- अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण खाड़ी में सैकड़ों जहाज और करीब बीस हजार नाविक फंसे हुए हैं
- ईरान ने मित्र देशों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने का दावा किया था, लेकिन चीन के जहाजों को रोक दिया गया
- ईरानी विदेश मंत्री ने दुश्मन देशों के जहाजों को खाड़ी से गुजरने की अनुमति न देने की घोषणा की है
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से छिड़े भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. इस महायुद्ध का सबसे भयानक असर खाड़ी में देखने को मिल रहा है, जहां समंदर के बीचों-बीच सैकड़ों जहाज और करीब 20 हजार नाविक बुरी तरह फंस गए हैं. हालात इतने तनाव पूर्ण हैं कि सऊदी अरब का कच्चा तेल और कतर की गैस सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का खतरा मंडरा रहा है. इसी हाहाकार के बीच, ईरान ने दुनिया के सामने दावा किया था कि वह अपने 'मित्र देशों' को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकलने का रास्ता देगा. लेकिन ईरान के इन बड़े-बड़े दावों की हवा तब निकल गई, जब खुद उसके सबसे करीबी दोस्त चीन के दो विशाल कंटेनर जहाजों को लाख कोशिशों के बावजूद खाड़ी से बैरंग लौटना पड़ा.
ईरान का वादा हुआ फेल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को ही ट्वीट कर दावा किया था कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि शुक्रवार को जब हांगकांग के झंडे वाले चीन की COSCO कंपनी के दो जहाजों CSCL इंडियन ओशन और CSCL आर्कटिक ओशन ने खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश की, तो उन्हें बैरंग वापस मुड़ना पड़ा. दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम पर लगातार यह संदेश भेजा था कि उनके मालिक और क्रू दल चीनी हैं, फिर भी उन्हें रास्ता नहीं मिला.
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'दुश्मनों को नहीं गुजरने देंगे'
ईरानी विदेश मंत्री ने साथ ही स्पष्ट किया कि ईरान के दुश्मनों से जुड़े जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा, ‘हम युद्ध की स्थिति में हैं. यह क्षेत्र युद्ध क्षेत्र बना हुआ है और हमारे दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों को इससे गुजरने देने का कोई कारण नहीं है लेकिन यह अन्य देशों के लिए खुला है.' समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, संघर्ष समाप्त करने के लिए अन्य देशों द्वारा मध्यस्थता करने के प्रयासों से जुड़े सवाल पर अराघची ने कहा, ‘अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है. क्षेत्र के कई विदेश मंत्रियों ने तेहरान से संपर्क किया है, लेकिन ईरान का रुख सैद्धांतिक और दृढ़ बना हुआ है.' उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गारंटी 100 प्रतिशत विश्वसनीय नहीं होती हैं.
28 फरवरी से फंसी हैं सांसें, 20,000 नाविक खाड़ी में कैद
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल का ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ही दुनिया के कई जहाज खाड़ी में फंसे हुए हैं. ईरान द्वारा खाड़ी में जहाजों पर किए गए हमलों और धमकियों के कारण सैकड़ों जहाज और करीब 20 हजार नाविक वहां फंस गए हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि सऊदी अरब से कच्चे तेल और कतर से LNG गैस का ऊर्जा निर्यात प्रभावी रूप से पूरी तरह ठप हो गया है.

China Ship
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ट्रंप ने दी थी ईरान को चेतावनी
होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों के रुकने से वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ी हैं. उधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह जलमार्ग को पूरी तरह से नहीं खोलता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. पिछले कुछ सप्ताह में भारत ने मिडिल ईस्ट में संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त कराने और होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा आपूर्ति का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने पर केंद्रित कूटनीतिक प्रयास किए हैं. भारत का मानना है कि अगर इस जल मार्ग पर अवरोध जारी रहा तो भारत सहित कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं.
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