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डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को नई धमकी- चाहूं तो एक झटके में सबको खत्म कर दूं, पर सोचता हूं...

खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी ईरान ने ऐसी तारीखों को चुना है, जिनका बड़ा महत्व है. 4 जुलाई को अमेरिकी की आजादी की 250वीं सालगिरह थी. उसी दिन खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई है.

डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को नई धमकी- चाहूं तो एक झटके में सबको खत्म कर दूं, पर सोचता हूं...
  • ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए चार से नौ जुलाई तक शोक सप्ताह मनाया जा रहा है
  • ईरान के विभिन्न शहरों में खामेनेई के जनाजे में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर शोक व्यक्त कर रहे हैं
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि वे चाहें तो सभी को खत्म कर सकते हैं
वॉशिंगटन:

ईरान में फिलहाल शोक सप्ताह चल रहा है. शीर्ष नेता रहे अली खामेनेई को 4 से 9 जुलाई तक अंतिम विदाई दी जानी है. तेहरान समेत ईरान के ज्यादातर शहरों में सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ रही है. हर ईरानी खामेनेई के जनाजे के पीछे जाना चाहता है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरान भी धमकी भरे अंदाज में बात की है. उनका कहना है कि ईरान में इतनी बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं. हम चाहें तो एक बार में ही सबको खत्म कर सकते हैं. फिर भी ऐसा नहीं कर रहे. इसलिए क्योंकि यदि सभी को हम मार देंगे तो फिर वार्ता के लिए कौन बचेगा. 

डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा भी किया कि ईरान के नेता हमारे आगे गिड़गिड़ा रहे हैं कि एक डील कर ली जाए. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने तय किया है कि एक सप्ताह तक गोली नहीं चलेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के लोग खामेनेई को अंतिम विदाई देने में व्यस्त हैं. उन्होंने खामेनेई कि विदाई में जुटी लाखों की भीड़ पर भी हैरानी जताई. ट्रंप ने कहा कि मुझे तो लगता था कि ईरान के लोग उनसे नफरत करते होंगे. ईरान में 36 साल तक लगातार शासन चलाने वाले मुल्क के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत हो गई थी. इस हमले के बाद ईरान ने भी खूब जवाबी हमले किए थे. 

इसके चलते पूर्व मिडल ईस्ट में ही अशांति फैल गई थी. इसके अलावा दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई के एक अहम रूट होर्मुज स्ट्रेट पर भी रोक लग गई थी. अब एक शांति समझौते के हालात बने हैं तो सप्लाई फिर से शुरू हुई है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप अब भी लगातार धमकियां देते रहते हैं. वहीं ईरान भी अमेरिका के आगे झुकता नहीं दिख रहा है. 

ईरान ने खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए भी 4 और 9 तारीख को ही क्यों चुना

यहां तक कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी उसने ऐसी तारीखों को चुना है, जिनका बड़ा महत्व है. 4 जुलाई को अमेरिकी की आजादी की 250वीं सालगिरह थी. उसी दिन खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई है. इसके अलावा 9 जुलाई को आखिरी दिन है, जिसका इमाम हुसैन से सीधा संबंध है. यही नहीं ईरान ने इस मौके को दुनिया भर के शिया मुसलमानों की एकता के मौके पर भी चुना है. इसी नीति के तहत खामेनेई के जनाजे को इराक में ले जाया जाना है. इराक में खामेनेई का जनाजा नजफ और करबला जाएगा.

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