अमेरिका के साथ स्विटजरलैंड वार्ता के बाद ईरान ने अलग से किसी परमाणु निरीक्षकों (न्यूक्लियर इंस्पेक्टर्स) को देश में आने की अनुमति देने से इन्कार किया था. अब इस पर ट्रंप ने फिर से दावा किया है कि ईरान इसके लिए राजी है, मगर वो फेक न्यूज फैला रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान ये सब बस अमेरिका की जीत को छोटा दिखाने के लिए कर रहा है.
ट्रंप बोले-अगर वो राजी नहीं होता तो बात ही नहीं होती
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, 'इसके बावजूद कि उन्होंने इसका विरोध किया और इसके उलट झूठे बयान दिए, और साथ ही 'फेक न्यूज' का शोर भी मचाया जो अमेरिकी जीत को जितना हो सके छोटा और मामूली दिखाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है. मगर ईरान भविष्य में लंबे समय (हमेशा के लिए!!!) तक सबसे ऊंचे स्तर के परमाणु निरीक्षणों के लिए पूरी तरह से सहमत हो गया है. इससे "परमाणु ईमानदारी" सुनिश्चित होगी. अगर वे इसके लिए सहमत नहीं होते, तो आगे कोई बातचीत नहीं होती!'
'ईरान को मदद पर अमेरिकी किसानों को फायदा'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे लिखा, 'इस बात और ईरान द्वारा दी गई दूसरी बड़ी रियायतों के आधार पर, मैंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को खुला रखने की अनुमति दे दी है, और अब कोई नौसैनिक नाकेबंदी नहीं होगी. हालांकि, सभी जहाज वहीं मौजूद रहेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी फिर से शुरू की जा सके. हालांकि, अभी ऐसा होने की संभावना बहुत कम है. अमेरिकी ट्रेजरी जो पैसा या प्रतिबंधों में ढील दे रही है, वह एस्क्रो (escrow) में जाएगा, जिसे अमेरिका कंट्रोल करेगा. इसका इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका से ही खाना और मेडिकल सप्लाई खरीदने के लिए किया जाएगा, जिसमें हमारे महान अमेरिकी किसानों से मक्का, गेहूं और सोयाबीन खरीदना भी शामिल है. ईरान को इन चीजों की बहुत ज्यादा जरूरत है. यह एक मानवीय संकट है, और मुझे लगता है कि बहुत देर होने से पहले, अभी मदद करना जरूरी है. बातचीत अच्छी चल रही है! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद.'
होर्मुज टोल पर ओमान और ईरान का बयान
ओमान और ईरान ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि वे होर्मुज के भविष्य के प्रशासन और दी जाने वाली सेवाओं के लिए ली जाने वाली फीस पर विचार करेंगे. साथ ही, उन्होंने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता पर जोर दिया.
दोनों देशों ने "होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने क्षेत्रीय जल पर अपनी संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों" पर जोर दिया. साथ ही, वे इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमत हुए, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन (आवागमन) के भविष्य के प्रशासन, इस संबंध में दी जाने वाली सेवाओं और उनसे जुड़ी लागतों पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सहमति बन सके.
यह बयान मस्कट में उनके शीर्ष राजनयिकों के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद आया, जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से भी मुलाकात की.
ये भी पढ़ें-
ईरान के पास 'जेलीफिश' जैसी रहस्यमयी ड्रोन फौज? जंग में रेस्क्यू अमेरिकी पायलट के दावे से हड़कंप
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं