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This Article is From Sep 26, 2015

भारत ने श्रीलंकाई नागरिकों की न्याय की आकांक्षा का समर्थन किया

भारत ने श्रीलंकाई नागरिकों की न्याय की आकांक्षा का समर्थन किया
संयुक्त राष्ट्र: भारत ने श्रीलंका की संप्रभुता का सम्मान करते हुए कहा है कि वह लिट्टे के खिलाफ गृह युद्ध के दौरान कथित युद्ध अपराधों के पीड़ितों की न्याय की आकांक्षा का समर्थन करता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा शिखर सम्मेलन से इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की बैठक के बाद कहा , जहां तक भारत की बात है, तो हम निश्चित ही न्याय की मांग का स्वागत करते है।

साथ ही हम श्रीलंका की संप्रभुता का भी सम्मान करते हैं। हमें उम्मीद है कि एक ऐसा रास्ता मिलेगा जहां ये दोनों बिंदु और उद्देश्य मिलेंगे। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि श्रीलंका की सरकार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बात कर रही है और इस द्वीप राष्ट्र की नई सरकार के दृष्टिकोण में ‘‘काफी बदलाव’है। ‘हाइब्रिड कोर्ट’ पर भारत के रुख के बारे में पूछे जाने पर स्वरूप ने कहा कि नयी दिल्ली मसौदा प्रस्ताव के अंतिम परिणाम को देखेगी। देश को उम्मीद है कि यह श्रीलंकाई सरकार को स्वीकार्य होगा और आम सहमति से तैयार किया जाएगा।

‘हाइब्रिड कोर्ट’ में सिंहली, तमिल और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ होंगे।

उन्होंने कहा, इस समय हमारी उम्मीद यह है कि यह प्रस्ताव आम सहमति से बनेगा जिसे हर कोई सर्वसम्मति से पारित करने में सक्षम होगा और यह श्रीलंका की सरकार को स्वीकार्य होगा।

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