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परमाणु हथियारों पर ईरान का सबसे बड़ा दावा, सच निकला तो युद्ध पर ट्रंप का सबसे बड़ा झूठ खुल जाएगा

US Iran War: ईरान ने हर बार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है, परमाणु बम बनाने की उसकी कोई मंशा नहीं है. जबकि अमेरिका का दावा है कि जंग न होती तो कुछ हफ्तों में ही ईरान परमाणु हथियार बना लेता.

परमाणु हथियारों पर ईरान का सबसे बड़ा दावा, सच निकला तो युद्ध पर ट्रंप का सबसे बड़ा झूठ खुल जाएगा
US Iran War: क्या ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग नाजायज है
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार लेने से रोकने का तर्क देकर जंग शुरू की थी
  • ईरान ने बार-बार कहा कि परमाणु हथियार बनाने की उसकी कोई योजना नहीं है
  • ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को परमाणु हथियार विकास की योजना को सीज करने का प्रस्ताव दिया था
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क्या ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नाजायज जंग चला रखी है? आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर ऐसा क्यों पूछा जा रहा. यह समझने के लिए जंग शुरू करने के लिए ट्रंप की ओर से दिए गए तर्क और ईरान के अबतक के सबसे बड़े दावे, दोनों को समझना होगा. अमेरिका और ईरान के बीच इस जंग की पहली चिंगारी दशकों पहले ही लग गई थी जब अमेरिका ने यह कहना शुरू किया कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है. जवाब में ईरान ने हर बार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है, परमाणु बम बनाने की उसकी कोई मंशा नहीं है. पहले शांति आई क्योंकि दोनों में परमाणु समझौता हो गया. लेकिन ट्रंप ने पहले कार्यकाल में उस समझौते को खत्म किया और दूसरे में जंग शुरू कर दी.

जंग शुरू करने के लिए ट्रंप का दावा

अमेरिका की ओर से 28 फरवरी को जब ईरान के खिलाफ जंग शुरू की गई थी तो ट्रंप ने मुख्य रूप से 4 उद्देश्य बताए थे- ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना, उसे परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोकना और ईरानी समर्थित समूहों के हमलों को रोकना. सबसे ज्यादा जोर कथित तौर पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश को लेकर ही थी. इसी बात पर समझौता नहीं हुआ था और तीसरे दौर की वार्ता के बाद जंग शुरू कर दी गई. ट्रंप की टीम ने दावा किया था कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब है. 

परमाणु समझौते पर ईरान का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि जब अमेरिका के साथ ओमान की मध्यस्थता में परमाणु समझौते के लिए बातचीत हुई, तब ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की किसी भी योजना को सीज करने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन अमेरिकी सरकार ने इसे ठुकरा दिया. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसके वार्ताकार इससे जुड़े "तकनीकी विवरण समझने" में असमर्थ थे. 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, सैयद अब्बास अराघची ने कहा, "तथ्यात्मक ज्ञान मायने रखता है. केस 1: कोई परमाणु हथियार नहीं सुनिश्चित करने का ईरान का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया क्योंकि अमेरिकी समकक्षों ने तकनीकी विवरण नहीं समझा. केस 2: तेल की बढ़ती कीमतों और टैरिफ से अमेरिका पैसा नहीं कमाएगा. वह कॉर्पोरेशन को समृद्ध करता है और परिवारों को कुचलता है."

तेहरान और वाशिंगटन के बीच परमाणु समझौते के लिए तीसरे दौर की वार्ता के बाद, यह बताया गया कि अमेरिका ने ईरान में तीन प्रमुख परमाणु फैसिलिटी (ठिकाने) को नष्ट करने और एनरिच (शुद्ध) किए गए यूरेनियम को सौंपने की मांग की थी. लेकिन तेहरान ने अपने यूरेनियम एनरिचमेंट को शून्य करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरानी सरकार ने फिर से दोहराया था कि उसकी परमाणु हथियार बनाने की कोई योजना नहीं है और वो सिर्फ न्यूक्लियर प्लांट में बिजली पैदा करने के लिए यूरेनियम को एनरिच कर रहा है.

अगर ईरान का यह दावा सच साबित होता है कि उसने अपने परमाणु हथियार विकसित करने की किसी भी योजना को पूरी तरह सीज करने का प्रस्ताव अमेरिका को दिया था और फिर भी हमला किया गया तो यह सवाल उठाएगा. सवाल यह उठेगा कि ईरान के इस प्रस्ताव के बावजूद उसपर अमेरिका का हमला करना जायज था क्या.

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