
संयुक्त राष्ट्र:
संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दे पर बहस के एक हफ्ते बाद भारत और पाकिस्तान इस मुद्दे पर फिर से शब्दयुद्ध में उलझ गए। संयुक्त राष्ट्र में इस्लामाबाद द्वारा ‘अप्रासंगिक जिक्र’ के बाद दोनों पक्ष भिड़ गए।
स्पेशल पॉलीटिकल एवं डिकॉलोनाइजेशन कमिटी की यहां हुई आम बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी उपप्रतिनिधि रजा बशीर तरार ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान के बगैर संयुक्त राष्ट्र का गैर उपनिवेशवाद का एजेंडा अधूरा रहेगा।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान को प्रतिबद्ध है जो ‘सभी पक्षों को स्वीकार्य हो खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को।’
भारत की ओर से इसका जवाब देते हुए भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव प्रकाश गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ तरीके से फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है।
गुप्ता ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस अवांछनीय टिप्पणी को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। यह टिप्पणी इस समिति के संदर्भ से इतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी स्वतंत्र इच्छा का इजहार करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी करते हैं और वे ऐसा लगातार कर रहे हैं।’
इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’
स्पेशल पॉलीटिकल एवं डिकॉलोनाइजेशन कमिटी की यहां हुई आम बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी उपप्रतिनिधि रजा बशीर तरार ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान के बगैर संयुक्त राष्ट्र का गैर उपनिवेशवाद का एजेंडा अधूरा रहेगा।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान को प्रतिबद्ध है जो ‘सभी पक्षों को स्वीकार्य हो खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को।’
भारत की ओर से इसका जवाब देते हुए भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव प्रकाश गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ तरीके से फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है।
गुप्ता ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस अवांछनीय टिप्पणी को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। यह टिप्पणी इस समिति के संदर्भ से इतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी स्वतंत्र इच्छा का इजहार करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी करते हैं और वे ऐसा लगातार कर रहे हैं।’
इसके जवाब में तरार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि ने ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर की टिप्पणी’ की है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद गैर उपनिवेशवाद पर चर्चा के लिए अप्रासांगिक है। उन्होंने दावा किया, ‘..जम्मू-कश्मीर न तो भारत का अभिन्न अंग है और न ही कभी रहा है।’