- युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर प्रति बैरल 93.41 अमेरिकी डॉलर हो गई हैं.
- फरवरी 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 69.01 डॉलर थी, जबकि मार्च में यह कीमत 35.35 प्रतिशत बढ़ी है.
- ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमतें 26 अप्रैल 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तर 89.49 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं.
मध्य पूर्व एशिया में युद्ध का साया अंतराष्ट्रीय तेल बाज़ार पर गहराता जा रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय के Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 5 मार्च, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत बढ़कर $ 93.41/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गयी है.
PPAC के मुताबिक, फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. जाहिर है, पिछले एक हफ्ते से मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 35.35% तक बढ़ चुकी है.
युद्ध के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित होने की वजह से शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल बाज़ार में ब्रेंट ऑयल futures की कीमत भी US$ 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं. शुक्रवार को ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट ऑयल futures की कीमत 89.49 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गयी. यह 26 अप्रैल, 2024 के बाद कच्चे तेल का सबसे ऊँचा स्तर है.
पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत 25% से ज़्यादा बढ़ चुकी है. इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ती जा रही है. भारत अपनी लगभग 85% कच्चे तेल की जरूरतों का आयात विश्व भर से करता है, जिसमें से मध्य पूर्व का हिस्सा सालाना लगभग 40%-45% है. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत के तेल आयात बिल पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
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