ऑपरेशन सिंदूर के वक्त ऐसी खबर आई थी भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर फैसिलिटी किराना हिल्स पर भी हमला किया था. अब उस ऑपरेशन के एक साल से भी ज्यादा वक्त गुजर जाने के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है. पाकिस्तान के इस परमाणु ठिकाने पर भारतीय ड्रोन गिरा जरूर था, लेकिन वहां हमला करने का कोई इरादा नहीं था. असल में कम फ्यूल की वजह से वो ड्रोन वहां गिर गया था.
अब पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पहली बार इस बारे में विस्तार से बात की है. उन्होंने बताया कि किराना हिल्स के पास जो हुआ, वो असल में भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन की वजह से था। माना जा रहा है कि यह इजरायल में डिजाइन किया गया हारोप ड्रोन था। एक रडार को निशाना बनाने के लिए उस ड्रोन को भेजा गया था, लेकिन बीच में फ्यूल खत्म हो गया.
जनरल चौहान ने आगे कहा कि मैं आपको इसली वजह बता सकता हूं. इन हमलों से पहले हमने सरगोधा और किराना हिल्स की ओर बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे. किराना हिल्स, सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में पड़ता है. ये लोइटरिंग म्यूनिशन सरगोधा और उसके आसपास मौजूद रडार को तलाश में थे. समझने वाली बात है कि ऐसे हथियारों की एक निश्चित उड़ान अवधि रहती है. ये करीब दो घंटे तक इलाके में मंडरा सकते तो सकते हैं, लेकिन अगर इन्हें कोई लक्ष्य नहीं मिलता तो ये वापस आकर कहीं न कहीं गिर ही जाते हैं. जनरल चौहान मानते हैं कि ऐसा हो सकता है कि एक लोइटरिंग म्यूनिशन आया और किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकरा गया हो.
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने इस बात का भी खुलासा किया कि भारतीय एयरफोर्स को पाक अधिकृत कश्मीर के स्कार्दू क्षेत्र में भी हमला करने की इजाजत मिल चुकी थी. लेकिन खराब मौसम की वजह से ऐन वक्त पर वो मिशन छोड़ना पड़ा था.
इस बारे में जनरल चौहान ने कहा कि चीफ ने मुझ से पूछा था अगर हम सरर्गोदा में हमला कर सकते हैं. मैंने कहा था कि हम इस मिशन पर आगे बढ़ सकते हैं. तब चीफ ने हमे दो और टारगेट चुनने के लिए कहा था. एक उसमें से स्कार्दू था. हमने उस मिशन के लिए हां बोला था, लेकिन थोड़ी देर बाद मौसम खराब हो गया और हमें भोलारी की तरफ मुड़ना पड़ा.
अब जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के लिए किराना हिल्स का लोकेशन बड़ा रणनीतिक माना जाता है. किराना हिल्स पाकिस्तान के सरगोधा एयरपोर्ट से सड़क के रास्ते केवल 20 किमी और कुशाब न्यूक्लियर प्लांट से 75 किमी दूर है. वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन ने अपनी एक रिपोर्ट (जिसे फरवरी 2025 में अपडेट किया गया) में लिखा कि इस्लामाबाद से 200 किमी दक्षिण में खुशाब में, हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम के उत्पादन के लिए समर्पित चार भारी जल (हेवी वाटर) रिएक्टर हैं. किराना हिल्स में पाकिस्तान आर्मी ने जो फैसिलिटी बना रखी है, उसको कई लेयर वाली रक्षा प्रणाली के साथ डिजाइन किया गया है. माना जाता है कि यहीं पर पाकिस्तान ने अपने न्यूक्लियर वॉरहेड यानी परमाणु हथियार छिपा रखे हैं.
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर की पहलगाम घाटी में आतंकी हमला हुआ था. आतंकियों ने वहां घूमने आए पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी थी. इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे. इस हमले के कुछ दिन बाद 6 और 7 मई की रात को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था. ये ऑपरेशन 25 मिनट तक चला था. इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में बने 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया था. इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयार और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी ठिकाने शामिल थे.
इसके बाद बौखलाकर पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने की कोशिश की थी. लेकिन भारत ने उसकी हालत खराब कर दी. भारत ने पाकिस्तान के दर्जनभर एयरबेस पर हमला कर उसे तहस-नहस कर दिया. आखिरकार 10 मई को पाकिस्तान ने सीजफायर की गुजारिश की, जिसके बाद दोनों देश गोलीबारी रोकने पर सहमत हुए.
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