यमन के हूती विद्रोहियों ने ईरान युद्ध में एक नया मोर्चा खोल दिया है. सऊदी अरब ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों ने उस पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की कोशिश है. ईरान पर आरोप लगता रहा है कि वह हूती विद्रोहियों की मदद करता है.
हूती विद्रोहियों का यमन के आधे से ज्यादा हिस्से पर कब्जा है. गृहयुद्ध के बाद 2014 में यमन के आधे से ज्यादा हिस्से पर हूती विद्रोहियों का कब्जा हो गया था. आज भी यमन में हूतियों का विद्रोह जारी है.
ऐसा दावा किया जाता है कि हूती विद्रोहियों को ईरान हथियार से लेकर पैसा तक मुहैया कराता है, जो उसे सऊदी समर्थित यमनी सरकार से लड़ने में काम आता है. लेकिन हथियार और पैसों के अलावा और कुछ है जो हूती विद्रोहियों को ताकत देती है और वह है नशा.
क्या नशा करते हैं हूती?
हूती विद्रोहियों की तस्वीर देखेंगे तो उनमें से कइयों के गाल एक तरफ से गुब्बारे की तरह फूले हुए नजर आएंगे. चाहे लड़ाई हो या किसी तरह का कोई जुलूस, इन विद्रोहियों के गाल अक्सर ऐसे ही दिखाई देंगे.
इसके पीछे की सच्चाई यह है कि हूती विद्रोही एक खास प्राकृति पौधे की हरी पत्तियों का नशा करते हैं, जिसे 'खत' या 'कत' कहा जाता है. सिर्फ हूती ही नहीं, बल्कि यमन के आम लोग भी इसका ही नशा करते हैं.

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इस पौधे की हरी पत्तियों को चबाया जाता है. इन पत्तियों में 'कैथिनोन' नाम का केमिकल होता है. वैज्ञानिक रूप से यह केमिकल दिमाग पर 'एम्फेटामाइन' ड्रग जैसा असर करता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे एक मानसिक उत्तेजक और लत लगाने वाले पदार्थ की श्रेणी में रखता है.
गाल क्यों फूल जाता है?
हूती विद्रोही या आम लोग इन हरी पत्तियों को मुंह में रखकर दांतों के एक तरफ गाल में दबा लेते हैं. इसे घंटों तक चबाते रहते हैं, जिससे मुंह में लार के साथ मिलकर पत्तियां एक बड़े गोले का रूप ले लेती हैं और गाल फूल जाता है. धीरे-धीरे इसका रस खून में मिलता है और नशा चढ़ता है.

इसका असर क्या होता है?
- भूख-प्यास और थकान गायब: एक बार इसे चबाना शुरू करते हैं तो 3 से 5 घंटे तक चबाते रहते हैं. इससे भूख-प्यास और थकान खत्म हो जाती है. हूती विद्रोही कई-कई दिनों तक मोर्चे पर डटे रहते हैं.
- नींद भी उड़ जाती है: यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम को इतना उत्तेजित कर देता है कि नींद पूरी तरह उड़ जाती है. इसे चबाने के बाद पूरी रात बिना सोए पहरा दिया जा सकता है.
- अस्थायी जोश: इसे चबाने से शरीर में डोपामाइन का स्तर बढ़ जाता है. इस कारण बहुत ज्यादा आत्मविश्वास आ जाता है. इतना ही नहीं, इससे एनर्जी और गुस्सा महसूस होता है.

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यमन को बर्बाद कर रहा 'खत'!
यमन में 'खत' की पत्तियां चबाने पर कोई रोक नहीं है. उल्टा वहां तो 'खत' चबाने के लिए ब्रेक भी मिलता है. इसे यमन में 'तखजीन का समय' कहा जाता है. ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं जो बताती हैं कि गृहयुद्ध के समय दोपहर में 3 घंटे का सीजफायर होता था, ताकि 'खत' चबा सकें.
लेकिन यह 'खत' यमन को बर्बाद कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन में 90% पुरुष और 50% महिलाएं हर रोज 'खत' चबाती हैं. ये न सिर्फ परिवारों को नशे में धकेल रहा है, बल्कि गरीबी भी बढ़ा रहा है. क्योंकि लोग अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इसे खरीदने में खर्च कर रहे हैं.
इतना ही नहीं, 'खत' की खेती में पानी भी बहुत लगता है. यमन वैसे ही सूखा देश है और वहां के ग्राउंड वाटर का 30 से 40% हिस्सा अनाज या सब्जियां उगाने के बजाय सिर्फ 'खत' की खेती में बहा दिया जाता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यमन की राजधानी सना का पानी बहुत जल्द पूरी तरह खत्म हो सकता है.
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