमत हों, तो ईरान अपना यूरेनियम एक ऐसे मित्र देश (रूस) को निर्यात कर सकता है, जिस पर उसे भरोसा है. इससे अमेरिका की चिंताएं भी दूर होंगी कि ईरान इस यूरेनियम का इस्तेमाल हथियार बनाने में कर सकता है.

रूसी राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनके पास तीन सूत्रीय प्लान तैयार है. पहला यूरेनियम की मात्रा की सटीक गणना करना, दूसरा इसे पूरी तरह IAEA के नियंत्रण में रखना और तीसरा IAEA की देखरेख में ही पूरे काम को व्यवस्थित करना.

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ईरान के पास कितना खतरनाक है यूरेनियम का भंडार?

ईरान के पास मौजूद यूरेनियम का भंडार दुनिया के लिए चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि इसकी शुद्धता का स्तर बहुत अधिक है. अमेरिकी आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम ऐसा है जो 60 प्रतिशत तक संवर्धित है. परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि 60 प्रतिशत की शुद्धता से हथियारों के लिए जरूरी 90 प्रतिशत शुद्धता तक पहुंचना तकनीकी रूप से बहुत छोटा कदम है. इसके अलावा, ईरान के पास 20 प्रतिशत शुद्धता वाला 1,000 किलो और 3.6 प्रतिशत शुद्धता वाला करीब 8,500 किलो यूरेनियम भंडार मौजूद है.

रूस ने प्रस्ताव दिया है कि वह इस उच्च संवर्धित सामग्री को नागरिक परमाणु रिएक्टरों के ईंधन में बदल सकता है. इससे रूस की सरकारी परमाणु कंपनी 'रोसाटॉम' को भी लाभ होगा और दुनिया को परमाणु हमले के खतरे से राहत मिलेगी. फिलहाल ईरानी विदेश मंत्री अराघची खुद मॉस्को में हैं और राष्ट्रपति पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठकें कर रहे हैं.

पुतिन के इस 'मास्टरस्ट्रोक' के पीछे का असली मकसद?

सवाल यह उठता है कि आखिर पुतिन इस विवाद में इतने सक्रिय क्यों हैं? दरअसल, तेहरान को वॉशिंगटन के मुकाबले मॉस्को पर कहीं ज्यादा भरोसा है. यदि ईरान अपना भंडार रूस को सौंपता है, तो पुतिन वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ जाएंगे.

इससे रूस का कद एक 'ग्लोबल मीडिएटर' के रूप में बढ़ेगा और पश्चिमी देशों के साथ जारी अपनी खींचतान में पुतिन को एक मजबूत रणनीतिक बढ़त भी मिलेगी.

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