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जिन फाइटर जेट को अमेरिका बताता था 'आसमान का सिकंदर, अब ईरान ने पलट दिया खेल; क्या है इन विमानों की खासियत?

ये विमान भले ही ईरान ने गिरा दिए हैं लेकिन जंग के मैदान में ये जेट मौत बरसाते हैं. इन्हें अमेरिका एयरफोर्स ने दशकों से अपने बेड़े में रखा है.

जिन फाइटर जेट को अमेरिका बताता था 'आसमान का सिकंदर, अब ईरान ने पलट दिया खेल; क्या है इन विमानों की खासियत?
  • US का F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान हवा और जमीन दोनों पर हमले करने में सक्षम है और इसकी रफ्तार काफी तेज है
  • ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका का F-15 फाइटर जेट और A-10 वारथॉग विमान मार गिराया है
  • A-10 वारथॉग विमान टाइटेनियम कवच से लैस है और भारी गोलाबारी के बावजूद उड़ान जारी रख सकता है
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पश्चिमी एशिया में सुलगते जंग की आग की तपिश में अमेरिका के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमान भी झुलसते नजर आ रहे हैं. तेहरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के 'F-15' फाइटर जेट को मार गिराया है, जिसके बाद हड़कंप मच गया. अमेरिकी मीडिया की खबरों के मुताबिक, इस विमान के दो क्रू मेंबर्स में से एक को तो बचा लिया गया, लेकिन दूसरा अब भी लापता है. लेकिन इतना ही नहीं ईरानी सेना ने अमेरिका के दिग्गज A-10 वारथॉग को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है.

इसके बाद लापता क्रू मेंबर की तलाश के लिए दो 'ब्लैक हॉक' हेलिकॉप्टरों को रेस्क्यू मिशन पर भेजा गया, तो ईरान ने उन पर भी जोरदार हमला किया. हालांकि, ये दोनों हेलिकॉप्टर किसी तरह ईरानी हवाई क्षेत्र से बाहर निकलने में कामयाब रहे. 

आखिर ये अमेरिका फाइटर जेट इतने खास क्यों हैं और अमेरिका ने इन विमानों को ही क्यों ईरान के खिलाफ जंग में उतारा?

आसमान का बेताज बादशाह है F-15E स्ट्राइक ईगल जेट

F-15E स्ट्राइक ईगल अमेरिका का वह 'हरफनमौला' लड़ाकू विमान है जो हवा में हमले करने के साथ-साथ जमीन पर भी तबाही मचाने में माहिर है. इसकी शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, लेकिन इसका आधुनिक अवतार यानी 'E-वेरिएंट' 1988 में सामने आया है. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी रफ्तार और ताकत है. इस विमान की खासियत है कि वर्टिकल यानी एकदम सीधा ऊपर जाते वक्त भी इसकी रफ्तार कम नहीं होती.

  • तकनीकी तौर पर देखें तो F-15E करीब 1,875 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है और 60 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है.
  • इस विमान की सबसे बड़ी खासियत इसका 'टू-सीटर' होना है. आगे पायलट बैठता है और पीछे 'हथियार प्रणाली अधिकारी' (WSO), जिसके पास चार स्क्रीन होती हैं.
  • यह पूरा सिस्टम पायलट को इस काबिल बनाता है कि वह बिना नीचे देखे, सामने देखते हुए ही दुश्मन पर निशाना साध सके.
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मौत का सौदागर है वारथॉग A-10

ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत के पास 'A-10 वारथॉग' को गिरा दिया है. हालांकि इसे जमीन पर मौजूद दुश्मनों को खत्म करने और नीची उड़ान भरने के लिए बनाया गया है. इसकी बनावट ऐसी है कि यह दुश्मन की 23mm की गोलियों और बमों के सीधे वार झेलने के बाद भी उड़ता रहता है.

A-10 वारथॉग की  मजबूती ऐसी है कि पायलट और कंट्रोल सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इसमें 'टाइटेनियम' कवच का इस्तेमाल किया गया है. अगर इसके हाइड्रोलिक सिस्टम फेल भी हो जाएं, तब भी पायलट इसे मैन्युअल तरीके से कंट्रोल कर सुरक्षित लैंड करा सकता है.

इसकी नोज पर लगी गन एक मिनट में 3,900 राउंड फायर करती है. यानी पलक झपकते ही दुश्मन के भारी-भरकम टैंक मलबे में तब्दील हो जाएगी. दिलचस्प बात यह है कि इतना खतरनाक होने के बावजूद A-10 को काफी किफायती माना जाता है. एक विमान की कीमत करीब 1.88 करोड़ डॉलर बैठती है.

X/USAir

X/USAirforce

  • यह विमान पिछले 40 सालों से अमेरिकी सेना में अपनी साख बनाए हुए है.
  • इसे चलाना और इसकी देखभाल करना दूसरे आधुनिक जेट्स के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है.
  • एक घंटे की उड़ान का खर्च करीब 17,716 डॉलर आता है, जो इसकी मारक क्षमता को देखते हुए काफी कम माना जाता है.

इन्हीं खूबियों की वजह से अमेरिकी वायुसेना ने इसे दशकों से रिटायर नहीं किया है. इसकी मरम्मत करना भी आसान है क्योंकि इसके कई पुर्जे विमान के दोनों तरफ एक जैसे होते हैं. खाड़ी युद्ध के दौरान इस विमान ने 8,000 से ज्यादा उड़ानें भरी थीं और इसका 'सक्सेस रेट' 95 फीसदी से भी ज्यादा माना जाता था.

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Photo Credit: X/ US Air Force

रेस्क्यू के लिए ईरान में घुसा 'ब्लैक हॉक'

युद्ध के मैदान में जब कोई विमान गिरता है, तो असली इम्तिहान रेस्क्यू टीम का होता है. F-15E के लापता क्रू मेंबर को ढूंढने के लिए अमेरिका ने अपने सबसे भरोसेमंद 'ब्लैक हॉक' (UH-60 Black Hawk) हेलिकॉप्टरों को मोर्चे पर लगाया.

ये हेलिकॉप्टर स्पेशल ऑपरेशन्स और दुश्मनों के इलाके से अपने सैनिकों को निकालने जाने जाते हैं. लेकिन इस बार चुनौती कहीं ज्यादा सख्त थी. जैसे ही ये हेलिकॉप्टर ईरानी सीमा के पास पहुंचे, उन पर भारी गोलीबारी की गई.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दो ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टरों को गोलियां लगीं, लेकिन किसी तरह वे क्रैश होने से बच गए और वापस लौट आए.

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