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दुबई ड्राइवरलेस भविष्य के लिए अपनी सड़कों को कैसे तैयार कर रहा है?

दुबई का टारगेट है कि 2030 तक एक चौथाई यात्राओं को ऑटोनॉमस बनाया जाए यानी ऐसी गाड़ियों से हों जिनमें कोई ड्राइवर न हो. लेकिन इस टारगेट को पाने के लिए टेस्ट किए जाएंगे. टेस्ट के दौरान देखा जाएगा कि गाड़ी अपने आसपास की चीजों को कितनी अच्छी तरह पहचानती है, स्थिति को समझकर क्या फैसला लेती है.

दुबई ड्राइवरलेस भविष्य के लिए अपनी सड़कों को कैसे तैयार कर रहा है?
Dubai: बिना ड्राइवर वाली दुबई बनाने की तैयारी, 2030 तक सब बदल जाएगा (फोटो- एएफपी)
  • दुबई ने ड्राइवरलेस गाड़ियों के परीक्षण के लिए एक स्मार्ट और इंटिग्रेटेड मोबिलिटी टेस्टिंग ग्राउंड शुरू किया है
  • इस सेंटर में ड्राइवरलेस गाड़ियों को 248 अलग-अलग ट्रैफिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में जांचा जाएगा
  • परीक्षण केवल नियंत्रित टेस्ट ट्रैक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक सड़कों पर भी किया जाएगा

सड़क पर कार चल रही है और उसके अंदर ड्राइवर ही नहीं है. सामने अचानक कोई दूसरी गाड़ी आ जाए, ट्रैफिक बदल जाए या मौसम की स्थिति बदल जाए, तो कार क्या करेगी? दुबई अब ऐसी ही ड्राइवरलेस गाड़ियों को आम सड़कों पर उतारने से पहले उनकी जमकर परीक्षा लेने जा रहा है. ड्राइवरलेस गाड़ियों का कॉन्सेप्ट नया नहीं है लेकिन एक साथ एक ही हाईवे पर हजारों ड्राइवरलेस गाड़ियों को उतारने के पहले यह तैयारी जरूरी है.

248 अलग-अलग परिस्थितियों में गाड़ियां होंगी टेस्ट

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार दुबई में इसके लिए दुबई मोबिलिटी लैब शुरू किया गया है. इसे दुबई की रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी (RTA) ने दुबई इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक जोन्स अथॉरिटी (DIEZ) के साथ मिलकर बनाया है. यह Dubai Silicon Oasis में है. इसे मिडिल ईस्ट में अपनी तरह का सबसे स्मार्ट और इंटिग्रेटेड (एकसाथ) ऑटोनॉमस मोबिलिटी टेस्टिंग ग्राउंड बताया गया है.

इस सेंटर में ड्राइवरलेस गाड़ियों को 248 अलग-अलग परिस्थितियों में टेस्ट किया जाएगा. इनमें कुछ टेस्ट कंट्रोल्ड जगह पर होंगे, जबकि कुछ असली सड़कों पर किए जाएंगे. मकसद यह देखना है कि बिना ड्राइवर चलने वाली गाड़ियां कितनी सुरक्षित और भरोसेमंद हैं और मुश्किल ट्रैफिक या पर्यावरण की स्थिति में कैसे रिेएक्शन देती हैं.

टेस्टिंग सेंटर का सबसे अहम हिस्सा एक मल्टी-पर्पज टेस्टिंग एरिया है. रिपोर्ट के अनुसार यहां ड्राइवरलेस गाड़ियों को शहर की सड़कों पर आने वाली 195 अलग-अलग परिस्थितियों का सामना कराया जा सकता है. इनमें से 143 परिस्थितियां सेंटर के मूल डिजाइन में शामिल थीं. बाद में 52 और परिस्थितियां जोड़ी गईं. पब्लिक रोड पर होने वाले टेस्ट को मिलाकर कुल 248 परिस्थितियों में गाड़ियों की जांच होगी.

टेस्ट के दौरान देखा जाएगा कि गाड़ी अपने आसपास की चीजों को कितनी अच्छी तरह पहचानती है, स्थिति को समझकर क्या फैसला लेती है और अचानक सामने आने वाली स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देती है. यानी गाड़ी को सीधे आम सड़क पर उतारने से पहले नियंत्रित माहौल में उसकी क्षमता की जांच होगी. टेस्ट में दूसरी गाड़ियों और सड़क इस्तेमाल करने वाले लोगों के साथ होने वाली परिस्थितियां, बदलता ट्रैफिक और पर्यावरण से जुड़ी स्थितियां शामिल होंगी.

असली सड़कों पर भी होगा टेस्ट

यह सेंटर सिर्फ बंद टेस्ट ट्रैक तक सीमित नहीं है. यहां बनाए गए खास टेस्ट एरिया के साथ Dubai Silicon Oasis से Al Qudra की ओर जाने वाली पब्लिक रोड पर भी ड्राइवरलेस गाड़ियों का परीक्षण होगा. इस तरह डेवलपर्स को शुरुआती टेस्ट से लेकर जांच, सर्टिफिकेशन और आखिर में गाड़ियों को कमर्शियली चलाने तक का रास्ता मिलेगा.

सेंटर में अलग-अलग टेस्ट ट्रैक, ट्रैफिक से जुड़ी सुविधाएं, ऑफिस और सपोर्ट सुविधाएं भी हैं. कामकाज और इनडोर इंस्टॉलेशन के लिए तीन लाइट-इंडस्ट्रियल यूनिट भी बनाई गई हैं. इसके अलावा तीन 60kW इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर लगाए गए हैं. यह पूरा प्रोजेक्ट दुबई की स्मार्ट सेल्फ-ड्राइविंग ट्रांसपोर्ट रणनीति का हिस्सा है. इसका लक्ष्य 2030 तक दुबई की कुल मोबिलिटी यात्राओं में 25 फीसदी यात्राओं को ऑटोनॉमस बनाना है.

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