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This Article is From Aug 27, 2025

भारत पर 50 फीसदी टैरिफ की दुनियाभर में चर्चा, वर्ल्ड मीडिया ने क्या-क्या लिखा?

ब्रिटिश अखबार गार्डियन ने लिखा है कि टैरिफ वाला यह कदम भारत-अमेरिका के रिश्तों में अब तक की 'सबसे बड़ी क्षति' है.

भारत पर 50 फीसदी टैरिफ की दुनियाभर में चर्चा, वर्ल्ड मीडिया ने क्या-क्या लिखा?
  • अमेरिका ने बुधवार से भारतीय वस्तुओं पर पचास प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे निर्यात प्रभावित होगा.
  • भारत का अमेरिका में वस्तु निर्यात कुल निर्यात का लगभग बीस प्रतिशत है, जो व्यापारिक संबंधों को दर्शाता है.
  • अमेरिकी टैरिफ से झींगा, टेक्सटाइल, हीरे, चमड़ा, जूते और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं.
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नई दिल्‍ली:

भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका का 50 प्रतिशत टैरिफ बुधवार से लागू हो गया है. माना जा रहा है कि इसका असर झींगा, टेक्‍सटाइल, हीरे, चमड़ा और जूते, के साथ रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात और रोज़गार सृजन पर पड़ेगा. निर्यातकों ने कहा कि 25 प्रतिशत टैरिफ के अलावा भारत पर 25 प्रतिशत का जुर्माना लगाने से उसके सबसे बड़े निर्यात बाजार में भारतीय वस्तुओं का प्रवाह बाधित होगा. साल 2024-25 में भारत के 437.42 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के वस्तु निर्यात में अमेरिका का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा था. 2021-22 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. अब जबकि भारत, अमेरिका का सबसे बड़ा व्‍यापारिक साझेदार है तो उसके टैरिफ की चर्चा भी दुनियाभर में हो रही है. आइए आपको बताते हैं कि दुनिया के कुछ बड़े मीडिया हाउसेज ने क्‍या लिखा है. 

संबंध पड़े खतरे में-CNN  

अमेरिका के लीडिंग मीडिया हाउस सीएनएन ने 27 अगस्‍त से लागू हुई 50 फीसदी की टैरिफ दरों के बारे में कहा है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाकर अपनी धमकी को पूरा कर दिया है. लेकिन साथ ही इस कदम से अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में से एक के साथ संबंध भी खतरे में पड़ सकते हैं. साथ ही उपभोक्ता कीमतों को बढ़ा सकता है.

सीएनएन के अनुसार इस विवाद के साथ ही अमेरिका कर रिश्‍ता एक भरोसेमंद साथी भी खराब हो गया है. वहीं अमेरिका में भारतीय सामान तो महंगा हो ही गया है.सीएनएन की मानें तो टैरिफ का यह कदम नुकसानदायक हो सकता है. सीएनएन ने कहा है कि अमेरिकी कंपनियां और हाल ही में उपभोक्ता, ट्रंप के टैरिफ कैंपेन की वजह से पहले ही बढ़ी हुई लागतों का सामना कर रहे हैं, जबकि लेबर मार्केट का हाल और भी खराब हो गया है. ऐसे में भारतीय वस्तुओं पर यह टैरिफ दोनों ही प्रभावों को और बिगाड़ सकते हैं. 

सबसे बड़ा नुकसान-Guradian

ब्रिटिश अखबार गार्डियन ने लिखा है कि टैरिफ वाला यह कदम भारत-अमेरिका के रिश्तों में अब तक की 'सबसे बड़ी क्षति' है. एक भारतीय व्यापार अधिकारी के हवाले से लिखा गया है कि ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया है और दोनों देशों के रिश्ते को फिर से पटरी पर लाने में लंबा वक्त लगेगा. अखबार के अनुसार भले ही ट्रंप कुछ भी कह रहे हों लेकिन भारत में माहौल एकदम अलग है. भारत का विरोधी रुख नजर आ रहा है.

देश की सरकार ने रूस से तेल खरीदना बंद करने से इनकार कर दिया है. साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी भी भारतीयों से स्थानीय वस्‍तुओं को खरीदने की अपील कर रहे हैं. अखबार के अनुसार भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार, अमेरिका, रत्न एवं आभूषण और वस्त्र जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लगभग एक-तिहाई निर्यात निर्यात करता है, जो संभावित आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है. 

वहीं भले ही टैरिफ विवाद कम हो जाए, लेकिन वाशिंगटन के साथ भविष्य के संबंधों में विश्वास शायद सबसे बड़ी क्षति होगी. एक वरिष्ठ भारतीय व्यापार अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'ट्रंप ने इसे बर्बाद कर दिया है. दोनों देशों के बीच की कड़ी मेहनत, जो स्वाभाविक तौर पर एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते थे, फिर भी एक ठोस रणनीतिक संबंध बनाने में कामयाब रहे, अब खतरे में है.' उन्होंने आगे कहा, 'इसे फिर से शुरू होने में लंबा समय लगेगा, और यह शायद तब तक नहीं होगा जब तक ट्रंप सत्ता से बाहर नहीं हो जाते.' 

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा 

रॉयटर्स ने लिखा है टैरिफ लागू होते ही दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों और रणनीतिक साझेदारों में तनाव बढ़ गया है. इससे भारत के छोटे निर्यातकों और नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है. वहीं चीन के ग्लोबल टाइम्स की मानें तो भारत पर 50 फीसदी टैरिफ अमेरिका के 'सबसे ऊंचे टैरिफ' में से एक है. रूस से तेल खरीद से नाराज होकर ट्रंप ने यह कदम उठाया है. अखबार ने यह भी दावा किया कि ट्रंप ने चार बार फोन कर मोदी से बात करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने कॉल रिसीव करने से इनकार कर दिया. 

कतर के सरकारी चैनल अल जजीरा की मानें तो भारी टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. इससे नौकरियों पर भी खतरा है और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.

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