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ईरान ने जारी किया क्लस्टर बम अटैक का वीडियो, दिखाया कैसे तेलअवीव और जेरूसलेम को बनाया निशाना

US Israel War against Iran: इजरायल का तो दावा है कि ईरान पहले ही दिन से उसके उपर क्लस्टर हथियार दाग रहा है. यहां समझिए क्लस्टर बम खतरनाक क्यों होते हैं और कैसे काम करते हैं.

ईरान ने जारी किया क्लस्टर बम अटैक का वीडियो, दिखाया कैसे तेलअवीव और जेरूसलेम को बनाया निशाना
US Israel War Against Iran: ईरान ने इजरायल पर दागे क्लस्टर बम

हर बीतते दिन के साथ मिडिल ईस्ट की जंग घातक होती जा रही है. अब यह बात सामने आई है कि इजरायल पर हमला करने के लिए ईरान क्लस्टर हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. इजरायल का तो कहना है कि ईरान पहले ही दिन से उसके उपर क्लस्टर हथियार दाग रहा है. ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग/ IRIB) ने भी इस हमले का एक वीडियो जारी किया है जिसमें दिख रहा है कि कैसे इजरायल के आसमान में बहुत उपर जाकर यह कलस्ट बम फटता है और उसके अंदर से दर्जनों छोटे बम निकलते हैं. 

ये छोटे बम एक बड़े क्षेत्र में बिखर जाते हैं और तबाही मचाते हैं. ये छोटे बम रात में आसमान में आग के गोले जैसे दिख सकते हैं. इन्हें रोकना मुश्किल है और यह इजरायल के लिए आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के बावजूद ये हथियार घातक साबित हुए हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह क्लस्टर बम होते क्या है, ये कैसे काम करते हैं और इन्हें क्यों बैन किया गया है.

IRIB के अनुसार, "ईरान ने आज रात घोषणा की कि अमेरिका और इजरायली आक्रमणों द्वारा युद्ध की शुरुआत के जवाब में, उसने दक्षिणी तेलअवीव में हेइला उपग्रह संचार केंद्र और बेयर याकोव, पश्चिम जेरूसलेम और हाइफा में सैन्य केंद्रों पर हमले में क्लस्टर वारहेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया है."

क्लस्टर बम कैसे काम करता है?

इसमें जो बड़ा बम पहले दागा जाता है उसे “पैरेंट म्यूनिशन” कहा जाता है. उसे जब दागा जाता है तो वह 7-10 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर छोटे-छोटे बम (सबम्यूनिशन) छोड़ता है. ये छोटे बम बड़े इलाके में फैल जाते हैं- कुछ सौ मीटर से लेकर कई किलोमीटर तक. इससे सटीक निशाना कम हो जाता है, लेकिन असर का इलाका बड़ा हो जाता है.

दुनिया भर के आलोचकों का कहना है कि क्लस्टर हथियार बिना फर्क किए लोगों को मारते या घायल करते हैं. कई छोटे बम फटते नहीं हैं और इस्तेमाल के बाद भी लंबे समय तक खतरनाक बने रहते हैं. इजरायल में यह और भी खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि ज्यादातर मिसाइलें उसके घनी आबादी वाले इलाकों की ओर दागी गई हैं.

एपी की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के सीनियर रिसर्चर येहोशुआ कालिस्की ने कहा, “क्लस्टर बम इमारतों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं.”

120 देशों ने लगाया है बैन

120 से ज्यादा देशों ने एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो क्लस्टर म्यूनिशन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाता है. लेकिन इजरायल, अमेरिका और ईरान उन देशों में हैं जिन्होंने इस समझौते में शामिल नहीं हुए हैं. यह हथियार कई दशकों से दुनिया के अलग-अलग युद्धों में इस्तेमाल होता रहा है. इजरायल ने भी इसका इस्तेमाल 2006 में तब किया था जब उसने हिजबुल्लाह के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है.

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