- ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत के दो मालवाहक जहाजों पर गोलीबारी की थी
- भारत ने ईरानी राजदूत को तलब कर इस घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए चिंता व्यक्त की थी
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान विरोधी प्रस्ताव पर तटस्थता अपनाई लेकिन बहरीन के प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बना
ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को भारत ने दो जहाजों पर गोलीबारी की. जिसकी वजह से स्ट्रेट पार कर रहे इन मालवाहक जहाजों को वापस लौटना पड़ा. इसके बाद घटना को लेकर नई दिल्ली में तैनात ईरानी राजदूत मोहम्मद फताअली को तलब किया गया और भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. इस घटना के बाद अब सवाल भी उठने लगे हैं कि अब तक भारत को लेकर नरम रुख रखने वाले ईरान ने ऐसा क्यों किया? ईरान क्यों नाराज हुआ? और भारतीय जहाजों पर हमले के पीछे की वजह क्या है?
होर्मुज स्ट्रेट में फायरिंग पर भारत ने जारी किया बयान
विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत का पक्ष रखा है. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत की ईरानी राजदूत से हुई बात का जिक्र किया और बयान में लिखा, “नई दिल्ली में ईरान के राजदूत को शनिवार शाम विदेश मंत्रालय ने विदेश सचिव के साथ एक बैठक के लिए बुलाया. इस बैठक के दौरान, विदेश सचिव ने होर्मुज स्ट्रेट में हुई गोलीबारी की घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त से अवगत कराया. इस फायरिंग की जद में भारत के झंडे वाले दो जहाज आए थे.”

व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए, विदेश सचिव ने राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत के विचारों को ईरान के अधिकारियों तक पहुंचाए, और होर्मुज स्ट्रेट से भारत आने वाले जहाजों को रास्ता देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द फिर से शुरू करें. ईरान के राजदूत ने इन विचारों को ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया.
ओमान के उत्तर-पूर्व में गनबोट्स से किया गया हमला
शनिवार को यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) की ओर से वेबसाइट पर जारी चेतावनी के मुताबिक, ओमान के उत्तर-पूर्व में करीब 20 नॉटिकल मील दूरी पर गनबोट्स से हमला किया गया. टैंकर के मास्टर ने रिपोर्ट दी कि दो आईआरजीसी गनबोट्स बिना किसी वीएचएफ चेतावनी के करीब आईं और गोलीबारी शुरू कर दी. हालांकि, राहत की बात यह रही कि टैंकर और उसके चालक दल को कोई नुकसान नहीं हुआ.
विदेशी मीडिया ने बाद में बताया कि भारत का झंडा लगे दो जहाजों पर गोलीबारी हुई थी. इसमें ‘जग अर्णव' और ‘सन्मार हेराल्ड' शामिल थे. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जग अर्णव' पर फायरिंग की गई, जबकि दूसरा जहाज सुरक्षित रहा. ये जहाज इराक से 20 लाख बैरल तेल लेकर आ रहा था.

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्रीय मंत्रियों की बैठक
पश्चिम एशिया में चल रही तनावपूर्ण स्थिति को लेकर शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई. यह पश्चिम एशिया की स्थिति पर अनौपचारिक मंत्री समूह की चौथी बैठक थी. इसकी अध्यक्षता कर रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की संभावित समस्या से निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है.
इस उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल सहित कई अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. पश्चिम एशिया की स्थिति का भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई.
इस बड़े संघर्ष ने पहले ही ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इतिहास में दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई में सबसे बुरी रुकावट बताया है. शनिवार को आठवें हफ्ते में पहुंच चुके इस तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया में 80 से ज्यादा तेल और गैस सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया है.

भारत से क्यों नाराज हुआ ईरान?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा वीटो करने के मामले में भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया और तटस्थ रहने का फैसला किया. भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता भी जताई. भारत ने वीटो को लेकर भले ही तटस्थ रुख अपनाया हो, लेकिन उसने 11 मार्च को बहरीन द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनने का फैसला किया था, जिसमें ईरान के मध्य पूर्व के पड़ोसी देशों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी. क्या यूएन में भारत के इस रुख की वजह से ईरान नाराज हुआ?
जनरल असेंबली की मीटिंग में वीटो पर बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा, “हमने सभी देशों से बातचीत और डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने और तनाव कम करने और असल मुद्दों को सुलझाने की अपील की है. हमने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की भी अपील की है.”
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यह मीटिंग असेंबली के एक प्रोसेस के तहत बुलाई गई थी, जिसके तहत जो स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव पर वीटो करते हैं, उन्हें दस दिनों के अंदर अपने कामों के बारे में बताने के लिए उसके सामने पेश होना होता है. 7 अप्रैल को रूस और चीन ने काउंसिल के चुने हुए सदस्य बहरीन के पेश किए गए प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया. इस प्रस्ताव में ईरान से कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोकने और नेविगेशन की आजादी में रुकावट न डालने की मांग की गई थी.

उन्होंने कहा, “हम फिर से कहते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है. इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए.”

ईरान हमें होर्मुज को लेकर ब्लैकमेल नहीं कर सकता : ट्रंप
इधर एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जुबानी हमला बोला. होर्मुज को लेकर ट्रंप ने ओवल स्थित दफ्तर में शनिवार को कहा कि वे हमें स्ट्रेट के नाम पर ब्लैकमेल नहीं कर सकते. ईरान के पास न नौसेना है, न वायुसेना. उनके पास कोई नेतृत्व नहीं है, उनके पास कुछ भी नहीं है, लेकिन फिर भी हम उनसे बात कर रहे हैं. ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने बहुत लोगों को मारा है. वे कई सालों से बचते आए हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
वैसे इस बार डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ सकारात्मक संकेत भी दिए, भरोसा दिलाया कि ईरान संग डील हो सकती है. ओवल ऑफिस में मीडिया से रूबरू ट्रंप बोले, "वे थोड़े नरम पड़ गए हैं, डील पर असल में बहुत कुछ ठीक ठाक चल रहा है, और हो सकता है दिन ढलते-ढलते हमारे पास कुछ अच्छी जानकारी हो.”
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