- डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था जिसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के पास टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, यह अधिकार संसद के पास है
- ट्रंप ने भारत सहित कई देशों पर टैरिफ लगाए, लेकिन भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा टैरिफ के बावजूद बढ़ा
टैरिफ... टैरिफ... टैरिफ... पिछले एक साल में ये शब्द जितना चर्चा में रहा है, उतना शायद और कोई न रहा हो. पिछले साल 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर टैरिफ थोपे. उन्होंने पिछले साल 2 अप्रैल को भारत समेत दुनिया के 80 से ज्यादा देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया. उन्होंने इसे 'लिबरेशन डे' बताया. ट्रंप का कहना था कि जो जितना टैरिफ लगाएगा, हम भी उतना ही टैरिफ लगाएंगे.
लेकिन ट्रंप के अब इस टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'अवैध' बताया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने ये फैसला 6-3 से सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के पास एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. इसका अधिकार संसद के पास है.
अदालत में ट्रंप ने दावा किया था कि 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पॉवर्स एक्ट उन्हें टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस यानी संसद के पास है.
क्या हुआ और ट्रंप ने अब क्या किया?
ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में जमकर टैरिफ लगाए. कभी कनाडा, कभी चीन, कभी ब्राजील तो कभी भारत. ट्रंप टैरिफ की धमकियां भी देते रहे. ट्रंप ने खुद कई बार कहा कि उन्होंने टैरिफ और व्यापार का इस्तेमाल किया.
ट्रंप के इस टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और अब अदालत ने इन्हें अवैध बताया है. चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति के पास एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि टैरिफ लगाने का काम राष्ट्रपति का नहीं है, बल्कि ये अधिकार संसद के पास है. कोर्ट ने ये भी कहा कि टैरिफ के लिए जिस इमरजेंसी एक्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसने राष्ट्रपति को कभी इतनी शक्तियां नहीं दीं.
कोर्ट के फैसले के बाद सिर्फ वही टैरिफ हटे हैं, जिन्हें इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक्स पॉवर्स एक्ट के तहत लगाया गया था. स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल पर लगे टैरिफ नहीं हटेंगे.

ट्रंप ने भारत पर भी जो पहले 50% टैरिफ लगाया था, वह भी इसी कानून के तहत लगाया था. हालांकि, इसी महीने हुई ट्रेड डील के बाद टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया गया. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये टैरिफ भी हट गया है.
हालांकि, ट्रंप ने इस फैसले के बाद 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाया है. ये टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लगाया है. ये धारा राष्ट्रपति को तीन महीने के लिए 15% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देती है. उसके बाद संसद की मंजूरी लगेगी. इसका मतलब हुआ कि ये 10% ग्लोबल टैरिफ अभी अस्थायी है.
टैरिफ लगाया तो उसका असर हुआ?
ट्रंप जब टैरिफ पर टैरिफ लगाए जा रहे थे तो उनका तर्क था कि अमेरिका कम टैरिफ लगाता है, जबकि बाकी देश ज्यादा टैरिफ लगाते हैं, इससे अमेरिका को व्यापार घाटा होता है. ट्रंप इस व्यापार घाटे को अमेरिका की 'अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा' बताते थे.
व्यापार घाटा तब होता है जब इम्पोर्ट यानी आयात ज्यादा हो और एक्सपोर्ट यानी निर्यात कम हो. चीन, मेक्सिको, कनाडा और भारत जैसे ज्यादातर देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा बहुत ज्यादा था. ट्रंप का मकसद टैरिफ लगाकर इस व्यापार घाटे को कम करना था.
लेकिन क्या टैरिफ से व्यापार घाटा कम हुआ? तो इसका जवाब है- हां. अमेरिकी सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि टैरिफ के कारण चीन, मेक्सिको और कनाडा के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा तेजी से कम हुआ है. हालांकि, भारत के साथ व्यापार घाटा बढ़ा ही है.
ट्रंप ने चीन पर 10% का टैरिफ लगाया था. आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच लगभग 415 अरब डॉलर का कारोबार हुआ. इसमें 106 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट और 308 अरब डॉलर का इम्पोर्ट था. यानी, चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 202 अरब डॉलर का रहा. जबकि, इससे पहले जनवरी से दिसंबर 2024 के बीच चीन के साथ अमेरिका को 295 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार घाटा हुआ था. यानी, एक साल में ही चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा लगभग 32 फीसदी कम हो गया.
हालांकि, भारत पर टैरिफ के बावजूद अमेरिका का व्यापार घाटा कम होने के बावजूद बढ़ा ही. 2025 में भारत और अमेरिका के बीच लगभग 150 अरब डॉलर का कारोबार हुआ. इसमें 46 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट और 104 अरब डॉलर का इम्पोर्ट था. इस हिसाब से भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 58 अरब डॉलर से भी ज्यादा रहा. जबकि, इससे पहले 2024 में भारत के साथ कारोबार में अमेरिका को लगभग 46 अरब डॉलर का घाटा हुआ था. यानी, टैरिफ के बावजूद भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 27 फीसदी बढ़ गया.
हालांकि, आंकड़ों से पता चलता है कि ट्रंप ने टैरिफ जिस व्यापार घाटे को कम करने के मकसद से लगाया था, वो तो ज्यादातर देशों के साथ कम होने की बजाय बढ़ा ही है. इसका मतलब हुआ कि टैरिफ का जो मकसद था, वो तो पूरा नहीं हो पाया.

घाटा तो कम नहीं हुआ लेकिन कमाई खूब बढ़ी?
ट्रंप ने एक बार दावा किया था कि उनके टैरिफ की वजह से अमेरिका हर दिन 2 अरब डॉलर कमा रहा है. हालांकि, ट्रंप के इस दावे में कुछ सच्चाई नहीं है. ये सच है कि ट्रंप के टैरिफ के कारण अमेरिका की खूब कमाई हुई है, लेकिन उतनी भी नहीं, जितना दावा किया किया जाता है.
अमेरिका में वित्त वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक रहता है. अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी डिपार्टमेंट की रिपोर्ट बताती है कि टैरिफ से होने वाली कमाई दोगुनी बढ़ गई है. हालांकि, रिपोर्ट में टैरिफ की जगह कस्टम ड्यूटी लिखा जाता है.
ट्रेजरी डिपार्टमेंट के मुताबिक, 2023-24 में टैरिफ से 77 अरब डॉलर का रेवेन्यू आया था. 2024-25 में ये दोगुना बढ़ाकर 195 अरब डॉलर हो गया. वहीं, 2025-26 में सिर्फ अक्टूबर से 19 फरवरी तक यानी लगभग साढ़े 4 महीनों में ही टैरिफ से 123 अरब डॉलर की कमाई हो चुकी है.

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से टैरिफ का रेवेन्यू जबरदस्त तरीके से बढ़ा है. ट्रंप ने टैरिफ अप्रैल 2025 से लगाना शुरू किया था. ट्रेजरी डिपार्टमेंट की रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2025 में टैरिफ से 817 करोड़ डॉलर का रेवेन्यू मिला था. अप्रैल में ये रेवेन्यू लगभग दोगुना होकर 1,563 करोड़ डॉलर पहुंच गया.
रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक टैरिफ से अमेरिका ने 277 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाया है. अगर इसमें फरवरी की 19 तारीख तक की कमाई भी जोड़ लें तो कुल रेवेन्यू 283 अरब डॉलर हो जाता है. अगर इसे भारतीय करंसी में कन्वर्ट किया जाए तो अप्रैल से अब तक टैरिफ से अमेरिका ने लगभग 26 लाख करोड़ रुपये की कमाई कर ली है. ये भारत के रक्षा बजट से 3 गुना से भी ज्यादा है. 2025-26 के लिए भारत का रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये है.

कुल मिलाकर ट्रंप के टैरिफ से अमेरिका का रेवेन्यू तो बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद इसका उतना असर नहीं हुआ, जितना दावा किया जा रहा था. टैरिफ एक तरह का टैक्स होता है, जिसे आखिरकार महंगाई ही बढ़ती है. अमेरिका के टैक्स फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि ज्यादा टैरिफ से बढ़ी महंगाई के कारण हर अमेरिकी परिवार पर सालाना 400 डॉलर का टैक्स बढ़ गया है.
इतना ही नहीं, टैरिफ के कारण अमेरिका का व्यापार घाटा भी कम नहीं हुआ. अमेरिकी सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि 2024 में उसका कुल व्यापार घाटा 1,202 अरब डॉलर था. 2025 में ये बढ़कर 1,230 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया. यानी, टैरिफ के बावजूद अमेरिका का व्यापार घाटा 28 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ा.
अब जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध बता दिया है तो एक नया संकट भी खड़ा हो गया है. इस फैसले के बाद रिफंड का मुद्दा भी उठ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में रिफंड को लेकर कुछ नहीं कहा. लेकिन माना जा रहा है कि अब रिफंड का मामला भी अदालत में जा सकता है. कंपनियों ने अब तक जो टैरिफ चुकाया था, उसे वापस मांग सकती हैं. हालांकि, अगर मामला अदालत में जाता है तो ये सालों तक खिंच सकता है.
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