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चीन में सबसे ज्यादा बिक रही सिगरेट, अर्थव्यवस्था के लिए कैसे संजीवनी बना स्मोकिंग?

साल 2025 में इस सरकारी तंबाकू कंपनी ने टैक्स और मुनाफे के जरिए चीन सरकार को 244 बिलियन डॉलर की कमाई करके दी. यह रकम चीन के कुल सरकारी राजस्व का लगभग 7 प्रतिशत है, जो कि चीन के कुल रक्षा बजट के लगभग बराबर बैठती है.

चीन में सबसे ज्यादा बिक रही सिगरेट, अर्थव्यवस्था के लिए कैसे संजीवनी बना स्मोकिंग?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता में आते ही तंबाकू प्रोडक्ट पर नकेल कसने की बात कही थी.
AFP

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक दशक से भी पहले जब सत्ता संभाली थी तो देश में तंबाकू के इस्तेमाल पर नकेल कसने का बड़ा वादा किया था. लेकिन आज हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है. जहां पूरी दुनिया में सिगरेट पीने वालों की संख्या तेजी से घट रही है, वहीं चीन दुनिया का सबसे बड़ा सिगरेट बाजार बनकर उभरा है. हालात ये हैं कि दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली कुल सिगरेट का करीब आधा हिस्सा अकेले चीन के लोग धुआं बनाकर उड़ा रहे हैं.

आंकड़े गवाह हैं कि चीन इस मामले में दुनिया के बाकी देशों से बिल्कुल अलग दिशा में चल पड़ा है. साल 2003 से 2023 के बीच जहां पूरी दुनिया में सिगरेट की बिक्री में 26.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, वहीं इसी दौरान चीन में सिगरेट की खपत 39 प्रतिशत तक बढ़ गई. आज 141.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश में हर साल लगभग 2.44 लाख करोड़ (2.44 ट्रिलियन) सिगरेट बिक रही हैं. ये अपने आप में एक चौंकाने वाला आंकड़ा है.

चीनी सरकार की अपनी सिगरेट कंपनी

इस पूरे खेल के केंद्र में चीन की सरकारी कंपनी 'चाइना नेशनल टोबैको कॉरपोरेशन' (CNTC) है, जिसे आम तौर पर 'चाइना टोबैको' कहा जाता है. यह कंपनी इतनी विशाल है कि दुनिया भर में बिकने वाली कुल सिगरेट का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले यही बनाती है. इसकी उत्पादन क्षमता दुनिया की कई बड़ी तंबाकू कंपनियों की कुल ताकत से भी ज्यादा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब युवा पीढ़ी में सिगरेट का क्रेज कम हो रहा है तो फिर चीन में इसकी बिक्री इतनी क्यों बढ़ रही है?

इसकी सबसे बड़ी वजह है सिगरेट के बेहद सस्ते दाम. चीन में सिगरेट के एक पैकेट की औसत कीमत लगभग $3 (करीब 250 रुपये) है. यह कीमत अमेरिका जैसे देशों के मुकाबले सिर्फ एक तिहाई है. जेब पर भारी न पड़ने के कारण लोग आसानी से इसे खरीद रहे हैं.

इसके अलावा चीन की व्यवस्था में एक अजीब विरोधाभास है. इसके लिए सरकारी संस्था देश में तंबाकू पर नियम-कानून बनाने के लिए जिम्मेदार है, वही संस्था इस सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी को चलाती भी है. यानी रक्षक और भक्षक, दोनों एक ही हैं.

सेना के बजट जितनी तंबाकू से कमाई

चीन की 'स्टेट टोबैको मोनोपॉली एडमिनिस्ट्रेशन' ही नियम तय करती है और वही व्यापार भी संभालती है. इस दोहरी भूमिका के पीछे छिपी है वो मोटी कमाई, जिसे छोड़ पाना चीनी सरकार के लिए मुमकिन नहीं दिख रहा. साल 2025 में इस सरकारी तंबाकू कंपनी ने टैक्स और मुनाफे के जरिए चीन सरकार को 244 बिलियन डॉलर की कमाई करके दी. यह रकम चीन के कुल सरकारी राजस्व का लगभग 7 प्रतिशत है, जो कि चीन के कुल रक्षा बजट के लगभग बराबर बैठती है.

मौजूदा समय में जब चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है और वहां का रियल एस्टेट (प्रॉपर्टी) संकट गहराया हुआ है, तब तंबाकू से होने वाली यह बंपर कमाई चीनी सरकार के लिए ऑक्सीजन का काम कर रही है. स्थानीय सरकारों की जमीन बेचने से होने वाली आमदनी बंद हो चुकी है, ऐसे में सिगरेट से आने वाला पैसा सरकारी खजाना भरने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है.

खुद चीनी वैज्ञानिकों ने खोली सरकार के दोहरे चेहरे की पोल

खुद चीन के भीतर हुए शोध बताते हैं कि सिगरेट के खिलाफ अभियान क्यों फेल हो रहा है. साल 2022 में चीन के 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड Prevention' (CDC) की एक स्टडी में साफ कहा गया कि देश में धूम्रपान कम न होने की सबसे बड़ी वजह सरकारी तंबाकू कंपनी का दखल और खुद सरकार का इस मामले में अस्पष्ट और ढुलमुल रवैया है. सरकार एक तरफ सेहत की बात करती है, तो दूसरी तरफ तंबाकू के कारोबार को बढ़ावा देती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर झेंग रोंग के एक अध्ययन ने इस पूरी कहानी को और साफ कर दिया है. उनके मुताबिक, चीन में बिकने वाली हर एक सिगरेट से होने वाली कुल कमाई का लगभग आधा हिस्सा सीधे सरकार की जेब में जाता है. यही वो कड़वी सच्चाई है जिसके आगे राष्ट्रपति शी जिनपिंग का तंबाकू मुक्त चीन बनाने का वादा सिर्फ कागजों और बयानों तक सीमित रह गया है.

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