- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी खत्म करने और प्रोजेक्ट फ्रीडम को फिलहाल रोकने का फैसला लिया है.
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है और जल्द समझौता संभव है.
- ईरान ने अमेरिकी कदम को अपनी जीत माना और प्रोजेक्ट फ्रीडम को प्रोजेक्ट डेडलॉक करार दिया है.
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'एपिक फ्यूरी' नाम से शुरू किया गया अपना सैन्य अभियान खत्म करने का एलान किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हालात बदल रहे हैं. उन्होंने ईरान के खिलाफ जारी उस प्रोजेक्ट फ्रीडम को फिलहाल रोक दिया है, जिसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए चलाने की बात कही गई थी. ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत अब आखिरी चरण में पहुंच गई है और जल्द समझौता हो सकता है. ट्रंप का कहना है कि यह फैसला कुछ देशों की सलाह पर लिया गया है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि अमेरिका दबाव बनाए रखेगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी अभी जारी रहेगी.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी कहा कि 28 फरवरी से चले ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के सभी लक्ष्य पूरे कर लिए गए हैं. अमेरिका अब जंग नहीं चाहता है. दोनों देशों के बीच 7 अप्रैल से सीजफायर जारी है. रूबियो ने कहा कि प्रोजेक्ट फ्रीडम का मकसद हमला नहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे जहाजों की मदद करना है.
होर्मुज में 80 से ज्यादा देशों के जहाज प्रभावित
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में करीब 80 से ज्यादा देशों के जहाज प्रभावित बताए गए हैं. एक अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या डेढ़ से दो हजार जहाज हो सकती है. हालांकि ईरान कहता रहा है कि जब तक अमेरिका होर्मुज की नाकेबंदी को नही खोलेगा तब तक आगे की बातचीत नही हो सकती है. अमेरिका के रुख में जो नरमी आई है, उससे लगता है कि अब शायद ईरान के साथ उसकी कोई डील हो जाए जिसका फायदा पूरी दुनिया को होगा.
अमेरिकी कदम को अपनी जीत मान रहा ईरान
ईरान ने अमेरिकी कदम को अपनी जीत बताया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका पीछे हट गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने प्रोजेक्ट फ्रीडम की आलोचना की. उन्होंने इसे प्रोजेक्ट डेडलॉक बताया, वैसे ईरान-अमेरिका के बीच युद्धविराम के बावजूद ईरान ने ड्रोन और मिसाइल ने यूएई को फिर से निशाना बनाया है.
अब सबकी नजर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित डील पर है. हालांकि उसके पहले अमेरिका का रुख बता रहा है कि जो दबाव अमेरिका ईरान पर डालना चाहता है, उसका असर वह खुद सबसे ज्यादा महसूस कर रहा है.
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