- ईरान ने कहा कि न्यूक्लियर समझौते के लिए अमेरिकी वार्ताकार परमाणु तकनीकी पहलुओं को समझने में असमर्थ रहे
- ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा क् अमेरिका के प्रस्ताव को अस्वीकार किया क्योंकि उसे तकनीकी पक्ष समझ न आए
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को आतंक और नफरत का देश बताते हुए उसकी आलोचना की और सेना की ताकत की प्रशंसा की
US Iran War: मिडिल ईस्ट को हिंसा की आग में झुलसाने वाली जंग पिछले 13 दिनों से जारी है. ऐसे में ईरान ने जंग से पहले न्यूक्लियर समझौते के लिए बातचीत में शामिल होने आए अमेरिकी वार्ताकारों को एक तरह से बेवकूफ कह दिया है. ईरान का कहना है कि यह समझौता इस वजह से नहीं हो पाया क्योंकि अमेरिका के वार्ताकार परमाणु हथियारों से जुड़े तकनीकी पहलुओं को नहीं समझ पाए.
ईरान की ओर से क्या कहा गया?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार, 13 मार्च को दावा किया कि ईरान की तरफ से कोई भी परमाणु हथियार नहीं रखने और उसे सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जो प्रस्ताव दिया गया था, उसे अमेरिका ने खारिज कर दिया क्योंकि उसकेल वार्ताकार इसके तकनीकी डिटेल्स को समझने में विफल रहे.
Factual knowledge matters.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) March 12, 2026
Case 1: Iran's proposal to ensure NO NUCLEAR WEAPONS was dismissed because U.S. counterparts didn't grasp the technical details.
Case 2: Americans won't "make money" from surging oil prices and tariffs. They enrich corporations and crush households.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, सैयद अब्बास अराघची ने कहा, "तथ्यात्मक ज्ञान मायने रखता है. केस 1: कोई परमाणु हथियार नहीं सुनिश्चित करने का ईरान का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया क्योंकि अमेरिकी समकक्षों ने तकनीकी विवरण नहीं समझा. केस 2: तेल की बढ़ती कीमतों और टैरिफ से अमेरिका पैसा नहीं कमाएगा. वह कॉर्पोरेशन को समृद्ध करता है और परिवारों को कुचलता है."
ट्रंप क्या दावा कर रहे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग के बीच ईरान की तीखी आलोचना की, इसे "आतंक और नफरत का देश" कहा और कहा कि ईरान अभी एक बड़ी कीमत चुका रहा है". महिला इतिहास माह (Women's History Month) के मौके पर व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, ट्रंप ने संक्षेप में विदेश नीति की ओर रुख किया और अमेरिकी सेना की ताकत की प्रशंसा करते हुए कहा कि ईरान के साथ स्थिति "बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है".
ट्रंप ने खचाखच भरे ईस्ट रूम में कहा, "वे वास्तव में आतंक और नफरत का देश हैं, और वे अभी बड़ी कीमत चुका रहे हैं. हमारी सेना अद्वितीय है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ." राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि ईरान के खिलाफ मौजूदा कार्रवाई लंबे समय से पेंडिंग था. यानी इसे बहुत पहले हो जाना चाहिए था. उन्होंने कहा, "हम वही कर रहे हैं जो किया जाना चाहिए, किया जाना चाहिए था." उन्होंने कहा कि ऐसे कदम "47 साल की अवधि में" कई अलग-अलग लोगों द्वारा उठाए जा सकते थे".
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