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क्या अमेरिका की मिसाइलों का बदला ईरान उसके घर में घुसकर ले रहा है? कैसे पीने के पानी को किया कंट्रोल

अमेरिका के संघीय सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि पूरे अमेरिका में 152,000 सार्वजनिक पेयजल प्रणालियां और 16,000 से अधिक अपशिष्ट वॉटर ट्रीटमेंट फेसिलिटी हैं.

क्या अमेरिका की मिसाइलों का बदला ईरान उसके घर में घुसकर ले रहा है? कैसे पीने के पानी को किया कंट्रोल
AFP

क्या ईरान ने अमेरिका को प्यास से तड़पाने की कसम खा ली है. अमेरिका में पानी की सप्लाई पर साइबर हमले हुए हैं और नाम ईरान का आ रहा है. इन साइबर हमलों ने अमेरिकी अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है. 

जुलाई महीने के आखिर में अमेरिकी राज्य मिनेसोटा ने बताया कि उसके कम से कम 30 नगरों की पानी सप्लाई करने वाले सिस्टम पर एक  साइबर हमला हुआ. कुछ दिनों बाद खुद FBI ने चेतावनी दी कि साइबर अपराधियों ने कम से कम सात राज्यों की पानी और गंदे पानी के सिस्टम में सेंध लगाई है.

इन साइबर हमलों से अमेरिका के अंदर पानी से जुड़ा कामकाज प्रभावित हुआ और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं की कमजोरियां भी सामने आईं. इसके बाद जॉर्जिया, न्यू जर्सी और साउथ डकोटा समेत अमेरिका के कई राज्यों ने भी इसी तरह के साइबर हमलों की जानकारी दी. 

शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने इन साइबर हमलों के लिए कथित तौर पर ईरान से जुड़े हैकरों को जिम्मेदार बताया था. लेकिन अमेरिकी सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि इन हमलों के पीछे कौन है.

अमेरिका में पानी की व्यवस्था कैसे काम करती है?

अमेरिकी संघीय सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे अमेरिका में 1.52 लाख सार्वजनिक पेयजल व्यवस्थाएं और 16 हजार से ज्यादा गंदे पानी को साफ करने वाले संयंत्र हैं. ज्यादातर शहरों और नगरों को पानी झीलों, जलाशयों, नदियों या जमीन के नीचे मौजूद पानी के स्रोतों से मिलता है.

इलेक्ट्रिक पंप पानी को पाइपों के जरिए एक ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाते हैं. वहां पानी को फिल्टर किया जाता है और कीटाणुरहित किया जाता है. इसके बाद साफ किए गए पानी को बड़े टैंकों में भेजा जाता है. इन टैंकों से पानी घरों, दुकानों और सार्वजनिक जगहों, जैसे पार्कों और स्कूलों तक पहुंचता है. पानी की यह पूरी व्यवस्था कई वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैली हो सकती है.

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हैकर पानी की सप्लाई को कैसे निशाना बना रहे हैं?

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर इंटरनेट से सीधे जुड़े प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (पीएलसी) को निशाना बना रहे हैं. ये ऐसे उपकरण होते हैं जो पानी की व्यवस्था और दूसरे औद्योगिक संयंत्रों में लगे उपकरणों को आपस में काम करने में मदद करते हैं.

पीएलसी पानी का दबाव, पानी में डाले जाने वाले रसायनों की मात्रा और दूसरी जरूरी चीजों पर नजर रखते हैं. इसका मकसद यह पुख्ता करना होता है कि पानी पीने के लिए सुरक्षित रहे. नगरपालिका के कर्मचारी डैशबोर्ड के जरिए इन कंट्रोलर को चलाते हैं. ये डैशबोर्ड तार वाले नेटवर्क, रेडियो या मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए काम करते हैं.

अमेरिकन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल सर्विस में ग्लोबल सिक्योरिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर विलियम अकोटो ने द कन्वर्सेशन में एक लेख में बताया कि ऐसे साइबर हमले कैसे किए जाते हैं. उनके मुताबिक, हमलावर इंटरनेट पर ऐसे एड्रेस को खोजते हैं, जहां कंट्रोलर, डैशबोर्ड या बाहर की कंपनियों की रिमोट एक्सेस सेवाएं जुड़ी होती हैं. वे ऐसे सिस्टम तलाशते हैं जो सीधे इंटरनेट से जुड़े हों.

इसके बाद सिस्टम में घुसने के लिए डिफॉल्ट या चुराए गए पासवर्ड, ऐसी सुरक्षा खामी जिसे अभी तक ठीक नहीं किया गया है या गलत तरीके से सेट की गई रिमोट एक्सेस सेवा का फायदा उठाते हैं.

सिस्टम में एंट्री मिलने के बाद वे पासवर्ड बदल सकते हैं, कमांड भेज सकते हैं या कंट्रोलर के सॉफ्टवेयर में बदलाव करने की कोशिश कर सकते हैं.

क्या इन हमलों के पीछे ईरान है?

सीबीएस न्यूज के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या इन साइबर हमलों का संबंध ईरानी हैकरों से हो सकता है. हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा है कि ज्यादा तकनीकी सबूत मिलने के बाद यह आकलन बदल सकता है.

ईरान पर पहले भी इजरायल की पानी की सप्लाई जैसी व्यवस्थाओं पर इसी तरह के हमले करने का आरोप लगता रहा है. लेकिन पिछले हफ्ते कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने इस हमले के लिए मिनेसोटा के अधिकारियों को ही जिम्मेदार ठहराया और ईरान के शामिल होने पर सवाल उठाए.

इस बीच, जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं किसी दूसरे हमलावर ने अधिकारियों को गुमराह करने के लिए ईरानी हैकरों के तरीकों की नकल तो नहीं की.

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