- भारत सरकार ने खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक सुनिश्चित करने हेतु हर जरूरी तैयारी पूरी कर ली है
- पश्चिम एशिया की राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारत में उर्वरक सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने के प्रयास जारी हैं
- इस बार देश में यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरक का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में 36.5 प्रतिशत बढ़ा है
मिडिल ईस्ट-पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और खाड़ी देशों के संकट के बीच उर्वरक विभाग ने देश में खाद आपूर्ति के लिए हर जरूरी तैयारी कर ली है. रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सप्लाई चेन में दिक्कत के बावजूद देश में खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है.
पिछले साल के मुकाबले स्टॉक में बढ़ोतरी
देश में उर्वरक स्टॉक के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा,'पश्चिम एशिया में पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता की वजह से खरीफ सीजन से पहले भारत में उर्वरक की आपूर्ति के लिए सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं. उर्वरक विभाग ने किसानों को आश्वस्त किया है कि समुद्री परिवहन विशेष तौर पर मालवाहक जहाजों की आवजाही प्रभावित होने के बावजूद फिलहाल भारत के पास पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है.'
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन से पहले यूरिया, डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) का स्टॉक पिछले साल की तुलना में अधिक है. साथ ही कम खपत वाले समय में 'अग्रिम भंडारण' की आक्रामक रणनीति अपनाते हुए भारत ने उर्वरकों का एक विशाल भंडार खड़ा कर लिया है.
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कितना उर्वरक स्टॉक में मौजूद?
इसी का परिणाम है कि खरीफ सीजन से पहले भारत का उर्वरक भंडार 177 लाख मीट्रिक टन पर पहुंच गया है. कुल उर्वरक भंडार में पिछले साल की तुलना में 36.5% की भारी बढोतरी दर्ज की गई है. यह भंडार 6 मार्च 2025 के 129.85 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर आज 177.31 लाख मीट्रिक टन पर पहुंच गया है. इसमें महत्वपूर्ण मृदा पोषक तत्वों, विशेष रूप से DAP (25.13 लाख मीट्रिक टन) और NPKs भंडार (55.87 लाख मीट्रिक टन) में अभूतपूर्व वृद्धि का विशेष योगदान है.
साथ ही देश में सबसे ज्यादा खपत होने वाले वाले उर्वरक यूरिया की उपलब्धता भी 59.30 लाख मीट्रित टन है. इस बफर स्टॉक की मदद से अगली खरीफ बुवाई के दौरान ये सुनिश्चित किया जायेगा कि देश में किसानों के लिए जरूरत के मुताबिक उर्वरक उपलब्ध रहेगा.
भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 तक 98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का आयात किया जा चुका था और अगले तीन महीनों के दौरान 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक का अतिरिक्त आयात पाइपलाइन में है.
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