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50 दिन में 50 बिलियन डॉलर साफ! युद्ध में अमेरिका-इजरायल-ईरान, 4.15 लाख करोड़ रुपये के तेल का नुकसान, पूरी दुनिया परेशान 

एनर्जी एनालिस्‍ट इयान के अनुसार, 'तेल का नुकसान ऐसा है जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था को 5 दिनों तक बिना तेल के छोड़ दिया गया हो.' इस नुकसान का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इतने से पूरी दुनिया के शिपिंग उद्योग को 4 महीने तक चलाया जा सकता था.

50 दिन में 50 बिलियन डॉलर साफ! युद्ध में अमेरिका-इजरायल-ईरान, 4.15 लाख करोड़ रुपये के तेल का नुकसान, पूरी दुनिया परेशान 
Crude Oil Crisis amid Iran-US War: अरबों डॉलर के तेल का नुकसान

Crude Oil Loss in 50 Days of War: ईरान युद्ध को करीब 50 दिन बीत चुके हैं और इस संघर्ष ने ग्‍लोबल एनर्जी मार्केट की कमर तोड़ के रख दी है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन 50 दिनों में दुनिया ने 50 बिलियन डॉलर यानी करीब 4.15 लाख करोड़ रुपये मूल्य का कच्चा तेल खो दिया है. ये वो तेल है, जिसका उत्पादन युद्ध के कारण हो ही नहीं सका. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तबाही का असर अगले कई महीनों, बल्कि सालों तक महसूस किया जा सकता है.

'केप्लर' (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक बाजार से 500 मिलियन (50 करोड़) बैरल से अधिक कच्चा तेल और कंडेनसेट बाहर हो चुका है. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह आधुनिक इतिहास में ऊर्जा आपूर्ति में आने वाली अब तक की सबसे बड़ी रुकावट है.

500 मिलियन बैरल तेल गायब! यानी... 

युद्ध नहीं होता तो 500 मिलियन बैरल तेल बाजार में होता. इसन नुकसान को लेकर एनर्जी एनालिस्‍ट यानी ऊर्जा विश्लेषक इयान मोवाट बहुत बड़ा बताते हैं. उनके अनुसार, 'ये ऐसा है जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था को 5 दिनों तक बिना तेल के छोड़ दिया गया हो.' तेल की इस मात्रा का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 

  • ये अमेरिका की एक महीने की तेल मांग के बराबर है.
  • ये पूरे यूरोप की एक महीने से ज्यादा की खपत के बराबर है.
  • इससे पूरी दुनिया के शिपिंग उद्योग को 4 महीने तक चलाया जा सकता था.
  • ये दुनिया भर में 10 हफ्तों तक हवाई सेवाएं चलाने के लिए पर्याप्त हो सकता था.
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खाड़ी देशों के उत्पादन में भारी गिरावट

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च के महीने में खाड़ी देशों के उत्पादन में प्रतिदिन 80 लाख बैरल की कमी आई. यह उत्पादन में उतनी ही गिरावट है, जितना दिग्गज तेल कंपनियां 'एक्सन मोबिल' और 'शेवरॉन' मिलकर उत्पादन करती हैं.

सबसे बुरा असर जेट फ्यूल (हवाई ईंधन) पर पड़ा है. सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत, बहरीन और ओमान से होने वाला जेट फ्यूल एक्सपोर्ट जो फरवरी में 19.6 मिलियन बैरल था, वह मार्च और अप्रैल के बीच गिरकर महज 4.1 मिलियन बैरल रह गया. यह नुकसान इतना बड़ा है कि इससे न्यूयॉर्क और लंदन के बीच करीब 20,000 राउंड-ट्रिप उड़ानें संचालित की जा सकती थीं.

100 डॉलर/बैरल की मार, रिकवरी में लगेगा लंबा वक्‍त  

विश्लेषक जोहान्स रौबल ने बताया कि चूंकि युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही है, इसलिए उत्पादन न हो पाने के कारण करीब 50 बिलियन के राजस्व का सीधा नुकसान हुआ है.

भले ही हाल के दिनों में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं, लेकिन सप्लाई की बहाली बेहद धीमी रहने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का कहना है कि कुवैत और इराक के भारी कच्चे तेल के कुओं को सामान्य उत्पादन पर लौटने में 4 से 5 महीने लग सकते हैं. रिफाइनरियों और कतर के 'रास लफान' (Ras Laffan) एलएनजी परिसर को हुए नुकसान की भरपाई और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह ठीक करने में कई साल लग सकते हैं.

हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुला हुआ है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी जल्द ही युद्ध खत्म होने के लिए 'डील' होने की उम्मीद जताई है, लेकिन फिलहाल जो स्थितियां-परिस्थितियां दिख रही हैं, इसकी कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं लग रही.  

Sources and Inputs: NDTV profit, Reuters, Kpler Data, Agencies

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