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This Article is From Mar 08, 2025

जैसे खून का फव्वारा निकला... अमेरिका में 15 साल बाद फायरिंग स्क्वाड से दिया मृत्युदंड, पत्रकार की आंखोंदेखी

ब्रैड सिगमन ने अंतिम समय में सजा पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया. साउथ कैरोलिना के गवर्नर हेनरी मैकमास्टर ने भी उनकी क्षमादान की अपील को खारिज कर दिया.

जैसे खून का फव्वारा निकला... अमेरिका में 15 साल बाद फायरिंग स्क्वाड से दिया मृत्युदंड, पत्रकार की आंखोंदेखी
फायरिंग स्क्वाड कैदी के दिल को निशाना बनाकर गोली चलाता है. (AI Image)
वॉशिंगटन:

'सारी गोलियां एक झटके में दागी गई थीं. तीनों गोलियां एक आवाज करते हुए निकलीं. सबकुछ एक झटके में हुआ. जब गोलियां उसके शरीर में घुसीं तो मैंने देखा कि खून का एक छोटा फव्वारा सा फूटा है. खून बहुत ज्यादा नहीं था, लेकिन वह खून के छींटों की शक्ल में निकला. गोली लगने के बाद उसकी बांहें अकड़ गई थीं. उसके सीने के पास कुछ हलचल हुई. वह सांसें थीं या फिर कुछ और, मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकती. लेकिन 2 से 3 सेकेंड तक शरीर में कुछ हलचल जरूर हुई.' ये आखोंदेखी है एक पत्रकार की, जिसने फायरिंग स्क्वाड को ब्रैड सिगमन को मृत्युदंड देते हुए देखा.

ब्रैड सिगमन ने  क्या किया था अपराध

दक्षिण कैरोलिना में ब्रैड सिगमन (67) को अपनी पूर्व प्रेमिका के माता-पिता की हत्या के आरोप में शुक्रवार को फायरिंग स्क्वाड द्वारा मृत्युदंड दिया गया. फायरिंग स्क्वाड ने इससे पहले साल 2010 में यूटा में मौत की सजा दी थी. यानी अमेरिका में 15 साल बाद गोली चलाकर किसी को मृत्युदंड दिया गया है. जेल प्रवक्ता क्रिस्टी शैन ने बताया कि ब्रैड सिगमन ने साल 2001 में बेसबॉल बैट से डेविड और ग्लेडिस लार्के की हत्या की थी और अपने जुर्म को कबूल था. राज्य की राजधानी कोलंबिया के ब्रॉड रिवर सुधार संस्थान में तीन सदस्यीय फायरिंग स्क्वाड ने उन्हें गोली मारी.

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15 फीट की दूरी से चलाई जाती है गोली

फायरिंग स्क्वाड कैदी के सिर को एक हुड से ढकता है और एक धातु की सीट पर उस बैठाया जाता है. फिर उसके हाथ और पैर को बांधा जाता है. प्रोटोकॉल के अनुसार, 'वार्डन द्वारा फांसी का आदेश पढ़े जाने के बाद, स्क्वाड गोली चलाता है. आमतौर पर कैदी के दिल को निशाना बनाकर गोली चलाई जाती है. ये गोली 15 फीट की दूरी से चलाई जाती है. कैदी और फायरिंग स्क्वाड के बीच एक दीवार होती है. ऐसे में कैदी को दिखता नहीं है कि उसपर कौन गोली चला रहा है.

सजा पर रोक लगाने का किया था अनुरोध

सिगमन ने अंतिम समय में सजा पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया. साउथ कैरोलिना के गवर्नर हेनरी मैकमास्टर ने भी उनकी क्षमादान की अपील को खारिज कर दिया. सिगमन के पास मृत्युदंड के लिए लीथल इंजेक्शन, फायरिंग स्क्वाड या इलेक्ट्रिक चेयर में से किसी एक को चुनने का विकल्प था.

कैसे मरना है, रखे गए थे 3 विकल्प

ब्रैड सिगमन के वकीलों में से एक गेराल्ड बो किंग ने कहा कि सिगमन ने फायरिंग स्क्वाड को चुना था. उन्होंने कहा, उसे 'बेहद क्रूर' निर्णय लेने के लिए मजबूर किया गया था कि वह कैसे मरेगा. किंग ने कहा, 'यदि वह लीथल इंजेक्शन या फायरिंग स्क्वाड का विकल्प नहीं चुनते, तो उनकी मृत्यु दक्षिण कैरोलिना की प्राचीन इलेक्ट्रिक चेयर पर होती, उन्हें जिंदा जला और पका दिया जाता. लेकिन विकल्प भी उतना ही भयावह था'.

  1. इस वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका में छह लोगों को मौत की सजा दी गई है, जबकि पिछले वर्ष 25 लोगों को मृत्युदंड दिया गया था.
  2. 1976 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मृत्युदंड को पुनः लागू किए जाने के बाद से अमेरिका में अधिकांश मृत्युदंड घातक इंजेक्शन द्वारा दिये गए हैं.
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका में फायरिंग स्क्वाड ने अंतिम मृत्युदंड 2010 में यूटा में दिया था.
  4. फायरिंग दस्ते द्वारा दो अन्य 1996 और 1977 में मृत्युदंड दिए गए थे.
  5. दक्षिण कैरोलिना और यूटा के अलावा तीन अन्य राज्य - इडाहो, मिसिसिपी और ओक्लाहोमा ने भी फायरिंग स्क्वाड के उपयोग को मंजूरी दे रखी है.
  6. अमेरिका के 50 राज्यों में से 23 में मृत्युदंड को समाप्त कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य राज्यों - कैलिफोर्निया, ओरेगन और पेंसिल्वेनिया में इस पर रोक लगा दी गई है.
  7. एरिजोना, ओहियो और टेनेसी ने फांसी की सज़ा पर रोक लगा दी थी, लेकिन हाल ही में उन्हें फिर से शुरू करने की योजना की घोषणा की.
  8. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मृत्युदंड के समर्थक हैं और पदभार ग्रहण करने के अपने पहले दिन उन्होंने "सबसे जघन्य अपराधों के लिए" इसके उपयोग के विस्तार का आह्वान किया.

नाइट्रोजन गैस से दी गई मौत की सजा

अमेरिकी राज्य अलबामा में हाल ही में नाइट्रोजन गैस का उपयोग करके चार लोगों को मृत्युदंड दिया गया था.  इस तरह से मृत्युदंड देने को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने क्रूर और अमानवीय करार दिया था. इस दौरान  चेहरे पर पहने जाने वाले मास्क में नाइट्रोजन गैस डाली जाती है, जिससे कैदी का दम घुट जाता है.

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