- अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता ने कुछ प्रगति दिखाई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी दूर है
- ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी शर्तों से किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेगा
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी ब्लैकमेलिंग को बर्दाश्त नहीं करेंगे
US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता ने दुनिया को थोड़ी राहत तो दी है, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों देशों के बीच की खाई अब भी बहुत गहरी है. दो हफ्ते के युद्धविराम की मियाद बुधवार यानी 22 अप्रैल 2026 को खत्म हो रही है, लेकिन समझौते की राह अब भी कांटों भरी नजर आ रही है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी तरह की 'ब्लैकमेलिंग' बर्दाश्त नहीं करेंगे.
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने शनिवार को एक टेलीविजन संबोधन में स्थिति साफ करते हुए कहा कि शांति वार्ता में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी कोसों दूर है. उन्होंने स्वीकार किया कि बातचीत में अब भी कई रोड़े हैं और कुछ बुनियादी बिंदुओं पर सहमति बनना बाकी है. गालिबाफ ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान में हुई वार्ता का नेतृत्व किया था, जिसे 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे उच्च स्तरीय संपर्क माना जा रहा है.
अधिकार के लिए लड़ रहे हम: ईरान
गालिबाफ ने अपने संबोधन में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान युद्ध के मैदान में "विजयी" रहा है. उन्होंने दावा किया कि तेहरान ने वाशिंगटन के साथ अस्थायी युद्धविराम केवल इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उनकी मांगें मान ली गई थीं.
ईरानी स्पीकर ने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रहा है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूरा नियंत्रण बरकरार है. दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने साफ किया कि अगली दौर की बातचीत के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है. ईरान फिलहाल आगे बढ़ने से पहले 'अंडरस्टैंडिंग का एक फ्रेमवर्क' तैयार करने को प्राथमिकता दे रहा है.
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