मॉनसून की पकड़ कमजोर हो रही है और सूखे की आशंका प्रबल होती जा रही है. निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) ने भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर ऐसी ही आशंका जारी की है. स्काईमेट ने मॉनसून के चार महीनों में मॉनसून की बारिश के अनुमान का सिर्फ 85 फीसदी बारिश होने की संभावना जताई है. देश में इस साल सूखे का खतरा 70% तक बढ़ गया है. स्काईमेट ने मॉनसून की बारिश के अनुमान में कटौती करते हुए दीर्घकालिक औसत (LPA) का महज 85% बरसात होने की संभावना जताई है. इससे पहले अप्रैल में स्काईमेट ने LPA में 94% मॉनसून बारिश होने का अनुमान जताया था. मगर प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे अल नीनो (El Nino) के असर के कारण मानसून लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है.
हालांकि भारत मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अखिल श्रीवास्तव ने एनडीटीवी से कहा है कि इस साल देश में मॉनसून सीजन के दौरान बारिश सामान्य से कम कैटेगरी में रहने की संभावना है. IMD के दीर्घकालिक अवधि के मुताबिक, इस साल दक्षिण पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान देश में औसत का 90 फीसदी बारिश होने का पूर्वानुमान है. 1 जून से 17 अगस्त के बीच अब तक देश में औसत से 13 फीसदी कम बारिश हुई है.
अगस्त, सितंबर में बारिश में भारी कमी
स्काईमेट के अनुसार, मॉनसून के बचे हुए समय में देश के कई इलाकों में बारिश का असमान वितरण देखने को मिलेगा. अगस्त के अंत तक बारिश की कमी औसतन 16% दर्ज होने का अनुमान है. सितंबर में अल नीनो और मजबूत होगा इसके सुपर एक्टिव होकर Super El Nino में बदलने के कारण सितंबर में बारिश का आंकड़ा 20 फीसदी तक कम रह सकता है.
मौसम विभाग का क्या है अनुमान
देश भर में 17 अगस्त तक सामान्य की तुलना में 13% कम बारिश दर्ज की गई है. 1 जून से 17 अगस्त के बीच भारत में केवल 518.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है. इसी अवधि में सामान्यत: 596 मिमी बारिश होने की दरकार थी. पूरे मॉनसून सीजन का औसत लगभग 870 मिमी होता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी इससे पहले जून में अपने अनुमान को घटाकर 90% कर दिया था. उसने सूखे या बारिश की कमी की 60% संभावना जताई थी.

यूपी-दिल्ली में बारिश में कमी
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा समेत पूरे उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो 361.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्यतया ये 408.7 मिमी होनी चाहिए. ये 12 फीसदी कमी है. दक्षिण प्रायद्वीप की बात करें तो 375 मिमी वर्षा हुई है, जबकि सामान्तया ये 477 मिमी होनी चाहिए. पूरे देश की बात करें तो 518.7 बरसात हुई है, जबकि सामान्यतया 596.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थे, ये 13 फीसदी कमी दिखाती है.
कहां कितनी कम बारिश
मध्य भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की बात करें तो 17 अगस्त तक 667.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य औसत 674.7 मिमी है, जो 1 फीसदी कम है. जबकि पूर्व और उत्तर पूर्व भारत की बात केरं तो 684.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर यह 938.7 मिमी होनी चाहिए. यह 27 फीसदी कमी को दर्शाता है.
झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मॉनसून के विशेष बुलेटिन में कहा है कि बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती दबाव अब और मजबूत होकर विक्षोभ में बदल चुका है. इससे पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड, बंगाल और मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मूसलाधार बारिश का अलर्ट है. इन राज्यों में भारी से बेहद भारी बारिश होने की संभावना है.
Extremely Heavy rainfall observed at isolated places over Gangetic West Bengal, Odisha, Uttarakhand and Very heavy rainfall over Assam & Meghalaya, Jharkhand, Bihar, West Uttar Pradesh, East Uttar Pradesh, Chhattisgarh and heavy rainfall over Arunachal Pradesh, Nagaland, Manipur,… pic.twitter.com/W9Zss7MNC4
— India Meteorological Department (@Indiametdept) August 18, 2026
मानसून ट्रफ सक्रिय
अच्छी बारिश लाने वाला मानसून ट्रफ लाइन अभी पंजाब में फिरोजपुर, मुजफ्फरनगर, बस्ती, पटना और पश्चिम बंगाल पर बने डिप्रेशन के केंद्र से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैली है. उत्तर प्रदेश और हरियाणा के ऊपर बना चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अब सक्रिय है. गोरखपुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 1.5 किमी की ऊंचाई तक एक साइक्लोन मूवमेंट सक्रिय है. राजस्थान और मध्य प्रदेश पर अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है.
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