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ये वैली फीवर क्या है? जिससे कैलिफोर्निया में चली गई भारतीय टेक प्रोफेशनल की जान, बेटा पूछ रहा-पापा कब आएंगे?

Indian Techie Death California: लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, चिरंजीवी कोल्ला हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करते थे और सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में रहते थे.

ये वैली फीवर क्या है? जिससे कैलिफोर्निया में चली गई भारतीय टेक प्रोफेशनल की जान, बेटा पूछ रहा-पापा कब आएंगे?
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  • अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल चिरंजीवी कोल्ला की दुर्लभ फंगल संक्रमण से मौत हुई
  • चिरंजीवी कोल्ला को ‘वैली फीवर’ नामक संक्रमण हुआ था, जिससे उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था
  • वे लगभग एक महीने तक आईसीयू में भर्ती थे और वेंटिलेटर पर थे, लेकिन 5 मई को उनका निधन हो गया
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नई दिल्ली:

अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले एक 37 वर्षीय भारतीय टेक प्रोफेशनल की मौत हो गई. बताया गया कि मृतक चिरंजीवी कोल्ला एक दुर्लभ फंगल संक्रमण ‘वैली फीवर' की चपेट में आ गए थे. इससे उनके फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचा और सांस लेने में दिक्कत के बाद उनकी मौत हो गई. चिरंजीवी कोल्ला लगभग एक महीने तक आईसीयू में भर्ती थे, उनके परिवार ने निधन के बाद कोल्ला की फैमिली की सहायता के लिए चंदा भी जुटाया था. 

चिरंजीवी कोल्ला के चचेरे भाई रामा कोटेश्वर राव ने फंडरेजर पोस्ट में बताया कि यह अभियान कोल्ला की पत्नी पवनी मारेला और उनके पांच वर्षीय बेटे विहान की सहायता के लिए शुरू किया गया है.फंडरेजर में कोल्ला को शांत स्वभाव और परिवार के प्रति समर्पित व्यक्ति बताया गया है, जिन्हें उनके सहकर्मियों की ओर से सम्मानित और दोस्तों‑रिश्तेदारों की तरफ से बेहद पसंद किया जाता था.

सबके चहते थे चिरंजीवी कोल्ला

पोस्ट में लिखा गया,“वह ऐसे इंसान थे जो कभी आवाज ऊंची नहीं करते थे, कभी शॉर्टकट नहीं अपनाते थे और कभी किसी को छोटा महसूस नहीं कराते थे.” परिवार के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत में उन्हें सामान्य फ्लू और लगातार खांसी जैसे लक्षण नजर आए.जैसे‑जैसे स्थिति बिगड़ती गई, उन्हें अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों को शुरुआत में गंभीर निमोनिया का संदेह हुआ.

बाद में जांच में पुष्टि हुई कि उन्हें ‘वैली फीवर' नामक फंगल संक्रमण हुआ था, जो कैलिफोर्निया और अमेरिका के दक्षिण‑पश्चिमी क्षेत्रों की मिट्टी में पाए जाने वाले कोक्सिडियोइड्स (Coccidioides) फंगस से होता है. यह संक्रमण उनके फेफड़ों पर गंभीर रूप से हावी हो गया, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया. करीब 30 दिनों तक इलाज और सांस लेने में सहायता मिलने के बावजूद, 5 मई को उनका निधन हो गया.

परिवार के लिए जुटा रहे चंदा

चिरंजीवी कोल्ला की पत्नी अस्पताल में पूरे समय उनके साथ रही, जबकि वह अपने छोटे बेटे को भी संभालने की कोशिश कर रही थीं, जो बार‑बार पूछता था, “पापा घर कब आएंगे?” परिवार के अनुसार, चिरंजीवी कोल्ला घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे.इस फंडरेजर के जरिए अस्पताल के खर्च, अमेरिका और भारत में अंतिम संस्कार,रोजमर्रा के खर्च,बच्चे की देखभाल और उसके भविष्य की पढ़ाई के लिए मदद जुटाने का प्रयास किया जा रहा है. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, चिरंजीवी कोल्ला हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करते थे और सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में रहते थे.

वैली फीवर क्या है?

वैली फीवर, जिसे चिकित्सकीय भाषा में कोक्सीडियोइडोमाइकोसिस (Coccidioidomycosis) कहा जाता है, एक फंगल संक्रमण है.यह बीमारी कोक्सीडियोइड्स (Coccidioides) नामक फंगस के सूक्ष्म कणों (स्पोर्स) को सांस के जरिए अंदर लेने से होती है.यह फंगस आमतौर पर कैलिफोर्निया, एरिजोना और अमेरिका के दक्षिण‑पश्चिमी इलाकों की सूखी मिट्टी में पाया जाता है. ज्यादातर लोगों में इस संक्रमण के बाद हल्के फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं  या कई मामलों में कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ मामलों में, खासकर जब संक्रमण फेफड़ों तक फैल जाता है, तो यह गंभीर और जानलेवा भी हो सकता है. इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
➔खांसी
➔बुखार
➔सीने में दर्द
➔थकान
➔सांस लेने में दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर मामलों की संख्या कम होती है, लेकिन जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर होती है या जिन्हें पहले से कोई बीमारी होती है, उनमें जटिलताओं का खतरा अधिक होता है.

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