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चीन पहुंचे बांग्लादेश के PM तारिक रहमान, शी जिनपिंग से करेंगे मुलाकात; तीस्ता पर भारत की नजर

24 जून को तारिक रहमान कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग करेंगे और बाद में उसी दिन हाई-स्पीड ट्रेन से डालियान से बीजिंग के लिए निकलेंगे. रहमान इस ट्रिप पर दूसरे देशों के नेताओं से भी मिलेंगे. 

चीन पहुंचे बांग्लादेश के PM तारिक रहमान, शी जिनपिंग से करेंगे मुलाकात; तीस्ता पर भारत की नजर
तीस्ता प्रोजेक्ट भारत की सरहद से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर है. ये इलाका बेहद संवेदनशील है.

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन के तीन दिवसीय दौरे पर गए हैं. इस दौरे पर वह अपनी पत्नी जुबैदा रहमान का साथ गए हैं. तारिक रहमान डालियान में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ओर से आयोजित न्यू चैंपियंस की 17वीं सालाना मीटिंग (समर दावोस फोरम 2026) में हिस्सा लेंगे. रहमान मंगलवार शाम चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग की ओर से दी जाने वाली दावत में शामिल होंगे. इस यात्रा पर वह बाद में बीजिंग जाने पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मिलेंगे. 

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से तारिक रहमान के दौरे को बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए एक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीनी पक्ष इस दौरे को बांग्लादेश की नई सरकार के साथ मिलकर स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन को मजबूत करने, पारंपरिक दोस्ती को आगे बढ़ाने, हाई-क्वालिटी बेल्ट एंड रोड सहयोग को आगे बढ़ाने, सभी सेक्टर में लेन-देन और सहयोग बढ़ाने, मल्टीलेटरल मामलों में कोऑर्डिनेशन बढ़ाने और चीन-बांग्लादेश कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक कोऑपरेटिव पार्टनरशिप को बढ़ावा देने के मौके के तौर पर देख रहा है.

तीस्ता को लेकर हो सकती है बातचीत, भारत की रहेगी नजर 

तारिक रहमान के चीन दौरे पर भारत की नजर है. भारत इस दौरान तीस्ता प्लान को लेकर किसी भी संभावित ऐलान को लेकर नजर गड़ाए हुए है. इस साल जनवरी में बांग्लादेश वॉटर डेवलपमेंट बोर्ड और चीनी सरकार की कंपनी पावर चाइना ने एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग को आगे बढ़ाने के लिए साइन किया था. इसके तहत तीस्ता कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा सका है.

इस प्रोजेक्ट के मुख्य मकसद हैं, तीस्ता नदी के सिस्टम को कंट्रोल करने के लिए रिवर ट्रेनिंग, कैपिटल ड्रेजिंग और मेंटेनेंस ड्रेजिंग, नए तटबंध बनाना और मौजूदा की मरम्मत करना, ड्रेज्ड मटीरियल से जमीन को ठीक करना और स्टोरेज बनाकर सूखे मौसम में बहाव का मैनेजमेंट करना है.

भारत की चिंता क्यों बढ़ी?

लेकिन भारत को इस प्रोजेक्ट में चीन के शामिल होने से असहज है. इस इलाके की लोकेशन और रणनीतिक तौर से सेंसिटिव सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) से इसकी नजदीकी को देखते हुए भारत की चिंताएं बढ़ी हुईं हैं. बांग्लादेश में चीन का असर लगातार बढ़ रहा है. चीन का कहना है कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा गहरा हुआ है और प्रैक्टिकल सहयोग से अच्छे नतीजे मिले हैं.

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