थिम्पू/नई दिल्ली:
भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक से पहले भारत ने शनिवार को जहां आतंकवाद पर सख्त तेवर अपनाए वहीं उम्मीद जताई कि विश्वास बहाली के उपायों की घोषणा से कश्मीर के दोनों तरफ कारोबार और यात्रा की बाधाएं कम होंगी। ज्ञात हो कि पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से बातचीत के लिए मंगलवार को नई दिल्ली पहुंच रही है। खार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिलने की इच्छा जताई है। सरकार के सूत्रों ने नई दिल्ली में बताया कि भारत, 'सभी मुद्दों पर खुले दिमाग' के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है और वह मुम्बई पर 26 नवम्बर 2008 को हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों के खिलाफ सुनवाई तेजी से पूरी करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बुधवार को होने वाली बैठक के बारे में पूछे जाने पर सूत्र ने बताया, "दोनों मंत्री संवाद प्रक्रिया में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। उनका लक्ष्य आगे बढ़ने की दिशा की रूपरेखा तैयार रखना है।" सूत्रों ने बताया कि सार्थक बातचीत के लिए 'आतंकवाद से मुक्त एक माहौल' की जरूरत है। साथ ही बातचीत के मुद्दों में कृषि, स्वास्थ्य और दूरसंचार के क्षेत्र में सहयोग को शामिल कर संवाद का दायरा बढ़ाने के प्रयास होंगे। अधिकारियों ने बताया कि बातचीत में 26/11 के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पाकिस्तान पर जोर दिया जाएगा। साथ ही नागरिक केंद्रित पहलुओं को भी समान महत्व दिया जाएगा। सूत्र ने बताया, "लोगों के बीच सम्बंधों को बढ़ाने वाले विश्वास बहाली के कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। हम बैठक के दौरान इनकी घोषणा करेंगे।" उम्मीद है कि दोनों पक्ष श्रीनगर एवं मुजफ्फराबाद और पूंछ एवं रावलकोट के बीच बस के फेरों की संख्या बढ़ाने की घोषणा करेंगे। इसके अलावा दोनों देश नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ कारोबार के दिनों और स्थानों की संख्या बढ़ाने पर भी घोषणा कर सकते हैं। वहीं, थिम्पू में भारत ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि सरकार से इतर तत्वों सहित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करना और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करना किसी भी राष्ट्र की वैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि सरकारी और सरकार से इतर तत्वों के बीच सही फर्क नहीं किया गया है। अपनी धरती का इस्तेमाल सरकार से इतर तत्वों द्वारा किए जाने पर उक्त राष्ट्र को उनके खिलाफ हर हाल में कार्रवाई करनी चाहिए। चिदम्बरम दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के गृह मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, "ऐसे देश की नैतिक एवं वैधानिक जिम्मेदारी बनती है कि वह इस तरह के सरकार से इतर तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करे और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करे।" दक्षेस देशों के गृह मंत्रियों की चौथी बैठक में समुद्री सुरक्षा, नशीले पदार्थ की तस्करी पर चर्चा होने की सम्भावना है। चिदम्बरम ने अपने भाषण में किसी देश का नाम नहीं लिया। लेकिन पाकिस्तान पर इस बात का आरोप है कि उसकी धरती से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादियों ने मुम्बई में 2008 में नरसंहार को अंजाम दिया। चिदम्बरम और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री रहमान मलिक के बीच दक्षेस सम्मेलन के दौरान मुलाकात की सम्भावना है। दोनों के बीच हालांकि कोई औपचारिक मुलाकात तय नहीं है। दक्षेस का सुरक्षा सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब कुछ दिनों पूर्व ही 13 जुलाई को मुम्बई में श्रृंखलाबद्ध विस्फोट हुए थे।
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