- ईरान ने अमेरिकी F-15E विमान को मार गिराया, जिसमें दो पायलट थे और यह पहली बार अमेरिकी सेना का विमान गंवाया गया
- एक पायलट को बचा लिया गया है जबकि दूसरा पायलट दुश्मन इलाके में लापता है और उसकी तलाश जारी है
- अमेरिकी पायलटों को SERE ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें बचना, निकलना, बचाव और छिपना शामिल होता है
ईरान के साथ जंग में शुक्रवार को अमेरिका को बहुत बड़ा झटका लगा. ईरान ने अमेरिका के F-15E को मार गिराया. इस जंग में यह पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने अपना विमान गंवा दिया. इसमें दो पायलट थे. दोनों पायलट जिंदा हैं. एक पायलट को तो अमेरिकी सेना ने बचा लिया है. दूसरा पायलट अभी भी लापता है. ईरान सरकार ने पायलट की जानकारी देने पर इनाम देने का ऐलान किया है.
अमेरिकी सेना अब भी दूसरे पायलट को ढूंढ रही है. पायलट दुश्मन इलाके में फंसा हुआ है और उसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है.
'द न्यूयॉर्क पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे हालात से निपटने के लिए अमेरिकी सेना के जवानों को ट्रेनिंग दी जाती है. अमेरिकी वायुसेना ने एक 'सर्वाइवल सिस्टम' तैयार किया है. यह सिस्टम तकनीक, रणनीति और कठोर ट्रेनिंग का एक ऐसा मेल है, जिसे पायलट के जिंदा बचने की संभावनाओं को ज्यादा से ज्यादा करने के मकसद से तैयार किया गया है.
#BharatKiBaatBatataHoon | ईरान का दावा- 'F‑15E फाइटर जेट गिराया, अमेरिकी पायलट पकड़ा'
— NDTV India (@ndtvindia) April 3, 2026
#Iran | #America | #USPilot | @SyyedSuhail
देखें LIVE: https://t.co/689WjV66bO pic.twitter.com/T2qjomVKJN
कैसे बचे रहते हैं पायलट?
जब किसी विमान पर हमला होता है तो पायलट के पास 'इजेक्ट' यानी बाहर निकलने के लिए कुछ ही सेकंड होते हैं. अमेरिकी वायुसेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ह्यूस्टन कैंटवेल ने AFP को बताया कि दो मिनट पहले तक आप विमान में होते हैं और आपके सिर से सिर्फ 15 फीट की दूरी पर एक मिसाइल फटती है.
इजेक्ट करने के बाद पायलट 'SERE' ट्रेनिंग के सिद्धांत पर निर्भर रहते हैं. S से सर्वाइवल यानी बचना. E से एस्केप यानी निकलना. R से रेस्क्यू यानी बचाव. और E से इवेजन यानी छिपना.
विमान उड़ाते समय पायलट को जो सामान मिलता है, उसमें इजेक्शन सीट के नीचे एक सर्वाइवल किट लगी होती है. एक सर्वाइवल वेस्ट होती है, जिसे पायलट पहनकर रखता है. इस किट में हेलमेट, रेडियो और हथियार जैसी चीजें भी होती हैं. पायलटों को इस तरह से ट्रेन्ड किया जाता है कि वे हालात के हिसाब से ढल सकें और सही फैसले ले सकें.
कैंटवेल बताते हैं, 'लैंडिंग के दौरान पायलटों को चोट लग सकती है. एक बार जमीन पर लैंड करने के बाद पहला कदम बहुत सीधा-सादा होता है. अपनी चोटों की जांच करें. देखें कि चल-फिर पा रहे हैं या नहीं और आसपास के माहौल को समझें.'
जमीन पर आने के बाद पायलट की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही होती है कि किसी भी कीमत पर पकड़े जाने से बचें और साथ ही रेस्क्यू टीम से संपर्क साधने की कोशिश करें. पायलटों को तुरंत छिपने, सावधानी से आगे बढ़ने और सुरक्षित जगहों को ढूंढने की ट्रेनिंग दी जाती है. आसपास का माहौल भी मायने रखता है. रेगिस्तान में पानी ढूंढना सबसे ज्यादा जरूरी होता जाता है. वहीं, शहरी इलाकों में भीड़ में घुल-मिलना या छिपना जरूरी होता है.
यह भी पढ़ेंः जिन फाइटर जेट को अमेरिका बताता था 'आसमान का सिकंदर, अब ईरान ने पलट दिया खेल; क्या है इन विमानों की खासियत?

सर्वाइवल किट में क्या होता है?
पायलटों को दी जाने वाली सर्वाइवल किट में सिग्नल देने वाले कई तरह के टूल होते हैं, जैसे फ्लेयर्स, स्मोक बॉम्ब, स्ट्रोब लाइट्स और ग्लो स्टिक्स. ये रेस्क्यू विमानों को पायलट का पता लगाने में मदद करती हैं. खासकर ऐसी स्थितियों में जब विमान घने जंगल या रात में क्रैश हुआ हो.
इजेक्शन या क्रैश लैंडिंग के दौरान चोट लगना तय है. इससे निपटने के लिए किट में फर्स्ट-एड का सामान होता है. इनकी मदद से पायलट खुद की हालत ठीक कर पाते हैं. किट में पानी के पैकेट, पानी साफ करने वाली गोलियां और हाई एनर्जी वाले इमरजेंसी फूड पैकेट होते हैं. खाने-पीने का ये सामान 3 से 7 दिन का होता है.
इस किट में वह सबकुछ होता है जो सर्वाइवल के लिए जरूरी है. इसमें वह सारा सामान होता है जो किसी भी मौसम में पायलट को सुरक्षित रख सकता है. इसमें थर्मल कंबल होते हैं जो शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं. पोंचो होते हैं जो बारिश और हवा से बचाते हैं. आग जलाने के लिए माचिस होती है.
ऐसी स्थितियों में बच निकलना ही पहली प्राथमिकता होती है. फिर भी पायलट आत्मरक्षा के लिए तैयार रगते हैं. पहले सिर्फ पिस्तौलें होती थीं. लेकिन आज कल की किट में छोटी राइफलें भी होती हैं.
यह भी पढ़ेंः Explained: ईरान में गिरा अमेरिकी पायलट: जिनेवा कन्वेंशन क्या कहता है, सजा होगी या रिहाई?

कैसे होता है रेस्क्यू ऑपरेशन?
कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) मिशन को अमेरिकी या किसी भी सेना के लिए सबसे जटिल और सबसे संवेदनशील ऑपरेशन्स में से एक माना जाता है. क्रैश या फिर हमला होने के तुरंत बाद ही ये ऑपरेशन शुरू कर दिया जाता है.
कैंटवेल ने कहा, 'इससे किसी भी पायलट को बहुत ज्यादा मानसिक शांति मिलती है. आपको उम्मीद रहती है कि वे आपको बचाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे.' रेस्क्यू मिशन में शामिल टीमों को दुश्मन के इलाके से सैनिकों को वापस लेने की खास ट्रेनिंग दी जाती है.
ऐसे ऑपरेशन में समय, जगह और पायलट और रेस्क्यू टीम के बीच आपसी तालमेल बहुत जरूरी होता है. ऐसे ऑपरेशन में समय का सबसे ज्यादा महत्व होता है. पायलट जितनी ज्यादा देर तक जमीन पर रहता है, दुश्मन की पकड़ में आने का खतरा उतना ही बढ़ जाता है और रेस्क्यू ऑपरेशन उतना ही मुश्किल हो जाता है.
यह भी पढ़ेंः 'पायलट ढूंढ दो प्लीज', अमेरिका के फाइटर जेट को गिराने को लेकर ईरान कुछ यूं ले रहा US की मौज
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं