भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक बार फिर पाकिस्तान को लताड़ लगा दी. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत ने पाकिस्तान की टिप्पणियों का कड़ा विरोध किया. साथ ही, भारत ने UNSC के पुराने हो चुके आदेशों और मध्यस्थता के तरीकों की समीक्षा करने की बात भी कही, क्योंकि वे आज के समय के हिसाब से सही नहीं है.
UNSC की 'एरिया फॉर्मूला' बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथानेनी हरीश ने बात रखी. इस बैठक की अध्यक्षता चीन और पाकिस्तान कर रहे थे. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VI और VII के तहत अपनाए गए प्रस्तावों के बीच अंतर बताया और कहा कि सुरक्षा परिषद के सभी आदेशों को हमेशा के लिए प्रासंगिक नहीं माना जाना चाहिए.
चैप्टप VI और VII के बीच का अंतर बताया
भारत ने इस मंच का इस्तेमाल करते हुए जोर दिया कि प्रस्तावों का स्वरूप और उद्देश्य इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें चार्टर के किस चैप्टर के तहत अपनाया गया है.
राजदूत हरीश ने बताया कि चैप्टर VII के प्रस्ताव शांति के लिए खतरों, शांति भंग होने और आक्रामकता की घटनाओं से संबंधित होते हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने का अधिकार दिया जाता है उन्होंने कहा कि ऐसे उपायों को लागू न करने से सुरक्षा की स्थिति तुरंत बिगड़ सकती है और बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को नुकसान पहुंच सकता है.
उन्होंने तर्क दिया कि इसके उलट चैप्टर VI के प्रस्ताव बातचीत, मध्यस्थता, सुलह और मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) जैसे तरीकों से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिए बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय खास राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर तय किए जाते हैं, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि वे हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे.
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इशारों-इशारों में पाकिस्तान को सुनाया
सुरक्षा परिषद के एजेंडे में लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों की ओर ध्यान दिलाते हुए, भारतीय राजदूत ने फिलिस्तीन के मुद्दे का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि वहां जमीनी हकीकत बदलने के साथ-साथ मध्यस्थता के तरीकों में भी लगातार बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि पुराने हो चुके मध्यस्थता इंतजामों की समीक्षा करने की "जरूरत" है और चेतावनी दी कि पहले किए गए हस्तक्षेपों को हमेशा लागू होने वाला नहीं माना जाना चाहिए.
#WATCH | Permanent Representative of India to the UN in New York, Ambassador Parvathaneni Harish says, "...India would like to emphasize that at a time when member states are undertaking mandate implementation review under the UN-80 framework, for all UN General Assembly mandates… pic.twitter.com/lM6gktBhxx
— ANI (@ANI) June 24, 2026
इन टिप्पणियों को काफी अहम माना गया, खासकर पाकिस्तान की उन कोशिशों के संदर्भ में जिनमें वह जम्मू-कश्मीर पर दशकों पुराने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का हवाला देता रहा है. भारत का हमेशा से यह कहना रहा है कि पुराने हो चुके तरीकों का जिक्र करने से बाद में हुए राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रमों को नजरअंदाज किया जाता है, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते भी शामिल हैं.
राजदूत हरीश ने इस बहस को संयुक्त राष्ट्र में सुधार की चल रही कोशिशों से भी जोड़ा. UN80 पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के आदेशों को भी इसी तरह की जांच-पड़ताल से छूट नहीं मिलनी चाहिए. भारत का मानना है कि समय-समय पर समीक्षा करने से यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि UN के दखल प्रासंगिक, व्यावहारिक और आज की भू-राजनीतिक हकीकत के अनुरूप बने रहें.
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'कश्मीर हमारा था, है और रहेगा'
सबसे तीखी बहस भारत के बयान के आखिर में हुई, जब राजदूत हरीश ने बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि की टिप्पणियों का सीधा जवाब दिया. पाकिस्तान पर इस मंच का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए, उन्होंने कहा कि यह "अविश्वसनीय" है कि एक सह-अध्यक्ष जिससे संतुलित और निष्पक्ष रहने की उम्मीद की जाती है, उसने चर्चा से असंबंधित मुद्दे उठाने का फैसला किया.
#WATCH | Permanent Representative of India to the UN in New York, Ambassador Parvathaneni Harish says, "I also refer to the unwarranted remarks made by the representative of Pakistan. It is incredible that a co-chair expected to be balanced and unbiased in conduct has chosen to… pic.twitter.com/yOaNiGIaQZ
— ANI (@ANI) June 24, 2026
नई दिल्ली के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए, भारतीय राजदूत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश "पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला" है और जोर देकर कहा कि यह "हमेशा से ऐसा ही रहा है, है और आगे भी ऐसा ही रहेगा."
इस बहस ने बहुपक्षीय मंचों पर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी राजनयिक तनाव को उजागर किया, जबकि चर्चा औपचारिक रूप से सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने के व्यापक मुद्दे पर केंद्रित थी. भारत का बयान अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और पुराने ढांचों का फिर से आकलन करने पर उसके बढ़ते जोर को दिखाता है, क्योंकि उसका मानना है कि वे अब आज की हकीकत के अनुरूप नहीं हैं.
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