ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को जमानत पर रिहा कर दिया गया है. इससे पहले उनके समर्थकों ने चेतावनी दी थी कि जेल में उनकी मौत हो सकती है. इस बीच उन्हें तुरंत इलाज के लिए तेहरान भेज दिया गया है. ईरान के पादरी सिस्टम के खिलाफ कैंपेन चलाने के लिए जेल में बंद एक्टिविस्ट को कथित तौर पर हिरासत में दो बार दिल का दौरा पड़ा.
ईरानी अधिकारियों ने रविवार को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को उनकी सेहत को लेकर बढ़ती चिंता के बाद जमानत पर रिहा कर दिया और उन्हें इलाज के लिए पहले ही तेहरान भेज दिया गया है.
उत्तरी ईरान के जंजान में 10 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद मोहम्मदी की जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया. उनके फाउंडेशन ने बयान में इसकी जानकारी दी.
'पहचान में नहीं आ रहीं'
उनकी पेरिस में रहने वाली वकील चिरिन अर्दकानी ने पिछले हफ़्ते कहा था कि मोहम्मदी का जेल में 20 किलोग्राम वजन कम हो गया था. उन्हें बोलने में दिक्कत हो रही थी और हाल ही में हुई गिरफ्तारी से पहले उनकी हालत बहुत खराब थी. वो अब पहचान में नहीं आ रहीं हैं.
ईरान और अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध से उनकी हालत पर भी असर पड़ा है. इस जंग के दौरान उनकी जेल के पास कम से कम तीन एयर स्ट्राइक हुए हैं.
एक दशक से बच्चों से नहीं मिली
मोहम्मदी ने ईरानी कुर्द महिला महसा अमिनी की कस्टडी में मौत के बाद शुरू हुए 2022-2023 के विरोध प्रदर्शनों का ज़ोरदार समर्थन किया था, लेकिन इस साल जनवरी में हुए बड़े प्रदर्शनों से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. मौत की सजा और महिलाओं के लिए जरूरी हेडस्कार्फ के खिलाफ कैंपेन चलाने के साथ-साथ, उन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान पर राज करने वाले मौलवी सिस्टम के खत्म होने की बात भी की थी.
मोहम्मदी के जुड़वां टीनएज बच्चे अली और कियाना रहमानी पेरिस में रहते हैं और पढ़ते हैं. वे अब एक दशक से ज्यादा समय से अपनी मां से नहीं मिले हैं। जब वह जेल में थीं, तब उन्हें उनकी तरफ से नोबेल प्राइज मिला था.
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