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एक्शन मोड में इंटरपोल, 9 देशों में चलाया ऑपरेशन, 65 बच्चों की बचाई जान, 60 आरोपियों को भी गिरफ्तार

पनामा में इस ऑपरेशन के दौरान एक ऐसा मामला सुलझाया गया जो करीब 10 साल से अनसुलझा था. इंटरपोल के डेटाबेस में एक बच्चे की पहचान नहीं हो पा रही थी, लेकिन क्षेत्रीय विशेषज्ञों की मदद से आखिरकार उस पीड़ित की पहचान कर ली गई.

एक्शन मोड में इंटरपोल, 9 देशों में चलाया ऑपरेशन, 65 बच्चों की बचाई जान, 60 आरोपियों को भी गिरफ्तार
इंटरपोल ने कई देशों में बड़ा ऑपरेशन किया है
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दुनिया की अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी यानी INTERPOL ने बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साल तक चले ऑपरेशन में 60 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 65 पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें बचाया गया है. इस ऑपरेशन को ऑपरेशन एक्लिप्स नाम दिया गया था, जो फरवरी 2025 से जनवरी 2026 तक चला. इस अभियान में मध्य अमेरिका, उत्तरी अमेरिका और कैरेबियाई इलाके के कुल 9 देशों की पुलिस एजेंसियों ने मिलकर काम किया. जांच में सामने आया कि जिन बच्चों को बचाया गया, उनमें ज्यादातर की उम्र 5 से 13 साल के बीच थी. करीब 80 प्रतिशत पीड़ित लड़कियां थीं. हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस तरह के अपराधों का शिकार लड़के भी बनते हैं, इसलिए सुरक्षा और रोकथाम की रणनीतियों में दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है. जिन बच्चों को ऑपरेशन के दौरान बचाया गया, उन्हें संबंधित देशों की एजेंसियों ने सुरक्षा और काउंसलिंग जैसी मदद उपलब्ध कराई.

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जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का पीड़ित बच्चों से अलग-अलग तरह का रिश्ता था. कुछ आरोपी परिवार के सदस्य, दोस्त, पड़ोसी या शिक्षक थे, जबकि कई ऑनलाइन शिकारी और विदेश से आने वाले अपराधी भी इस नेटवर्क में शामिल थे. इससे साफ होता है कि इस तरह के अपराध करने वालों की कोई एक तय पहचान या प्रोफाइल नहीं होती. इस अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में बेलीज, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, एल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, मेक्सिको, निकारागुआ और पनामा की पुलिस एजेंसियों ने हिस्सा लिया. इस अभियान में United Nations Office on Drugs and Crime और Child Rescue Coalition ने भी सहयोग दिया. ऑपरेशन के दौरान इंटरपोल ने तकनीकी सहायता, खुफिया जानकारी साझा करने और जांच को समन्वित करने में अहम भूमिका निभाई.

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पनामा में इस ऑपरेशन के दौरान एक ऐसा मामला सुलझाया गया जो करीब 10 साल से अनसुलझा था. इंटरपोल के डेटाबेस में एक बच्चे की पहचान नहीं हो पा रही थी, लेकिन क्षेत्रीय विशेषज्ञों की मदद से आखिरकार उस पीड़ित की पहचान कर ली गई. इससे न सिर्फ बच्चे को सुरक्षा और सहायता मिल सकी बल्कि एक और पीड़ित की पहचान भी सामने आई.डोमिनिकन रिपब्लिक में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर 10 और 13 साल के दो बच्चों के साथ यौन शोषण करने और उससे जुड़े वीडियो बनाने का आरोप है. हैरानी की बात यह रही कि गिरफ्तार आरोपियों में बच्चों की मां भी शामिल थी, जिस पर शोषण में मदद करने और खुद भी अपराध में शामिल होने का आरोप है. जांच के दौरान पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए, जिनमें और भी पीड़ितों से जुड़े सबूत मिले.

कोस्टा रिका में एक मामले में आरोपी ने पहले इंटरनेट पर खुद को किसी सेलिब्रिटी के रूप में पेश किया. इसके बाद उसने एक नाबालिग को झांसे में लेकर उसके साथ ऑनलाइन बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे उसे ब्लैकमेल और धमकियों के जरिए अपने कब्जे में रखा. आरोपी ने बच्चे के परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर लंबे समय तक शोषण किया.इंटरपोल के पुलिस सर्विसेज के कार्यवाहक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Cyril Gout ने कहा कि पुराने मामलों की जांच सिर्फ न्याय दिलाने के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले अपराधों को रोकने के लिए भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विशेषज्ञों की मदद से कई साल पुराने अपराध भी उजागर किए जा सकते हैं और अपराधियों को कानून के कटघरे में लाया जा सकता है.

ऑपरेशन के दौरान देशों को 57 ऐसे इंटरपोल नोटिस की भी दोबारा जांच करने को कहा गया, जो बाल यौन अपराधों से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ जारी किए गए थे. इनमें रेड नोटिस और ब्लू नोटिस शामिल थे. अब तक 12 आरोपियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अभी जारी है.

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