- व्हाइट हाउस से 19 मिनट दिए भाषण में ट्रंप ने ईरान के एयर फोर्स को तबाह किए जाने की बात कही.
- ईरान का एयर फोर्स दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में नहीं शामिल है पर युद्ध की उसकी रणनीति भी अलग है.
- जिसका सबूत कुछ ही घंटे बाद ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें बरसा कर दे दिया.
व्हाइट हाउस से दिए देश के नाम अपने 19 मिनट के भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान की एयर पावर लगभग खत्म हो चुकी है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? या यह युद्ध के दौरान मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है? आइए पूरी कहानी को समझते हैं. ईरान की एयर फोर्स दुनिया की सबसे आधुनिक ताकत तो नहीं मानी जाती, लेकिन इसे कम आंकना भी गलत होगा. ईरान के पास कितने लड़ाकू विमान है इस पर आंकड़े थोड़े अलग-अलग हैं.
ग्लोबल फायरपावर के 2026 के आंकड़ों के मुताबिक ईरान के पास कुल 188 फाइटर प्लेन मौजूद हैं. इनमें अत्याधुनिक रडार और इंटरसेप्टर मौजूद हैं. वहीं इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के अनुसार, ईरान के पास करीब 250 कॉम्बैट-कैपेबल यानी युद्ध के लिए सक्षम विमान हैं. वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट ईरान के फाइटर जेट्स की संख्या को 400 के करीब बताता है.
हालांकि ये संख्या इजरायल के पास मौजूद फाइटर जेट्स की संख्या के ईर्द-गिर्द ही है पर इजरायल के बेड़े में कहीं अत्याधुनिक फाइटर जेट्स मौजूद हैं, जैसे F16 की संख्या ही ढाई सौ के आसपास है.

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ईरान के डिफेंस एयरक्राफ्ट्स
उधर ईरान के पास 1979 की क्रांति से पहले शाह के दौर में अमेरिका से खरीदे गए F-14 टॉमकैट हैं जिसे खुद अमेरिका ने 2006 में ही इस्तेमाल करना बंद कर दिया था. वहीं ईरान अब भी रूसी मिग-29 और सुखोई-24 जैसे फाइटर जेट्स का इस्तेमाल कर रहा है. हालांकि इन विमानों का इस्तेमाल बंद नहीं हुआ है पर ये अब काफी पुराने हो चुके हैं.
बता दें कि ईरान ने बीते डेढ़ दशक में अपनी रणनीति बदली है और आज उसकी सबसे बड़ी ताकत ड्रोन और मिसाइलें हैं. उसने एयर फोर्स पर कम और मिसाइल, ड्रोन पर अधिक फोकस किया है.
अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने तीन बड़े दावे किए. उन्होंने कहा कि ईरान की एयर फोर्स लगभग खत्म हो चुकी है. साथ ही यह भी बोले कि उनकी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को सीमित कर दिया गया है. तो यह भी कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है. ट्रंप बोले कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अपने अंतिम चरण में है और 2–3 हफ्तों में खत्म हो सकता है.
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तेहरान के एक युद्ध संग्रहालय में ईरान में निर्मित मिसाइलें दिखाई गई हैं. यह तस्वीर 01 अप्रैल 2026 की है
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ट्रंप के दावों की हकीकत खुद ही सामने आ गई
इधर ट्रंप का भाषण खत्म हुआ और कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अपने मिसाइल इजरायल पर दागने शुरू किए. जो ट्रंप के दावों पर सवाल खुद-ब-खुद खड़े करते हैं. ईरान ने इजराइल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर नए मिसाइल हमले किए. कई जगह ड्रोन एक्टिविटी भी देखी गई. यानी पूरी तरह तबाह होने का दावा हकीकत से तो बिल्कुल मेल नहीं खाता. युद्ध के जानकार कहते हैं कि अगर एयर फोर्स पूरी तरह खत्म हो जाती, तो इस स्तर के हमले संभव नहीं होते.
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11 फरवरी 2026 को इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ के मौके पर तेहरान में आयोजित रैली में प्रदर्शित किया गया ईरान का ड्रोन शाहिद-136
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क्या है ईरान की युद्ध रणनीति?
मिडिल ईस्ट में अगर चल रहे युद्ध में ईरान की स्थिति को समझना है तो पहले उसकी रणनीति को समझना जरूरी है. दरअसल, ईरान अपने ड्रोन स्वार्म अटैक, लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, अंडरग्राउंड लॉन्च सिस्टम और प्रॉक्सी ग्रुप्स (हूती, हिज्बुल्लाह, आदि) के जरिए कई फ्रंट पर अटैक करता है. इसलिए भले ही उसके फाइटर जेट्स पुराने पड़ जाएं, उसके युद्ध लड़ने का मॉडल बेहद खतरनाक और आधुनिक है.
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का बयान बढ़ा-चढ़ा कर हो सकता है. ईरान के एयरबेस, रनवे और कुछ एयरक्राफ्ट्स भी तबाह हुए होंगे लेकिन पूरे एयर फोर्स को खत्म ही कर दिया गया है यह युद्ध के दौरान चलाया जाने वाला मनोवैज्ञानिक प्रोपेगैंडा भर लगता है. ऐसे में यह भी संभावना जताई जा रही है कि अगर अमेरिका ऑपरेशन जारी रखता है तो ईरान मिसाइल और ड्रोन अटैक को और तेज कर सकता है.
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