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कोकीन चाटने वाली मछलियां दोगुना दूरी तक तैरती हैं! समझें नई स्टडी का यह खुलासा डरावना क्यों है

Drugs Effect on Environment: स्टडी दिखाती है कि ड्रग्स सिर्फ समाज की समस्या नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ी चुनौती हैं- वैज्ञानिक

कोकीन चाटने वाली मछलियां दोगुना दूरी तक तैरती हैं! समझें नई स्टडी का यह खुलासा डरावना क्यों है
कोकीन चाटने वाली सैल्मन मछलियां लगभग दो गुना दूरी तक तैरती हैं.

इंसानों में ही नहीं मछलियों में भी कोकीन जैसी ड्रग्स का खतरनाक प्रभाव देखने को मिला है और एक स्टडी में यह साबित भी हो चुका है. इस हफ्ते जारी एक स्टडी के अनुसार, पानी में मिलाए कोकीन के संपर्क में आने वाली सैल्मन मछलियां सामान्य मछलियों से लगभग दो गुना दूरी तक तैरती हैं. स्टडी में हुआ यह खुलासा डराता है. दरअसल दुनिया भर में कोकीन का इस्तेमाल बढ़ रहा है और हमारा पर्यावरण भी इससे अछूता नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2023 में लगभग 2.5 करोड़ लोगों ने कोकीन का उपयोग किया और यह ड्रग अब नदियों और पानी में भी ज्यादा मिलने लगी है.

स्टडी में क्या पता चला

सोमवार को जारी इस रिसर्च को ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी और स्वीडन की स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया. इसमें देखा गया कि यह ड्रग प्राकृतिक माहौल में मछलियों की हरकतों को कैसे बदलती है. इस स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने स्वीडन की लेक वैटर्न में 100 जंगली अटलांटिक सैल्मन मछलियों को लिया और उन्हें कोकीन और बेंजोयलेक्गोनिन (जो शरीर में कोकीन से बनने वाला पदार्थ है) के संपर्क में रखा, फिर उनकी मूवमेंट को ट्रैक किया.

उन्होंने पाया कि कोकीन के संपर्क में आई मछलियां हर हफ्ते सामान्य मछलियों से 1.9 गुना ज्यादा दूरी तय करती हैं. जो मछलियां इस ड्रग के बाय-प्रोडक्ट (यानी बेंजोयलेक्गोनिन) के संपर्क में थीं, वे भी करीब 12.3 किलोमीटर ज्यादा ऊपर की तरफ तैर गईं. स्टडी के को-राइटर मार्कस मिशेलांजेली (ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी) ने कहा, “जानवरों के व्यवहार में कोई भी असामान्य बदलाव चिंता की बात है.”

उन्होंने कहा कि हम अपने पानी में सिर्फ अवैध ड्रग्स ही नहीं, बल्कि कई तरह के फार्मास्युटिकल की बढ़ती मात्रा देख रहे हैं. रिसर्चर्स ने चेतावनी दी कि आम दवाओं और ड्रग्स से पानी का प्रदूषण जैव विविधता के लिए “बड़ा और बढ़ता खतरा” है. 

स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर माइकल बर्ट्राम ने कहा कि यह स्टडी दिखाती है कि वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और निगरानी को बेहतर बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “हमारी स्टडी दिखाती है कि ड्रग्स सिर्फ समाज की समस्या नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ी चुनौती हैं.”

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