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फ्रांस में भी हुई इबोला की एंट्री! सामने आया पहला मरीज, आइसोलेशन सेंटर में चल रहा इलाज

फ्रांस में जिस शख्स में इबोला का वायरस मिला है वो कुछ दिन पहले ही कांगो में एक मानीवय मिशन से लौटा था. अभी तक की जांच में पता चला है कि संक्रमित शख्स पेशे से एक डॉक्टर है. उसके संक्रमित होने की सूचना मिलते ही उसे तुरंत आइसोलेट कर दिया गया है.

फ्रांस में भी हुई इबोला की एंट्री! सामने आया पहला मरीज, आइसोलेशन सेंटर में चल रहा इलाज
फ्रांस में भी हुई इबोला की एंट्री
NDTV
नई दिल्ली:

इबोला दिन पर दिन अपने पैर पसारता जा रहा है. कांगो-यूगांडा के बाद अब इसकी एंट्री फ्रांस में हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी तक दुनियाभर में इबोला से संक्रमित मरीजों की संख्या 1048 हो गई है. जबकि 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इस संक्रमण से मृत्यु दर 25.5 फीसदी बताई जाती है. फ्रांस में जिस शख्स को इबोला पॉजिटिव पाया गया हो कुछ दिन पहले कांगो में एक मानवीय मिशन से लौटा था. जो शख्स इस संक्रमण से संक्रमित मिला है वो एक डॉक्टर बताया जा रहा है. डॉक्टर के संक्रमित होने की सूचना मिलने के तुरंत बाद पीड़ित को आइसोलेशन सेंटर में भेज दिया गया है. जहां उनकी हालत अभी स्थिर बताई जा रही है. फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि आम लोगों के लिए संक्रमण का खतरा फिलहाल बहुत कम है.

क्या है इबोला वायरस?

इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसे वायरल हेमरेजिक फीवर कहा जाता है. यह वायरस शरीर में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और कई मामलों में इंटरनल ब्लीडिंग का कारण बन सकता है. इसकी मृत्यु दर काफी ज्यादा मानी जाती है.इस बार चिंता का कारण बना है बुंदीबुग्यो स्ट्रेन, जो इबोला वायरस का एक दुर्लभ प्रकार है. फिलहाल इस स्ट्रेन के लिए कोई पूरी तरह वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है.

WHO ने क्यों बढ़ाई चिंता?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा माना है. WHO ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न यानी अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है.

इसके अलावा अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Africa Centres for Disease Control and Prevention) ने भी इस प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ कॉन्टिनेंटल सिक्योरिटी घोषित किया है. हेल्थ एजेंसियों ने एयरपोर्ट और सीमा क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है ताकि संक्रमित यात्रियों की समय पर पहचान की जा सके.

किन देशों पर ज्यादा खतरा?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, कांगो और युगांडा के पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है. खासतौर पर साउथ सुडान जैसे देशों को हाई रिस्क जोन में रखा गया है. WHO ने लोगों को उन इलाकों की यात्रा से बचने की सलाह भी दी है, जहां बुंदीबुग्यो वायरस के मामले सामने आए हैं.

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