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खाड़ी में बढ़ते तनाव का बुरा असर, दुबई से सुरक्षित ठिकानों की ओर पूंजी शिफ्ट करने लगे निवेशक

ईरान के हमले के बाद दुबई में रहने वाले कई एशियाई निवेशक अपनी पूंजी सिंगापुर और हांगकांग जैसे सुरक्षित केंद्रों में ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहे हैं.

खाड़ी में बढ़ते तनाव का बुरा असर, दुबई से सुरक्षित ठिकानों की ओर पूंजी शिफ्ट करने लगे निवेशक
ईरान-इजरायल के युद्ध ने बढ़ाई कारोबारियों की चिंता
  • दुबई पर ईरान के मिसाइल, ड्रोन हमले के बाद कई निवेशक अपनी पूंजी सिंगापुर और हांगकांग में ट्रांसफर करने में लगे
  • दुबई की कर-मैत्री और निवेश के अनुकूल नीतियों के बावजूद हमलों ने वहां की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाए हैं
  • निवेशकों की प्राथमिकता अब टैक्स बेनिफिट से बढ़कर राजनीतिक स्थिरता, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षित आवाजाही पर केंद्रित

पिछले हफ्ते दुबई पर ईरान की पहली मिसाइल और ड्रोन हमले के तुरंत बाद वहां रहने वाले 2 भारतीय उद्यमियों ने अपने स्थानीय बैंक खातों से 1 लाख डॉलर से अधिक की राशि सिंगापुर में ट्रांसफर करने की कोशिश की. हमले के बाद तकनीकी खामियों की वजह से उनकी यह कोशिश पहले नाकाम रही, लेकिन बाद में उनमें से एक उद्यमी दूसरे अमीरात के बैंक के जरिए राशि ट्रांसफर करने में सफल हुआ. उद्योग सलाहकारों और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल ये दो ही नहीं. कई एशियाई धनी निवेशक अपने दुबई में पार्क किए गए फंड को सिंगापुर और हांगकांग जैसे सुरक्षित वित्तीय केंद्रों में ट्रांसफर करने के रास्ते तलाश रहे हैं. ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव, अमेरिका की भागीदारी की वजह से खाड़ी क्षेत्र का “सेफ-हेवन” का दर्जा कमजोर होता दिख रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.

दुबई की सुरक्षित निवेश छवि पर सवाल

दुबई पिछले कुछ वर्षों में एशियाई उद्यमियों, खासकर चीन सहित कई देशों के संपन्न परिवारों के लिए कर-मैत्री, गोपनीयता और अनुकूल कारोबारी नीतियों के कारण एक पसंदीदा वेल्थ हब बन गया था. खाड़ी क्षेत्र में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर बूम ने भी निवेश आकर्षित किए. लेकिन अब दुबई और अबू धाबी पर हुए हमलों ने यूएई की स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए. सिंगापुर के प्राइवेट वेल्थ लॉयर रायन लिन के अनुसार, उनके दुबई-आधारित लगभग 20 ग्राहकों में से 6–7 ने इस सप्ताह संपर्क साधा है, जिनमें से तीन ग्राहक अपनी संपत्ति सिंगापुर लाने की योजना बना रहे हैं.

एक अन्य वैश्विक वेल्थ एडवाइजर ने बताया कि 10–20 फैमिली ऑफिस ने सिंगापुर में पूछताछ की है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो दुबई से अपनी संपत्तियां कैसे सुरक्षित रूप से शिफ्ट की जा सकती हैं.

निवेशकों की प्राथमिकता बदली: टैक्स नहीं, सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

संपत्ति प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशकों की प्राथमिकता सिर्फ “टैक्स बेनिफिट” नहीं है बल्कि राजनीतिक स्थिरता, लॉजिस्टिक्स, और सुरक्षित आवाजाही उनके लिए और भी अधिक अहम हो गई है. कई सलाहकारों का ये भी कहना है कि संघर्ष खत्म होने के बाद भी दुबई और एशिया के अन्य शहरों के बीच आना-जाना चुनौतीपूर्ण रहेगा, असल में यह पूरा मामला विश्वास का है. एक सिंगापुर स्थित वित्तीय सलाहकार ने कहा, जिनसे 13 यूएई-आधारित ग्राहक अब तक बात कर चुके हैं और उनमें से आधे से ज्यादा अपनी संपत्तियां सिंगापुर में स्थानांतरित करने को गंभीरता से सोच रहे हैं.

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महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा से लेकर पूंजी की सुरक्षित पार्किंग तक, चिंताएं कई

आंध्र प्रदेश में नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध की चर्चा के समानांतर, कई निवेशकों और अधिकारियों ने महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया के अत्यधिक दुरुपयोग, और डिजिटल जोखिमों को भी बढ़ती चिंता का कारण बताया है. इन सब कारकों का सम्मिलित प्रभाव भी निवेश माहौल पर पड़ रहा है.

फिलहाल UAE में ‘घबराहट की जरूरत नहीं', वेल्थ मैनेजरों का दावा

दुबई-आधारित वेल्थ मैनेजमेंट ग्रुप WRISE Private Middle East के CEO ध्रुव ज्योति सेनगुप्ता का कहना है कि उनके ग्राहकों में किसी बड़े पैमाने पर पूंजी पलायन जैसी स्थिति नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि हमारे ग्राहक वैश्विक व विविधीकृत निवेशक हैं, और UAE की दीर्घकालिक मजबूती में भरोसा रखते हैं. यूएई के सेंट्रल बैंक गवर्नर खालिद मोहम्मद बालामा ने भी आश्वस्त किया कि देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली स्थिर, सक्षम और पूरी तरह से संचालित है.

“वेट एंड वॉच” मोड पर बड़ा ग्लोबल कैपिटल

सिंगापुर के प्रमुख बैंक, डीबीएस (DBS) और बैंक ऑफ सिंगापुर का कहना है कि उनके ग्राहक हालात पर नजर रख रहे हैं और अभी ‘वेट-एंड-वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं. कुछ निवेशक हालांकि अपने विस्तार योजनाओं पर कायम हैं. ग्रैंडवे फैमिली ऑफिस के सह-संस्थापक जेरेमी लिम अबू धाबी में नया ऑफिस खोलने की प्रक्रिया में हैं और कहते हैं कि उनकी योजनाएं तब तक नहीं बदलेंगी जब तक यूएई किसी पक्ष के साथ सीधे संघर्ष में शामिल न हो जाए.

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पीयूष जयजान
Sub Editor
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