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अमेरिका के 'चक्रव्यूह' में फंसेगा ईरान? सैन्य कार्रवाई के बाद अब आर्थिक चोट देने की है तैयारी

ईरान की चारो तरफ से घेराबंदी करने के लिए अमेरिका और इजरायल ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों और उनसे जुड़ी सेल कंपनियों को निशाना बना रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ऐसा करके ईरान को बैक डोर से होने वाली फंडिंग को रोकना चाहते हैं.

अमेरिका के 'चक्रव्यूह' में फंसेगा ईरान? सैन्य कार्रवाई के बाद अब आर्थिक चोट देने की है तैयारी
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिका ने बनाया 'चक्रव्यूह'
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  • ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर लगातार हमले कर रहा है
  • UAE ईरानी संपत्तियों को फ्रीज करने पर विचार कर रहा है, जिससे ईरान की आर्थिक ताकत कमजोर हो सकती है
  • अमेरिका और इजरायल खामेनेई परिवार की अरबों डॉलर की संपत्तियों को जब्त कराने के लिए दबाव बनाने की तैयारी मे हैं
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नई दिल्ली:

ईरान-इजरायल युद्ध हर बीतते दिन के साथ और भयावह रूप लेता दिख रहा है. ईरान जहां एक तरफ खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है वहीं दूसरी तरफ इजरायल पर भी लगातार हमला कर रहा है. हालांकि, अमेरिका और इजरायल भी ईरान पर लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं. अमेरिका ईरान को हर तरह से अलग थलग करने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है. उधर, खाड़ी के देश भी ईरान पर सख्ती करने का मन बनाते दिख रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) खाड़ी देशों में रखी गई ईरानी संपत्तियों के अरबों डॉलर को फ्रीज करने पर विचार कर रहा है. यह कदम तेहरान की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक जीवन रेखाओं में से एक को काटने के साथ ईरान की ताकत को कमजोर करने की बड़ी कोशिश साबित हो सकता है.

अगर UAE अपनी इस कार्रवाई को आगे बढ़ाता है तो इससे तेहरान को विदेशी मुद्रा और वैश्विक व्यापार के नेटवर्क को तगड़ा नुकसान पहुंच सकता है. इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय है. आपको बता दें कि ईरान पहले से ही मुद्रास्फीति (महंगाई) का दबाव झेल रहा है, साथ ही साथ बीते कुछ हफ्तों से वो एक सैन्य संघर्ष का भी सामना कर रहा है. लिहाजा ऐसे में दूसरे देशों में रखी अपनी संपत्तियों के फ्रीज होने से वो चारों तरफ से घिर सकता है. उसके लिए इजरायल और अमेरिका के खिलाफ लड़ाई को पहले की गति से चला पाने में खासी दिक्कत आ सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार UAE के अधिकारियों ने ईरान को अपनी संभावित कार्रवाई को लेकर चेतावनी भी दी है. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि UAE सरकार ने ईरान के फंड फ्रीज करने को लेकर क्या समय सीमा तय की है. 

IRGC के ठिकानों को निशाना बना रहा है अमेरिका और इजरायल

ईरान की चारो तरफ से घेराबंदी करने के लिए अमेरिका और इजरायल ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों और उनसे जुड़ी सेल कंपनियों को निशाना बना रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ऐसा करके ईरान को बैक डोर से होने वाली फंडिंग को रोकना चाहते हैं. अगर ऐसा हुआ तो इससे ईरान इस युद्ध में बगैर वित्तीय मदद के लंबे समय तक इस तेजी से पलटवार नहीं कर पाएगा. बीते कुछ समय में अमेरिका और इजरायल ने IRGC के ठिकानों और उनसे जुड़ी कंपनियों के कंपाउंड पर मिसाइल अटैक किया है. साथ ही ईरान के सैन्य बुनियादे ढांचे को भी बर्बाद किया गया है. अमेरिका-इजरायल की इस कार्रवाई से ईरान की एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. ऐसा होने से ईरान इस युद्ध में हर बीतते दिन के साथ कमजोर पड़ सकता है. 

खामेनेई परिवार की संपत्तियां भी हो सकती हैं सीज

इस युद्ध में ईरान की कमर तोड़ने के लिए अमेरिका और इजरायल हर तरीके का इस्तेमाल करने की तैयारी में है. कहा जा रहा है कि ये दोनों देश आने वाले समय में खामेनेई के परिवार की संपत्तियां को भी जब्त कराने के लिए खामेनेई के विरोधी खेमे पर दबाव बना रहे हैं. हालांकि, इस बात की आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हो पाई है.

आपको बता दें कि खामेनेई की संपत्ति के बारे में आधिकारिक तौर पर सत्यापित नेटवर्थ की डिटेल तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि वो 200 बिलियन डॉलर तक की दौलत पर आधिपत्‍य रखते थे. साल 2013 की Reuters इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट ने बताया था कि खामेनेई के कंट्रोल में रहने वाले संगठन SETAD (Execution of Imam Khomeini's Order) के पास कम से कम 95 अरब डॉलर के एसेट यानी संपत्ति थी. 

बाद में अमेरिकी अधिकारियों और कुछ मीडिया रिपोर्टों ने अनुमान लगाया कि खामनेई जिस वित्तीय साम्राज्य को नियंत्रित करते हैं, उसकी वैल्यू 200 अरब डॉलर तक हो सकती है, हालांकि ये भी प्रत्यक्ष व्यक्तिगत नेटवर्थ नहीं बल्कि उनके नियंत्रण वाले नेटवर्क की अनुमानित वैल्यू है. BBN टाइम्स और कुछ अन्‍य नेटवर्थ संबंधित वेबसाइट्स उनकी पर्सनल नेटवर्थ को कम, जबकि सेताद (इमाम के ऑर्डर को लागू करने का हेडक्वार्टर) के जरिए उनकी संपत्ति 200 बिलियन डॉलर तक बताते हैं. सेताद जैसे संगठन के जरिये खामेनेई  95 से 200 बिलियन डॉलर के बीच के एक बड़े फाइनेंशियल एम्पायर को मैनेज करते थे. ये जब्त की गई प्रॉपर्टी, इन्वेस्टमेंट और स्टेट से जुड़ी एसेट्स पर निर्धारित है. 

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