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चीन ने बनाया सुपरकंप्यूटर का बाप, जानिए किसके पास Top 5 Supercomputer

चीन का लाइनशाइन सुपरकंप्यूटर अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे तेज और पावरफुल सुपरकंप्यूटर बन गया है. यह सुपरकंप्यूटर खास है क्योंकि इसका हर प्रोसेसर चीन में बना है.

चीन ने बनाया सुपरकंप्यूटर का बाप, जानिए किसके पास Top 5 Supercomputer
चीन ने बनाया दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर ( फोटो: शेनझेन में नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर)
  • दुनिया के सबसे तेज, सबसे पावरफुल सुपरकंप्यूटर की दौड़ में बड़ा उलटफेर. 9 साल बाद टॉप पर चीन का सुपरकंप्यूटर
  • चीन के इस सुपरकंप्यूटर का नाम लाइनशाइन है, यह सुपरकंप्यूटर चीन के दक्षिणी शहर शेन्जेन में स्थित है
  • लाइनशाइन को पूरी तरह चीन में डिजाइन किए गए प्रोसेसरों से बनाया गया है

दुनिया के सबसे तेज, सबसे पावरफुल सुपरकंप्यूटर की दौड़ में बड़ा उलटफेर हुआ है. इस रेस में लगभग एक दशक तक टॉप पर रहने वाले अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन ने नंबर वन की कुर्सी पर कब्जा कर लिया है. खास बात यह है कि यह उपलब्धि चीन ने किसी विदेशी तकनीक के सहारे नहीं, बल्कि पूरी तरह अपनी घरेलू तकनीक से हासिल की है. यह उपलब्धि दिखाती है कि बीजिंग उन्नत कंप्यूटिंग क्षमता बनाने के लिए अपनी खुद की तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और अमेरिकी की बादशाहत को हर मोर्चे पर चुनौती दे रहा है.

इस सुपरकंप्यूटर का नाम लाइनशाइन है. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में आयोजित बड़े कंप्यूटिंग सम्मेलन ISC में जारी की गई इस फेमस TOP500 रैंकिंग में लाइनशाइन को दुनिया का नंबर-1 सुपरकंप्यूटर घोषित किया गया. साल 2017 के बाद यह पहली बार है जब किसी चीनी सुपरकंप्यूटर ने इस लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया है. 

यह रैंकिंग 1993 से हर साल दो बार जारी की जाती है और इसे दुनिया की कंप्यूटिंग ताकत का अनौपचारिक स्कोरबोर्ड माना जाता है.

इस सुपरकंप्यूटर के बारे में जानिए

लाइनशाइन ने पहले नंबर पर मौजूद अमेरिकी सुपरकंप्यूटर एल कैपिटन को पीछे छोड़कर उलटफेर किया है. यह सुपरकंप्यूटर चीन के दक्षिणी शहर शेन्जेन में स्थित है. इसकी लगातार काम करने की स्पीड 2.2 एक्साफ्लॉप्स दर्ज की गई. एक्साफ्लॉप्स यह मापता है कि कोई कंप्यूटर एक सेकंड में कितनी गणनाएं (कैल्कुलेशन) कर सकता है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लाइनशाइन को पूरी तरह चीन में डिजाइन किए गए प्रोसेसरों से बनाया गया है. इसमें उन अमेरिकी चिप्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है, जिन पर दुनिया के अधिकांश शीर्ष सुपरकंप्यूटर चलते हैं. यहां यह भी ध्यान देने की बात है कि ऐसा नहीं है कि अमेरिका बहुत पीछे हो गया है. अमेरिका अभी भी टॉप 4 में से तीन स्थानों पर मौजूद है. एल कैपिटन सुपरकंप्यूटर कैलिफोर्निया स्थित लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी में रखा गया है और यह दूसरे स्थान पर रहा.

वहीं यूरोप की ओर से जर्मनी का ज्यूपिटर बूस्टर टॉप सुपरकंप्यूटरों की लिस्ट में पांचवें स्थान पर रहा.

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