- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल कुओं पर कब्जा करने का समर्थन करते हुए इसे आर्थिक हित बताया है
- ट्रंप ने युद्ध में जीतने वाले को क्षेत्रों और संसाधनों पर अधिकार मिलने के सिद्धांत को अपनाने की बात कही है
- उन्होंने वेनेजुएला मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां से तेल निकालकर युद्ध की लागत वसूल की गई है
दुनिया की नजर में मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह एक 'बिजनेस' है. ईरान के साथ छिड़ी सैन्य जंग के बीच ट्रंप ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने वैश्विक कूटनीति के स्थापित नियमों को हिलाकर रख दिया है. ट्रंप का साफ कहना है कि अमेरिका को ईरान के तेल कुओं पर कब्जा कर लेना चाहिए क्योंकि युद्ध में जीतने वाले को इनाम मिलता है और जीते हुए इलाके पर उसका अधिकार हो जाता है.
क्या है पूरा मामला?
ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं दिखाई कि उनकी प्राथमिकताएं आर्थिक लाभ से जुड़ी हैं. जब उनसे ईरान के तेल संसाधनों को सुरक्षित करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक कहा, "अगर मेरी पसंद चली... तो हां, क्योंकि मैं सबसे पहले एक बिजनेसमैन हूं."
ट्रंप के अनुसार, पिछले 100 सालों में अमेरिका ने ऐसी रणनीति नहीं अपनाई, लेकिन अब समय बदल चुका है और सैन्य जीत को आर्थिक लाभ में बदलना जरूरी है.
वेनेजुएला मॉडल का देने लगे उदाहरण
अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण सामने रखा. उन्होंने दावा किया कि वहां अमेरिकी भागीदारी से भारी ऊर्जा लाभ हुआ है. ट्रंप ने कहा, "हम वेनेजुएला के साथ भागीदार हैं और हमने पहले ही वहां से 100 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल निकाला है. इस तेल ने युद्ध की लागत को कई बार चुका दिया है."
ट्रंप इसी मॉडल को अब ईरान पर लागू करना चाहते हैं. ईरान की सैन्य स्थिति पर तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा कि वह देश अब प्रतिरोध करने की स्थिति में नहीं है. ट्रंप के मुताबिक, "ईरान के पास न नौसेना बची है, न वायुसेना और न ही एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार बचे हैं." उन्होंने तर्क दिया कि जब दुश्मन पूरी तरह टूट चुका हो, तो विजेता के पास संसाधनों पर कब्जा करने का पूरा अधिकार होता है.
हॉर्मुज स्ट्रेट पर 'अमेरिकी टोल'
ट्रंप की योजना केवल तेल कुओं तक सीमित नहीं है. उन्होंने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी एक चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है. ट्रंप चाहते हैं कि इस रास्ते से गुजरने वाले हर कमर्शियल जहाज और कार्गो शिप से अमेरिका 'टोल' वसूल करे.
अब आगे क्या?
ट्रंप का यह रवैया उनकी 'ट्रांजेक्शनल फॉरेन पॉलिसी' को दर्शाता है, जहाँ हर सैन्य कदम के पीछे एक वित्तीय लाभ छिपा होता है. हालांकि, किसी देश के संसाधनों को इस तरह जब्त करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ जा सकता है.
फिलहाल, ट्रंप ने सारा दारोमदार आने वाली बातचीत पर छोड़ रखा है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बातचीत एक डेडलाइन की तरफ बढ़ रही है और वे केवल उसी डील पर दस्तखत करेंगे जो उनके मानदंडों पर खरी उतरेगी.
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