- अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन की जंग के बाद दो सप्ताह का सीजफायर और शांति वार्ता हुई है
- इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के गांवों में घरों को रिमोट कंट्रोल से विस्फोट कर तबाह करने की रणनीति अपनाई है
- इस रणनीति को डोमिसाइड नामक सुनियोजित तरीके से आम नागरिकों के घर नष्ट करने के रूप में वर्गीकृत किया गया है
मिडिल ईस्ट में 40 दिन की भीषण जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हो गया. दोनों देशों ने शांति वार्ता भी की. एक ओर ये शांति की बातें चल रही थीं और दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले किए. दक्षिणी लेबनान की बॉर्डर एरिया के गांवों से तबाही की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसनें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों की चिंता बढ़ा दी है. इज़राइली सेना ने यहां सुनियोजित तबाही की नई रणनीति अपनाई है.
घरों को विस्फोटों से उड़ा रहा इजरायल
'द गार्डियन' के अनुसार, इजराइली सेना (IDF) दक्षिणी लेबनान के गांवों में घरों के भीतर विस्फोटक लगाकर उन्हें रिमोट कंट्रोल से उड़ा रही है. तैबेह, नकौरा और देर सेरियन जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर हुए धमाकों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिन्हें खुद इजराइली सेना ने पोस्ट किया है. लेबनानी मीडिया ने सीमा के पास के कुछ और गांवों में भी इसी तरह के बड़े धमाकों की खबरें दी हैं, हालांकि इन दावों की पुष्टि करने वाली सैटेलाइट तस्वीरें तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाईं.
गार्डियन का कहना है कि ये तोड़फोड़ इजरायल के रक्षा मंत्री काट्ज़ के उस सार्वजनिक आह्वान के बाद की गई, जिसमें उन्होंने सीमावर्ती गांवों के सभी घरों को नष्ट करने की बात कही थी. यह तरीका गाजा के रफाह और बेत हनौन में अपनाए गए तरीके पर आधारित था. दक्षिणी गाजा के रफाह में इजरायली सेना ने 90 प्रतिशत घरों को नष्ट कर दिया था. गार्डियन ने बताया कि गाजा में आम नागरिकों के घरों को बड़े पैमाने पर तबाह करने की इसी रणनीति को शिक्षाविदों ने 'डोमिसाइड'नाम दिया है. इसका अर्थ है आम नागरिकों के घरों को जान-बूझकर और सुनियोजित तरीके से नष्ट करना या नुकसान पहुंचाना, ताकि पूरे इलाके को रहने लायक न छोड़ा जाए. इस तरीके का इस्तेमाल करने के कारण इजरायल पर गाजा में नरसंहार के आरोप भी लगे हैं.

लेबनान में लगातार हमले कर रहा है ईरान
ईरान समर्थित समूह हिज्बुल्लाह द्वारा रॉकेट दागे जाने के जवाब में, इजरायली सेना ने लेबनान में हवाई हमले किए हैं और जमीनी घुसपैठ भी की है. लेबनानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार को देश के दक्षिणी हिस्से में इजरायली हमलों में 18 लोगों की मौत हो गई. इसके साथ ही युद्ध शुरू होने के बाद से लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों में मारे गए लोगों की कुल संख्या 2,000 से ज्यादा हो गई है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह लेबनान के साथ एक ऐसा शांति समझौता चाहते हैं जो कई पीढ़ियों तक कायम रहे. लेकिन यह शांति समझौता हिज्बुल्लाह पर लागू नहीं होगा, जिसे इजरायल अब भी एक आतंकवादी संगठन मानता है.
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क्या कह रहा इजरायल?
इजरायली सेना ने बार-बार यह दावा किया है कि ये तोड़फोड़ हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर की गई थी, जिसमें वे सुरंगें और सैन्य ठिकाने भी शामिल थे जिन्हें इस समूह ने कथित तौर पर आम नागरिकों के घरों के अंदर बना रखा था. इजरायल ने घोषणा की है कि वह दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेगा और पूरे इलाके में, लिटानी नदी तक फैला हुआ एक सुरक्षा क्षेत्र स्थापित करेगा. विस्थापित निवासियों को तब तक लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि इजराइल के उत्तरी शहरों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती. इससे लंबे समय तक विस्थापन बने रहने की चिंताएं बढ़ गई हैं.
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